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सुख-दुख

प्रभात खबर अख़बार के एजेंट मनोज के निधन पर पत्रकार पल्लव ने यूँ किया याद!

प्रदीप पल्लव-

टना से प्रभात खबर का प्रकाशन शुरू हो गया था। तापमान वाले अविनाश चंद्र मिश्रा जी संपादक थे। कई लोगों ने गोड्‌डा से प्रभात खबर में लिखने के लिए आवेदन दिया था। राघवेंद्र भैया भागलपुर के ब्यूरो चीफ थे। उस समय सभी अखबार पटना से ही छपकर गोड्‌डा आते थे। उनके कहने पर आवेदन दिया और प्रभात खबर का कमान गोड्‌डा के लिए मुझे ही मिला।

उस समय अखबार में लिखना और उसका संवाददाता बनना बहुत बड़ी बात थी। पटना से प्रभात खबर की प्रति गोड्‌डा आने लगी। उस समय जायसवाल जी के पास अधिकांश अखबार की एजेंसी थी। वह प्रभात खबर को देखना नहीं चाहते थे। जो प्रभात खबर की प्रति बेचे उसे जायसवाल एजेंट दूसरा अखबार बेचने के लिए देते ही नहीं। कई बार इसका मैंने सामने से विरोध किया। अंत में सभी हॉकरों ने प्रभात खबर बेचना ही छोड़ दिया।

मैं खुद प्रभात खबर की प्रति खरीदता और लोगों को मुफ्त में बांटता। प्रभात खबर को लोग जाने इसके लिए प्रभात खबर के मुख्य पृष्ठ पर मोटे अक्ष्ररों में छपे प्रभात खबर को कैंची से काटकर कालेज के हर दरवाजे, पेट्रोल पंप, तथा अन्य सार्वजनिक स्थानों पर रात में जाकर गोंद से चिपकाता। दूसरी ओर मैं भी जूनूनी पागल बन गया था कि प्रभात खबर गोड्‌डा में बिकेगा। उस समय मोनी बरियार जी धार्मिक पुस्तक आदि ठेला पर बेचा करते थे। मैं उसे प्रभात खबर देने लगा और वे कुछ प्रति बेचने लगे। यही से मोनी बरियार से परिचय हुआ।

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