Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सुख-दुख

मीडिया पर उँगली उठाते समय याद रखिए हाथ की पांचों उँगलियां बराबर नहीं होतीं

खुशदीप सहगल-

मौसमी सिंह को मैं करीब पिछले दस साल से जानता हूं. आज तक और इंडिया टुडे में रहते मौसमी की कई रिपोर्ट्स को मैंने एडिट, रीराइट, ट्रांसलेट किया. ऐसी निर्भीक और बिना किसी लाग-लपेट सच कहने वाली रिपोर्टर मैंने कोई नहीं देखी. वो भी मेनस्ट्रीम मीडिया में रहते. दिलेर इतनी कि पहरे के बावजूद लखनऊ में एक बार छत से कूद कर अंदर की रिकॉर्डिंग कर लाई थीं.

पॉलिटिकल अच्छी पकड़ होने के साथ मौसमी का जो सबसे सशक्त पक्ष मुझे लगा वो है ह्यूमन एंगल या मानवीय संवेदना के मुद्दों पर रिपोर्टिंग करना. कोरोना के दिनों में मौसमी की ऐसी कई स्टोरीज़ पर मैंने काम किया, इसलिए मैं अच्छी तरह ये जानता हूं.

मौसमी के मामाजी और मूर्धन्य पत्रकार स्व. शेष नारायण सिंह से मेरा बड़ा लगाव रहा. मेरे मुश्किल दिनों में उन्होंने मार्गदर्शक की भूमिका निभाई थी.

राहुल गांधी ने हाल में एक प्रेस कांफ्रेंस में मौसमी के सवाल पूछने पर बीजेपी का बैज लगाने की बात कह डाली. राहुल की मीडिया से नाराज़गी समझी जा सकती है लेकिन सभी को एक चाबुक से हांक देना उनकी नादानी है. राहुल आप नरेंद्र मोदी को कटघरे में इसलिए खड़ा करते हैं कि उन्होंने पिछले दस साल में एक बार भी प्रेस कांफ्रेंस में सवालों का सामना नहीं किया. फिर आप क्यों किसी पत्रकार के सवाल पर जवाब देने की जगह इस तरह की हल्की बात कर गए? वो भी तब जब मौसमी बीते कई साल से कांग्रेस बीट कवर कर रही हैं, आप खुद और आपके नेता भी मौसमी को अच्छी तरह जानते होंगे.

आपमें और फिर नरेंद्र मोदी के प्रेस कांफ्रेंस में सवालों से बचने में फ़र्क़ क्या रहा. और मीडिया पर उंगली उठाते समय याद रखिए कि हाथ की पांचों उंगलियां बराबर नहीं होतीं…

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन