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चालीस लाख सालाना कमाने वाला भी मुश्किल में जी रहा, देखें गणित

रंगनाथ सिंह-

हो सकता है कि कुछ सालों में कॉलेज में बच्चों को पढ़ाया जाने लगे कि महंगाई वो आर्थिक परिघटना है जो भाजपा नेताओं को नहीं महसूस होती। आज ट्वीटर पर एक सज्जन ने 40 लाख रुपये सालाना कमाने वाले का दर्दे दिल साझा किया है। साल के 40 लाख कमाने वाले का ये हाल है तो 4 लाख कमाने वाला किस हाल में जी रहा होगा!

आम मान्यता है कि राजनीतिक दल अपने वोट बैंक के हिसाब से फैसले लेते हैं। शहरी मध्यवर्ग भाजपा का सबसे पुराना और भरोसेमंद वोटबैंक रहा है। वह कभी सड़क पर नहीं उतरता शायद इसलिए सरकार कभी उसकी टेंशन नहीं लेती। पिछले कुछ महीनों के दौरान यही लगा कि भाजपा नेताओं को छोड़कर मध्यवर्ग समेत बाकी सभी लोग महंगाई की वजह से काफी तनाव में है लेकिन लगता नहीं है कि सरकार को इसकी परवाह है।

हो सकता है कि इस पोस्ट पर भी महंगाई विशेषज्ञ यह समझाने लगें कि महंगाई एक मानसिक अवस्था है लेकिन ऐसे लोग भूल जाते हैं कि मानसिक अवस्था गड़बड़ाने पर जनता झल्लाकर एक ही काम करती है। चुनाव के दौरान पंतप्रधान ने कहा था कि बीते 10 साल केवल ट्रेलर थे, फिल्म अभी बाकी है। चुनाव परिणाम के माध्यम से शायद जनता ने भी यही सन्देश दिया है कि अभी ट्रेलर देख लें, अपेक्षित सुधार नहीं हुए तो पूरी फिल्म पाँच साल बाद रिलीज की जाएगी।

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