
सुरेंद्र किशोर-
अमेरिका में गिरफ्तार राहुल गांधी को बचाने वाले ‘अटलजी’ को कांग्रेस याद कर रही है!
जब तक नेशनल हेराल्ड मुकदमा तथा इस तरह के अन्य मुकदमे अपनी तार्किक परिणति तक नहीं पहुंच जाते, तब तक कांग्रेस पार्टी-प्रतिपक्ष सदन के भीतर और बाहर बवाल करते रहेगे। संकेत हैं कि आने वाले दिन लोकतंत्र -शांति व्यवस्था-सदन के गरिमापूर्ण संचालन के लिए अच्छे नहीं हैं।
जब भाजपा को इस बार लोक सभा में खुद का बहुमत नहीं रहा तो कांग्रेस ने यह उम्मीद की थी कि अब नरेंद्र मोदी, अटल बिहारी वाजपेयी की तरह समझौतावादी बन जाएंगे। कांग्रेस आदि को उनके खिलाफ जारी मुकदमों में मदद कर देंगे। पर, दूसरी ओर जब कांग्रेस ने देखा कि मोदी का रुख-रवैया नहीं बदलने वाला तो बवाल शुरू हो गया।
नये कानून आ गये। उसके तहत मुकदमों को लटकाना-भटकाना अब मुश्किल होगा। जल्दी ही फैसले होंगे। संभावित फैसलों के बारे में तरह- तरह के अनुमान लगाये जा रहे हैं।
वैसे नरेंद्र मोदी चाहें भी तो, हालांकि वे चाहेंगे नहीं, नेशनल हेराल्ड केस में, जिसमें राहुल गांधी और सोनिया गांधी जमानत पर हैं, उन्हें कोई मदद नहीं कर सकते। यह केस डॉ सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा कोर्ट में सन 2012 में याचिका दायर करने से शुरू हुआ था। जांच एजेंसी कोर्ट की इच्छा के खिलाफ काम नहीं कर सकती, जिस तरह चारा घोटाले में तब के प्रधान मंत्री आरोपितों की मदद चाहते हुए भी नहीं कर सके थे। पटना हाई कोर्ट के आदेश पर चारा घोटाले की जांच शुरू हुई थी। कोर्ट जांच की निगरानी कर रही थी।
नये तीन कानूनों के लागू हो जाने के बाद उम्मीद है कि नेशनल हेराल्ड केस की भी त्वरित सुनवाई हो सकती है। इसलिए भी राहुल गांधी डरे हुए लगते हैं। उल्टे आरोप लगा रहे हैं कि मोदी डरा रहे हैं। मोदी नहीं डरा रहे हैं, परिस्थितियां आपको डरा रही हैं। कानून व कोर्ट डरा रहे हैं। जिस तरह पटना के बॉबी हत्याकांड और ललित नारायण मिश्र हत्या कांड में इंदिरा सरकार के निदेश पर सीबीआई ने असली अपराधी को बचा लिया था, उस तरह नेशल हेराल्ड केस में कोई किसी को नहीं बचा सकता।
इन दिनों कांग्रेस और उसके समर्थक बुद्धिजीवियों को अटल बिहारी वाजपेयी की बहुत याद आ रही है। वे टीवी चैनलों पर भी उनका गुणगान कर रहे हैं। क्योंकि अटल जी की सरकार ने दो गंभीर मामलों में गांधी परिवार को साफ बचा लिया था। बोफोर्स मुकदमे में बचाया। राहुल अमेरिका में जब गिरफ्तार हुए थे, तब बचाया। डॉ सुब्रमण्यम स्वामी ने यह रहस्य खोला। डॉ स्वामी के अनुसार प्रधान मंत्री वाजपेयी ने अमेरिका के राष्ट्रपति जार्ज बुश के ऑफिस में संदेश भेज कर राहुल को रिहा करवाया।

अटल जी की शैली थी कि ‘तुम हमें बचाओ, हम तुम्हें बचाएंगे।’ वह कांग्रेस वाली शैली थी। अटलजी, नेहरू के प्रशंसक थे। अटल जी खुद व्यक्तिगत रूप से तो ईमानदार थे। उनके पास निजी संपत्ति के नाम पर सिर्फ उनका एक फ्लैट था। जिसे उन्होंने अपने जीवन काल में ही बेच दिया था। पर, उनके आसपास के कुछ लोग भारी भ्रष्ट थे। अटल जी के साथ कुछ अत्यंत करीबियों को लेकर संडे मैगजिन ने विशेषांक भी निकाला था। लगता है उन सबको उन्हें बचाना था।
इस तरह के लेनदेन में यानी समझौतावादी नीति के कारण ही अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भाजपा को कभी लोक सभा में बहुमत नहीं मिला। दूसरी ओर नरेंद्र मोदी दूसरी मिट्टी के बने लगते हैं। कम सीटें आने के बावजूद वे ताकतवर आरोपितों के सामने भी झुकने को तैयार नहीं हैं। वैसे भी मोदी झुकेंगे तो वे मोदी नहीं रहेंगे। मत भूलिए कि सन 2019 के लोक सभा चुनाव की अपेक्षा 2024 में भाजपा को कुल मिलाकर देश में करीब 60 लाख अधिक वोट मिले हैं।



यह भी कोई साधारण बात नहीं है कि दस साल के शासन के बावजूद मोदी सरकार के खुद मोदी या उनके किसी अन्य मंत्री के खिलाफ प्रतिपक्षी दलों को जनहित याचिका लायक कोई भ्रष्टाचार का मामला नहीं मिला।दूसरी ओर मनमोहन सरकार के भ्रष्टाचारों की लंबी सूची को याद कर लीजिए।
कुल मिलाकर परिणामस्वरूप आने वाले दिन सदन और सड़कों पर पक्ष -विपक्ष में भीषण संग्राम के संकेत हैं। क्योंकि दोनों पक्षों के लिए जीवन-मरण का प्रश्न है। एक तरफ मोदी को अपनी छवि-शैली की रक्षा करनी है तो दूसरी ओर प्रतिपक्ष को अपनी कानूनी समस्याओं से निजात पाना है।
लेखक सुरेन्द्र किशोर जनसत्ता अख़बार में लंबे समय तक कार्यरत रहे। उन्हें हाल में ही पदम् पुरस्कार से भारत सरकार ने सम्मानित किया।
उपरोक्त विश्लेषण पर जयपुर के वरिष्ठ पत्रकार मुकेश शर्मा की टिप्पणी-
लेखक को जरा भी समझ नहीं है। नए कानून लागू होने से पुराने केस में कोई फर्क़ नहीं होगा क्योंकि वो केस पुराने कानून के अनुसार ही चलेंगे।
बोफोर्स केस में अटल जी ने कभी कोई मदद नहीं की थी बल्कि उस केस में कमिशन देना कभी साबित ही नहीं हुआ था और यह केस सुप्रीम कोर्ट से निपटा था।
राहुल गांधी कभी किसी केस में अमेरीका या किसी अन्य देश मे नही पकड़े गए।
10 साल से मोदी सत्ता में है यदि आरोप सही होते तो अब तक पाताल से भी सबूत खोदकर निकाल लाते।
ED राहुल गांधी से 50 घंटे तक पूछताछ कर चुकी है लेकिन उन्हें कुछ नहीं मिला।



Vikas Srivastava
July 4, 2024 at 11:00 am
एकपक्षीय आलेख। राहुल गांधी का सदन में भाषण कहीं से नही लगा कि डरे हुए हैं। यह मत भूलना चाहिए कि सत्ताधारी पार्टी में कई दागी हैं और जिनके मामले लंबित हैं। कानून वहां भी काम करेगा। और राहुल की स्वीकार्यता बढ़ी है यह हम पत्रकारों को भी मान लेना चाहिए।
विनोद सिंह
July 4, 2024 at 2:19 pm
अपने पद्म पुरस्कार का कर्ज उतार रहे हैं। यह एकतरफा है।
Sanjay mittal
July 5, 2024 at 3:48 pm
Bhrashtachari ki sirf ek jagah hai aur wo hai Jail
Aalam Faridi
July 5, 2024 at 3:53 pm
…. आखिर पुरूस्कार मिला हैं। यह सब तो लिखना पड़ेगा। लेखक ने एक पक्षीय समीक्षा की हैं। सबको मालूम हैं मनमोहन सिंह के कार्यकाल में लगे भ्रष्टाचार के आरोपों में कितनी सच्चाई साबित हुई?
Faisal Khan
July 5, 2024 at 4:04 pm
इस पत्तलकार को पदम् पुरुस्कार इसी चमचागिरी और झूठ परोसने के लिए ही तो मिला है सो बेचारा नमक का हक़ अदा कर रहा है, इस दौर में गोदी मीडिया यही सब झूट तो फैला रही है और ऐसे पट्टलकारों के घर की रोटी चल रही है,
गोदी मीडिया का वरिष्ठ पत्तलकार है ये भी
Praksh
July 7, 2024 at 6:40 am
लेखक मोदी सरकार द्वारा उन्हे दिए गए पद्मश्री पुरष्कार के भार से अब मुक्त हो गए. यह लगता है. उन्हें यह पता नहीं है कि पुराने केस पर नए कानून का ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ेगा. दूसरा डॉक्टर स्वामी खुद इस केस में अब उतने सक्रिय नहीं हैं.जैसा वह पहले रहते थे. लेखक मोदी के ज्यादा भक्त दिख रहे हैं. मेरा निजी तौर पर यह मानना है जो भी अपराधी है. उसे जल्द सजा मिलनी चाहिए. वह राहुल हो या मोदी.