
भारत में Google Maps का इस्तेमाल काफी संख्या में लोग करते हैं. इसके जरिए लोग आसानी से किसी भी स्थान पर पहुंच जाते हैं. इस बीच गूगल ने बारत में डेवलपर्स के लिए गूगल मैप्स प्लेटफॉर्म की कीमत में एक अगस्त से 70 प्रतिशत तक की कटौती कर दी है, क्योंकि कंपनी ने नया एक नया कंट्री-स्पेसिफक प्राइसिंग स्ट्रक्चर पेश किया है.
इकोनॉमिक्स टाइम्स की खबर के अनुसार, गूगल ने ये भी कहा है कि कंपनी गूगल मैप्स की सदस्यता के चार्ज वसूलना शुरू करेगी. अभी तक गूगल मैप्स सिर्फ अमेरिकी डॉलर में पेमेंट ले रही थी.
गूगल ई-कॉमर्स डेवलप करने के लिए उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) की सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स (ओएनडीसी) के साथ काम करने वाले डेवलपर्स को 90 प्रतिशत की छूट देगा.
ओला की पेशकश के बाद उठाया कदम
गूगल मैप्स द्वारा इसकी कीमत में भारी कटौती भाविश अग्रवाल की भारतीय स्टार्टअप्स से ओला मैप्स जैसे स्थानीय विकल्पों का उपयोग करने की अपील के बाद की गई है. कंपनी सभी डेवलपर्स को ओला मैप्स की एक साल तक के लिए फ्री एक्सेस दी है.
मैप माइ इंडिया गूगल मैप्स का एक और स्थानीय विकल्प है. गूगल मैप्स का यह कदम उल्लेखनीय है क्योंकि कंपनी ने भारत में अपनी कीमतों में कभी कमी नहीं की है और एक्सपर्ट इसे भारत में अपनी बाजार हिस्सेदारी और नेतृत्व की स्थिति को बचाने का एक प्रयास मानते हैं.
जूलाई की शुरूआत में ओला के फाउंडर भाविश अग्रवाल ने कहा था कि ओला कैब्स ने गूगल मैप्स को पूरी तरह से छोड़ दिया है और अपने इन-हाउस ओला मैप्स पर आ गी है. अग्रवाल के मुताबिक इस कदम से ओला को हर साल 100 करोड़ रुपये की बचत होने की उम्मीद है. अग्रवाल ने गूगल मैप्स की नई नीति के बारे में कहा कि, “प्रिय गूगल, बहुत देर हो चुकी है.. एग्जिट गूगल मैप्स के बाद Google Maps के लिए कीमतें कम करना, रुपये में कीमत देने की पेशकश करना.. आपकी झूठी उदारता नहीं चाहिए.”
ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है जब अग्रवाल किसी वैश्विक दिग्गज कंपनी के साथ विवाद में फंसे हैं. मई में अग्रवाल ने राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म का कार्यभार माइक्रोसॉफ्ट के क्लाउड प्लेटफॉर्म एज़्योर से हटाकर अपने क्रुट्रिम पर स्थानांतरित कर दिया था.


