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नीट की परीक्षा रद्द नहीं करके सरकार अपनी बदनामी खुद क्यों करवा रही है? पढ़िये टेलीग्राफ की खबर, सुलह की बैठक रद्द!

संजय कुमार सिंह

आज की सबसे दिलचस्प खबर नीट के नतीजे सार्वजनिक किये जाने के बाद मिली जानकारी है। द टेलीग्राफ को छोड़कर सभी अखबारों में यह पहले पन्ने पर लीड या सेकेंड लीड है। आज उसी की जानकारी बताता हूं। यह इसलिए महत्वपूर्ण है कि सरकार शुरू से कहती रही है कि प्रश्नपत्र लीक नहीं हुए, बिहार पुलिस ने कहा कि एनटीए जांच में सहयोग नहीं कर रहा है तो जांच सीबीआई को दे गई, जांच के दौरान कई गिरफ्तारियां हुईं, प्रश्न पत्र लीक करने वालों को भी गिरफ्तार करने का दावा किया गया और एक स्कूल के मुसलमान प्रिंसिपल, सहायक और पत्रकार को गिरफ्तार किया गया तो उन्हें मास्टर माइंड प्रचारित किया गया। फिर भी सरकार परीक्षा रद्द करने को तैयार नहीं हुई। बचाव में सहयोग और उपाय करती रही है।

मेरा मानना है कि अगर व्यवस्था गत रूप से प्रश्नपत्र लीक कराये जाते होंगे तो परीक्षा रद्द नहीं होगी और पूरी कोशिश की जायेगी ताकि लीक कराने (और उससे कमाई या अपने लोगों के लाभ) की सेवा चलती रहे। अगर परीक्षा रद्द कर दी गई तो अगली बार कोई जोखिम नहीं लेगा और इनमें प्रश्नपत्र खरीदने वाले शामिल होंगे और जब खरीदार नहीं होंगे तो लीक कराना मुश्किल होगा और खतरे से खाली भी नहीं होगा। इसलिए व्यवस्था हमेशा चाहेगी कि परीक्षा रद्द न हो। लेकिन ना खाऊंगा ना खाने दूंगा पर इलेक्टोरल बांड से चंदा लो, धंधा दो की व्यवस्था चलेगी तो क्या होगा समझना मुश्किल है। या आप समझ सकते हैं। आप जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में परीक्षा रद्द करने के लिए मुकदमा है तो रद्द नहीं करने के लिए भी मुकदमा है और सरकार का स्टैंड बहुत साफ है।

ऐसा नहीं है कि सरकार निष्पक्ष है और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर कार्रवाई करने के लिए तैयार है। यह सार्वजनिक है कि सरकार नहीं चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट परीक्षा रद्द करने का आदेश करे और परीक्षा फिर से करानी पड़े। इसके लिए उसके तमाम उपाय सार्वजनिक हैं और इसमें आईआईटी मद्रास से परीक्षा परिणाम की समीक्षा कराना शामिल है। खबरों के अनुसार इसमें कुछ गलत नहीं मिला था। आईआईटी मद्रास की इस रिपोर्ट के अनुसार, पटना में  नीट-यूजी अभ्यर्थियों की रैंकिंग में नकारात्मक रुझान दिख रहा था। आज की खबरों के अनुसार सीकर समेत कई शहरों के नतीजे रेखांकित करने लायक हैं। इनमें पटना भी है।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार पटना में 744 छात्रों को 650 से ज्यादा अंक मिले हैं। सीकर में यह संख्या सबसे ज्यादा 2037 है। ऐसे 1326 छात्रों के साथ नई दिल्ली तीसरे स्थान पर है। ऐसे 1066 छात्रों के साथ कोटा, नई दिल्ली के बाद चौथे स्थान पर है। इसके बाद पटना का नंबर है जहां इसकी जांच आर्थिक अपराध के रूप में हो रही थी और गिरफ्तारियों के साथ चेक आदि भी बरामद हुए हैं। यह सब किसी विशेष एजेंसी की जांच से नहीं, नतीजे सार्वजनिक करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मालूम हुआ है। मामला इलेक्टोरल बांड जैसा है जिसकी गोपनीयता बनाये रखने के लिए कितनी ही दलीलें दी गई थीं और जब मामला खुला तो चंदा दो, धंधा लो का मामला साफ दिखा और सरकार की परेशानी का कारण साफ हो गया। लेकिन वह अलग मुद्दा है। आइये पहले नीट की खबरों से संबंधित शीर्षक देख लें

1. हिन्दुस्तान टाइम्स

हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर लीड है। शीर्षक है, नीट के आंकड़े सार्वजनिक हैं, कुछ केंद्रों ने बेहतर प्रदर्शन किया है।  

2. इंडियन एक्सप्रेस

खबर लीड है। फ्लैग शीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट में मामले पर सोमवार को सुनवाई होगी। शहरवार नीट के नतीजे दिखाते हैं कि 3.5 प्रतिशत छात्रों को कुल 720 में 600 अंक मिले। 109 केंद्रों में ज्यादा अंक पाने वाले छात्रों का हिस्सा राष्ट्रीय औसत के मुकाबले तीन गुना ज्यादा है। पैनल ने परीक्षा में जिन खामियों का उल्लेख किया है वे हैं, परीक्षा केंद्र में काम करने वाले इनविजिलेटर्स की खराब जांच और इंटरनेट का असुरक्षित लिंक।  

3. टाइम्स ऑफ इंडिया

नीट नतीजों से पता चलता है कि टॉप स्कोर पाने वाले कोचिंग फैक्ट्रियों में एक साथ रखे गये थे, कोटा का प्रतिद्वंद्वी सीकर है। इस खबर का इंट्रो है, सीकर में 2000 से ज्यादा (2037) को 650 से ज्यादा अंक मिले; कोट्टयम क्या दक्षिण भारत का कोटा है। एक खबर का शीर्षक है, 12 वीं फेल गुजरात की लड़की को नीट में 705 अंक (720 में) मिले। अखबार ने यह भी बताया है कि राजकोट के एक केंद्र में एक उम्मीदवार को 720 अंक मिले हैं, 11 को 700 और ऊपर तथा 250 को 600 और ज्यादा अंक मिले।

4. द हिन्दू

सर्वोच्च अंक पाने वाले नीट के केंद्र राजस्थान के सीकर में एक साथ हैं। यहां भिन्न केंद्रों से कुल 27216 छात्रों ने परीक्षा दी। इनमें से 2037 को 650 अंक मिले।

5. अमर उजाला

नीट : केंद्रवार नतीजे जारी, राजकोट के 12 अभ्यर्थियों को 700 से अधिक अंक। उपशीर्षक है, इस केंद्र के 85 फीसदी अभ्यर्थी सफल, एक छात्र को 720 में 720 अंक। हरियाणा के एक केंद्र के छह छात्रों को मिले थे पूर्णांक, अब 682 से अधिक नहीं। आप जानते हैं कि नीट के नतीजे समय से पहले, आम चुनाव के नतीजे वाले दिन घोषित कर दिये गये थे और इसमें पूर्णांक पाने वाले छात्रों की संख्या भी बहुत ज्यादा थी। इस कारण कुछ छात्रों को मिला कृपांक बताया गया। फिर कृपांक पाने वालों के लिए परीक्षा का आयोजन किया गया। कुछ ने कृपांक छोड़ दिये, कुछ ने पुनर्परीक्षा के लिए आवेदन दिया और परीक्षा भी दी। कुछ ने आवेदन दिया पर परीक्षा नहीं दी और इस तरह चुने गये उम्मीदवारों की एक नई सूची बनी होगी। आज पता चल रहा है कि अहमदाबाद केंद्र के चार अभ्यर्थियों को कुल 720 अंकों में 710 मिले हैं।

6. नवोदय टाइम्स

पूर्व में छह टॉपर देने वाले परीक्षा केंद्र में मान्य अधिकत्तम अंक 682 है। इसके साथ एक और खबर का शीर्षक है, प्रश्नपत्र लीक में एनआईटी स्नातक, एमबीबीएस के दो छात्र गिरफ्तार। और भी जानकारियां हैं जो पूर्व में दी जा चुकी हैं।

स्पष्ट है कि सरकार ने नीट मामले में अगर अपनी छीछालेदर करवा ली है तो यूपीएससी मामले में भी फंस गई है। अंजलि बिड़ला के बाद पूजा खेदकर का मामला आया और सरकार उसकी घोषणा करती उससे पहले यूपीएससी के चेयरमैन का इस्तीफा आ गया। इसे गुप्त रखने  कोशिश की गई पर कल द हिन्दू में खबर छप गई। भले उसमें यह भी लिखवाया गया कि इस्तीफे का संबंध पूजा खेदकर के मामले से नहीं है पर आज छपी खबरों के अनुसार इसे स्वीकार नहीं किया गया। आप जानते हैं कि चुनाव से पहले जब तीन की जगह दो ही चुनाव आयुक्त थे तब उनमें से एक का इस्तीफा कितनी जल्दी स्वीकृत हुआ था। यूपीएससी के चेयरपर्सन के इस्तीफे की खबर आज कई अखबारों में है। सबमें इस बात पर जोर दिया गया है कि इसका कारण ‘निजी’ बताया गया है और पूजा खेदकर विवाद नहीं है – यह कहानी गढ़ने की कोशिश की गई है। कांग्रेस ने इस इस्तीफे के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की है। यह खबर हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने पर सिंगल कॉलम में है।  

आज की अन्य महत्वपूर्ण खबरें इस प्रकार हैं –

सुलह की बैठक रद्द

द टेलीग्राफ में आज लखनऊ डेटलाइन से पीयूष श्रीवास्तव की खबर का शीर्षक है, भाजपा ने राज खोल दी तो आरएसएस ने बैठक रद्द कर दी। खबर इस प्रकार है, आरएसएस सार्वजनिक रूप से झगड़ने वाले उत्तर प्रदेश के भाजपा नेताओं के बीच सुलह कराने की भूमिका निभाने वाले के रूप में देखे जाने के लिए तैयार नहीं है। इस कारण, आरएसएस ने पार्टी के साथ शनिवार को होने वाली समन्वय बैठक रद्द कर दी है। वैसे तो आरएसएस या भाजपा ने बैठक की आधिकारिक घोषणा कभी की ही नहीं थी, लेकिन सूत्रों ने दावा किया था कि एक बैठक होगी, जिसकी अध्यक्षता संघ के संयुक्त महासचिव अरुण कुमार करेंगे।

सूत्रों के अनुसार इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, संगठन महासचिव धर्मपाल सिंह और राज्य भाजपा प्रमुख भूपेन्द्र चौधरी को उपस्थित रहने के लिए कहा गया था। शनिवार सुबह भाजपा के एक नेता ने दावा किया कि कुमार की भुवनेश्वर से लखनऊ की उड़ान रद्द होने के बाद बैठक स्थगित कर दी गई है। हालांकि, एक अन्य नेता ने कहा, “आरएसएस चाहता था कि यह बैठक गुप्त रहे लेकिन भाजपा नेताओं ने जानकारी खोल दी। मौर्य ने इस बार लोकसभा चुनाव में राज्य की 80 लोकसभा सीटों में से केवल 33 सीटें जीतने के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं के प्रति आदित्यनाथ सरकार की “उदासीनता” को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया था। 2019 में पार्टी ने 62 सीटें जीती थीं। उन्होंने कहा था कि आदित्यनाथ के तहत सरकारी अधिकारी बहुत शक्तिशाली हो गए हैं। और सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ताओं की अनदेखी शुरू कर दी थी।

किन्नर कल्याण बोर्ड की उपाध्यक्ष और राज्य मंत्री दर्जा प्राप्त सोनम चिश्ती ने राज्य सरकार पर लोगों के प्रति असंवेदनशीलता का आरोप लगाते हुए शुक्रवार रात इस्तीफा दे दिया। चिश्ती ने शनिवार को संवाददाताओं से कहा, “मैं लोगों की मदद करने के लिए राजनीति में हूं लेकिन मैं खुद को असहाय पाता हूं। लोग इलाज और अन्य मदद के लिए मेरे पास आते हैं और मैं उन्हें अधिकारियों के पास भेजता हूं। लेकिन अधिकारी उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं और उन्हें जेल में डालने की धमकी देते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “मैंने मुख्यमंत्री से कई शिकायतें की हैं, लेकिन उन्होंने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया। मैं सरकार में किसी काम का नहीं हूं और मुझे बिना किसी (वास्तविक) शक्ति के (अपने पद पर) बने नहीं रहना चाहिए।” बीजेपी में कई लोग मानते हैं कि चिश्ती मौर्य के करीबी हैं। आदित्यनाथ ने इस सप्ताह की शुरुआत में भाजपा की एक बैठक में कहा था कि हालांकि पार्टी के सदस्यों को पार्टी के लिए काम करना चाहिए था, लेकिन वे “सुप्रभात” संदेश भेजने में व्यस्त थे। वह यह कहते दिखे कि भाजपा कार्यकर्ता पार्टी की छवि बनाने के बजाय अपने निजी काम करने में अधिक रुचि रखते हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि वह सरकारी अधिकारियों पर भरोसा करना जारी रखेंगे।

कांवड़ यात्रा की तैयारी

आज के अखबारों में कावड़ यात्रा की तैयारी की खबर भी है। इसके लिए सड़क बंद कर दी गई है। मांस की बिक्री पर रोक है और आप जानते हैं कि कांवड़ यात्रा मार्ग पर खाने की चीजें बेचने वाले को ठेले पर अपना नाम लिखकर टांगना है। अमर उजाला ने टॉप पर सिंगल कॉलम की खबर छापी है, मेरठ दिल्ली एक्सप्रेसवे पर कल से सभी वाहन प्रतिबंधित। आप जानते हैं कि सड़क पर और पार्क में भी थोड़ी देर नमाज पढ़ने से कितनी परेशानी होती रही है। ऐसे में एक्सप्रेस वे पर सभी वाहनों को प्रतिबंधित करना कितना पक्षपातपूर्ण निर्णय है, आप समझ सकते हैं। नवोदय टाइम्स में पहले पन्ने पर खबर है, कावंड यात्रा कल से, मीट की दुकानें रहेंगी बंद। कहने की जरूरत नहीं है कि कावड़ यात्रा के दौरान बहुत सारे हिन्दू भी मांस-मछली मुर्गे का सेवन करते हैं और ऐसे में दुकानें बंद करने का नुकसान उन हिन्दुओं को भी होगा लेकिन भाजपा इन बातों से कहां परेशान होती है। 

माल गाड़ी बेपटरी

अमर उजाला में पहले पन्ने पर खबर है। अमरोहा में मालगाड़ी के 12 वैगन बेपटरी हई, महत्वपूर्ण खबर है। इस दुर्घटना में रेल ट्रैक भी क्षतिग्रस्त हुआ है और कई ट्रेनें प्रभावित हैं।

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