
ध्यान रहे, खबर वही नहीं है जो आपका अखबार (या चैनल) आपको बताता है
संजय कुमार सिंह
आज की प्रमुख खबर पेरिस ओलंपिक्स की शुरुआत है। लेकिन उसकी खबर मेरे लिये चर्चा का मुद्दा नहीं है। आज की अन्य प्रमुख खबरों में नीति आयोग की बैठक और उसका बायकाट भी है। नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, विरोध की आवाज ममता करेंगी बुलंद। ममता बनर्जी ने कहा है कि नीति आयोग को खत्म कर योजना आयोग को बहाल करना चाहिये। ऐसे में द टेलीग्राफ ने बताया है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि वे बैठक में जायेंगी पर यह बेकार (अनुपयोगी) है। द हिन्दू के अनुसार ममता बनर्जी ने कहा है कि नीति आयोग ने कोई उद्देश्य पूरा नहीं किया है इसलिए इसे खत्म किया जाये। आज अमर उजाला में दूसरे पहले पन्ने पर नीट यूजी की खबर टॉप पर है। इसके अनुसार, अंतिम मेरिट लिस्ट में चार लाख अभ्यर्थियों की रैंक बदल गई है। 61 की जगह अब सिर्फ 17 टॉपर रहे। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर सेकेंड लीड है। शीर्षक में बताया गया है कि अब रह गये 17 टॉपर्स में 13 लड़के और चार लड़कियां हैं। अखबार ने बताया है कि इस तरह छात्रों की सात हफ्तों से चली आ रही परेशानी खत्म हुई (और केंद्र सरकार व एनटीए परीक्षा रद्द करके दोबारा नहीं कराने की अपनी कोशिशों में कामयाब रहा)। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर का शीर्षक है, नीट के 17 टॉपर्स में से दो दिल्ली के हैं चार राजस्थान के। नवोदय टाइम्स की लीड भी एक महत्वपूर्ण खबर है, सुप्रीम कोर्ट ने विधेयकों को लेकर बंगाल, केरल के राज्यपालों के सचिवों से जवाब मांगा है।
यह तो हुई खबरों की बात। पर सावन का महीना चल रहा है और हिन्दी पट्टी में इस दौरान लोग कांवर यात्रा करते हैं तथा भगवान शिव पर जल चढ़ाते हैं। इसी तैयारियों के क्रम में उत्तर प्रदेश और फिर उत्तराखंड में भी यात्रा मार्ग के खाने-पीने की चीजों के विक्रेताओं, दुकानदारों, ढाबा मालिकों और रेस्त्रां वालों से कहा गया था कि वे अपना नाम लिखकर टांगें। इसका विरोध भी हुआ। हालांकि वे नहीं कर पाये जो प्रभावित थे पर अब वह मुद्दा भी नहीं है। मामला सुप्रीम कोर्ट में आया था तो इसे स्टे कर दिया गया था। आज टाइम्स ऑफ इंडिया और द हिन्दू में दो लगभग परस्पर विरोधी खबरें सेकेंड लीड हैं। हालांकि, दोनों का एक दूसरे से संबंध नहीं होते हुए भी इनके सबंद्ध होने से इनकार नहीं किया जा सकता है। द हिन्दू की खबर का शीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पर स्टे का विस्तार किया। दूसरी खबर टाइम्स ऑफ इंडिया की है। उसका शीर्षक है, हरिद्वार में कांवर मार्ग की मस्जिदों और मजारों को ढंक दिया गया है। मंत्री का जवाब इंट्रो है, उकसावे से बचने के लिए कदम उठाया गया है। नवोदय टाइम्स ने सुप्रीम कोर्ट की खबर के साथ बताया है कि विवाद के बाद मस्जिद और मजारों के आगे से पर्दे हटा दिये गये हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है, “सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बावजूद, उत्तर प्रदेश में कांवर मार्ग के दुकानदारों ने सुरक्षित रहने के लिए काम किया : ‘झगड़ा क्यों करें’?”
ऐसी सरकार और व्यवस्था में आज की खबरों में प्रधानमंत्री द्वारा अग्निपथ योजना का बचाव किया जाना है मुझे सबसे दिलचस्प लगा। अपनी जानकारी के लिए मैं प्रधानमंत्री के तर्क जानना चाहता था और खबरों में ढूंढ़ता रहा पर कुछ नहीं मिला। संयोग से मैं कल प्रधानमंत्री का भाषण भी सुन चुका था और तभी सिर पीट रहा था कि देश के प्रधानमंत्री के पास अपनी ही योजना के पक्ष में कोई ठोस, दमदार तर्क नहीं है और इसे स्वीकार करने की बजाय वे फूहड़ राजनीति कर रहे हैं। वे इसका बचाव करने की बजाय उसपर चुप रहते तो बेहतर था। एक अलोकप्रिय योजना की प्रशंसा करके वे उसे लोकप्रिय बना भी दें, चुनाव जीत भी जायें तो प्रधानमंत्री के रूप में उनका काम नहीं है। भाजपा और संघ परिवार को चाहिये कि देश के लिए एक योग्य प्रधानमंत्री की व्यवस्था करे और नरेन्द्र मोदी का उपयोग चुनाव जीतने के लिए करता रहे। यह न सिर्फ भाजपा बल्कि देश और लोकतंत्र के लिये भी अच्छा होगा।
मुझे लगता है कि जब तक मीडिया ने नरेन्द्र मोदी का प्रचार किया, उन्हें महान बताया तब की बात अलग थी। अब कई मामलों में उनकी अयोग्यता और अक्षमता न सिर्फ दिख रही है बल्कि उनकी घटिया राजनीति का बचाव करना भी मुश्किल साबित हो रहा है। उदाहरण आज की खबरें और अग्निपथ योजना का बचाव है। जैसा मैंने बताया, 25वें कारगिल विजय दिवस पर उनके भाषण का वीडियो मैं देख चुका था। उसके बाद आज हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड का शीर्षक है, “कार्गिल@ 25 : मोदी ने बहादुरों की प्रशंसा की, अग्निपथ योजना का दृढ़ता से समर्थन किया”। कहने की जरूरत नहीं है कि इस योजना की जितनी आलोचना हो रही है उसके मद्देनजर इसका दृढ़ता से समर्थन करने के लिए तर्क और कारण चाहिये। इसके बिना समर्थन वैसे ही है जैसे किसान आंदोलन पर ध्यान नहीं दिया गया, एक दिन अपना ही बनाया कानून वापस ले लिया गया। इस बीच किसानों से बात करना तो दूर उन्हें दिल्ली में घुसने नहीं दिया गया। तमाम अलोकतांत्रिक, हिंसक और मनमानी कार्रवाई की गई। 700 के करीब किसानों की मौत हुई।
आखिरकार, तब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा 29 नवंबर 2021 को लोकसभा में कृषि कानून निरसन विधेयक, 2021 पेश किया गया जो सितंबर 2020 में संसद द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों को निरस्त करता है। तब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि हमारी ही तपस्या में शायद कोई कमी रह गई होगी और यह भी कि मैं किसानों से क्षमा माँगता हूं कि मैं किसानों को इतनी पवित्र बात नहीं समझा पाया। कृषि मंत्री के करोड़ों के निवेश से संबंधित वीडियो और आरोपों की याद आपको होगी ही। उनकी जगह अब मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री को कृषि मंत्री बनाया गया है। अग्निपथ या अग्निवीरों के मामले में जो स्थिति है आप जानते ही हैं। मेरी चिन्ता यह है कि एक ही व्यक्ति को ऐसी कितनी गलतियां करने का मौका दिया जायेगा। खासकर तब जब लोकसभा अध्यक्ष चाहते हैं कि 2016 की नोटबंदी पर अब बात न हो। और सत्तारूढ़ दल 1975 की इमरजेंसी ही नहीं 1947 के बंटवारे और उससे पहले के बाबर-हुमायूं की भी बात करता रहे। जाहिर है, यह सब ध्यान भटकाने की कोशिश है और लगातार जारी है।
ऐसे में आज यह महत्वपूर्ण है कि मेरे सात अखबारों में द हिन्दू ने इसे पहले पन्ने पर जगह नहीं दी है। द टेलीग्राफ ने एक कॉलम में निपटा दिया है। और हिन्दुस्तान टाइम्स का शीर्षक भले खबर पढ़ने के लिए आकर्षत करता है पर चूंकि उसमें कुछ है नहीं इसलिए इसका प्रभाव नहीं होगा और इंडियन एक्सप्रेस ने अग्निपथ के समर्थन में जिस कारण को शीर्षक बनाया है वह किसी के गले नहीं उतरेगा। ना ही उसपर यकीन करके कोई पुलवामा जैसे किसी हमले में शहीद होने की नौकरी करने जायेगा और ना ही शहीद होने पर बीमा के जरिये मिलने वाले मुआवजे से संतुष्ट हो जायेगा या मान लेगा कि योजना इससे अच्छी नहीं हो सकती थी। इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक वही है जो प्रधानमंत्री अपनी राजनीति चमकाने या बचाने के लिए कर रहे हैं, गलतफहमी फैलाई जा रही है, अग्निपथ का मकसद सेना को युवा, तैयार रखना है।
हिन्दुस्तान टाइम्स ने अपनी मुख्य खबर के साथ तीन कॉलम का एक शीर्षक लगाया है, पांच राज्यों में अग्निवीरों के लिए रोजगार के फायदे। इसके अनुसार भाजपा शासन वाले मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीशा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड ने शुक्रवार को अग्निवीरों के लिए पुलिस और कुछ अन्य विभागों में आरक्षण का एलान किया। खबर के अनुसार यह योजना को लेकर चल रही नाराजगी को कम करने तथा नियमित सेवा में नहीं रखे जाने पर एक सुरक्षा जाल मुहैया कराने के लिए है। मुख्य खबर में बताया गया है कि प्रधानमंत्री ने कहा कि अग्निपथ योजना का लक्ष्य सेना को युवा और युद्ध के लिए तैयार रखना है। इंडियन एक्सप्रेस का शीर्षक यही है। हिन्दुस्तान टाइम्स में मुख्य खबर के साथ सिंगल कॉलम की एक खबर का शीर्षक है, “पाकिस्तान ने अपनी पिछली गलतियों से नहीं सीखा है : प्रधानमंत्री”। आपको याद होगा कि 2014 में नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले कारगिल हुआ था और कल उसका विजय दिवस मनाते हुए प्रधानमंत्री ने यह बात कही।
मुझे नहीं पता है कि पहले की गलतियों से भारत या प्रधानमंत्री ने क्या सीखा है लेकिन ध्यान आता है कि 2014 में शपथग्रहण के लिए नवाज शरीफ को भी बुलाया गया था और प्रधानमंत्री बिना बुलाये उनके पारिवारिक समारोह में गये थे, ऐसी खबरें छपी थीं। इसके बावजूद 2019 के चुनाव में घुसकर मारने जैसी चेतावनी देने की नौबत आ गई थी। अब प्रधानमंत्री खुद कह रहे हैं कि सेना को युद्ध के लिए तैयार और युवा बनाया जा रहा है तथा इस सबमें जो चीज सबसे महत्वपूर्ण है वह है 2019 का पुलवामा – उसपर कोई श्वेत पत्र, जांच आदि कुछ नहीं है। 10 साल सत्ता में रहने के बाद कल विपक्ष पर यह आरोप लगाया, “दुखद है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित एक संवेदनशील मुद्दे का उन लोगों ने राजनीतिकरण कर दिया है जो हजारों करोड़ रुपये के घोटालों में शामिल थे। ये वही लोग हैं जो नहीं चाहते थे कि वायु सेना को लड़ाकू विमान मिलें और तेजस को डिब्बे में बंद करने की योजना बनाई थी”। (हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर से)। अखबार ने लिखा है, उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब सशस्त्र सेना यह सुझाव देने वाली है कि अग्निपथ में शामिल किये जाने वालों की आयु बढ़ाकर 23 कर दी जाये और कम से कम 50 प्रतिशत को चार साल बाद भी रखा जाये ताकि आक्रामकता का प्रभाव बढ़े। अखबार ने ऐसी रिपोर्ट पहले प्रकाशित की है।
यही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष यह छवि बनाने की कोशिश कर रहा है कि यह योजना (अग्निपथ) पेशन का खर्च कम करने के लिए लाई गई है। उन्होंने सफाई दी कि आज नियुक्त सैनिक को 30 साल बाद पेंशन मिलेगी इसलिए बिना पेंशन वाली उनकी इस योजना का मकसद पेंशन बचाना नहीं है क्योंकि तब वे 105 साल के होंगे और मोदी की सरकार नहीं होगी। इस ज्ञान को आप चाहे जैसे देखिये मुझे लगता है कि अग्निपथ योजना में पेंशन है ही नहीं और यह चार साल के लिए है तो पेंशन अगर मिलती तो चार साल बाद भी मिल सकती थी और जब कोई नौकरी करने के योग्य होते हुए भी बेरोजगार हो जा रहा है तो उसे पेंशन मिलनी ही चाहिये। नहीं मिलने या लेने की व्यवस्था उस स्थिति में हो सकती है जब उसे नौकरी मिल जाये। हालांकि इसके लिए आरक्षण जैसी सुविधा की घोषणा भी कल की गई वह भी भाजपा शासित राज्य सरकारों ने की है, केंद्र सरकार न नहीं। यही नहीं, नरेन्द्र मोदी की सरकार ने कोरोना पीड़ितों को मुआवजा नहीं दिया। रेल दुर्घटना में मरने वालों को मुआवजा देने की घोषणा पहले की तरह नहीं होती है, बीमा लेने वाले किन और कितने यात्रियों को मुआवजा मिला इसकी घोषणा नहीं की जाती है और तो और, जन धन खाता धारकों के बहुप्रचारित बीमा का लाभ कोविड से मौत के बाद कितने लोगों को मिला इसकी जानकारी तो छोड़िये प्रचार भी नहीं है जबकि जनधन खातों का इससे अच्छा प्रचार होता और नरेन्द्र मोदी की योजना थी इसलिए इसका प्रचार किया जाना चाहिये था। पर वह नहीं किया गया और यह स्वीकार नहीं किया जाता है कि 2014 से पहले यह भ्रम फैलाया गया था कि विदेश में रखा काला धन वापस आयेगा तो सबको 15 लाख मिलेंगे और लोगों ने यही समझ कर खाते खोले थे जो नोटबंदी की योजना से भी तालमेल में नहीं था। कहने की जरूरत नहीं है कि उतनी बड़ी योजना बिना पर्याप्त सोच के लागू कर दी गई औऱ रोज गोल पोस्ट बदलना बड़ा। नुकसान पूरे हुए, फायदा कुछ नहीं। पर वह अलग मुद्दा है।
टाइम्स ऑफ इंडिया में भी आज यह खबर लीड है। पर शीर्षक हिन्दुस्तान टाइम्स जैसा खबर पढ़वाने वाला नहीं है लेकिन कम भी नहीं है, “प्रधानमंत्री ने अग्निपथ का बचाव किया : सेना को आक्रमण के लिए तैयार रखेगा”। इस खबर का इंट्रो है, “मोदी ने कारगिल में कहा, विपक्ष राजनीति कर रहा है”। इसके साथ कांग्रेस की प्रतिक्रिया या खरगे का आरोप भी है। शीर्षक है, “इसे सेना की योजना कहना झूठ है :खरगे”। प्रधानमंत्री ने कल जो कहा और किया उसे हिन्दुस्तान टाइम्स ने पढ़ने वालों के लिए लिखा है तो टाइम्स ऑफ इंडिया ने शीर्षक देखने वालों के लिए। शीर्षक पहले बता चुका हूं और कह सकता हूं कि प्रधानमंत्री के झूठ को झूठ कहना और उसे साथ में छप जाना बहुत आम नहीं था। आज है तो साधारण नहीं है। रेखांकित करने लायक तो जरूर है।
टाइम्स ऑफ इंडिया ने प्रधानमंत्री की फोटो के साथ उनका यह कोट छापा है, “आज मैं एक ऐसी जगह से बोल रहा हूं जहां से आतंकवाद के संरक्षक मुझे सुन सकते हैं …. उनके नापाक इरादे कभी कामयाब नहीं होंगे। हमारे बहादुर सैनिक आतंकवाद को पूरी ताकत से कुचल देंगे”। मुझे लगता है कि प्रधानमंत्री की यह बहादुरी उन्हीं सैनिकों के दम पर है जिन्हें कमजोर करने का आरोप उनपर है। तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद शपथग्रहण के दिन से ही जिस तरह से आतंकवादी वारदातें होती रही हैं और उसका जो कारण अखबारों में बताया गया उसपर ध्यान तब गया जब कुछ सार्वजनिक था। भले उसके बाद सैनिकों की संख्या बढ़ाई गई और आवश्यक उपाय किये गये हों पर अब तक जो सब हुआ है उसके बाद यह कहने का कोई मतलब नहीं है कि आतंकवाद को बहादुर सैनिक कुचल देंगे। कुचलते ही रहे हैं। पर शहीद होकर और सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया है जिससे स्थिति सुधरे। अनुच्छेद 370 हटाना और उसके बाद की स्थितियां शामिल है। राज्य में चुनाव नहीं हुए, भाजपा लड़ने की स्थिति में भी नहीं है आदि आदि। पर यह सब अलग मुद्दा है।
अग्निपथ योजना का प्रधानमंत्री द्वारा बचाव और कांग्रेस पर उनके आरोप के जवाब में मल्लिकार्जुन खरगे ने जो ट्वीट किया है उसे मिलाकर द टेलीग्राफ का शीर्षक है, प्रधानमंत्री, कांग्रेस ने अग्निपथ पर आग उगला। प्रधानमंत्री ने जो कहा उसका बड़ा हिस्सा आप पढ़ चुके हैं। खरगे ने जो कहा वह इस प्रकार है, अग्निवीर को कोई पेंशन नहीं मिलती, कोई ग्रैच्यूटी नहीं मिलती, परिवार को पेंशन नहीं मिलती और बच्चों की पढ़ाई के लिए कोई शिक्षा भत्ता नहीं मिलता। उन्होंने कहा, ‘‘अब तक 15 अग्निवीर शहीद हो चुके हैं। प्रधानमंत्री जी को कम से कम उनकी शहादत का तो मान रखना चाहिए। हिन्दी द प्रिंट इन में प्रकाशित भाषा की खबर के अनुसार, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘अग्निपथ’ योजना को लेकर सरासर झूठ बोला है और वह इस विषय पर देश में भ्रम फैला रहे हैं। … कांग्रेस इस मांग पर कायम है कि इसे तत्काल निरस्त किया जाना चाहिए।


