निराला बिदेसिया-
अलविदा Ravi Prakash रवि भाई। यह तस्वीर देखने की हिमात नहीं। दिखाने की भी नहीं। दिखानेवाली है भी नहीं तस्वीर। पर, जानबूझकर साझा कर रहा।

आप हर मोमेंट की तस्वीर साझा करते थे। आप अपने दोस्तों को हर दिन की स्थिति से वाकिफ कराते थे। हर तरह की तस्वीरों से आपको प्रेम था। सुख, दुख सबको समभाव से साझा करते थे। आपके चाहने वाले, आपको अंतर्मन से प्यार करनेवाले हजारों में हैं। वे अपने जांबाज, साहसी, निडर नायक, साथी को आखिरी बार देख सके। आखिरी जोहार कह ले।
राजेश ठाकुर-
Ravi Prakash सर नहीं रहे। आखिर कैंसर ने उन्हें भी अपने आगोश में ले लिया। पिछले सप्ताह ही उन्हें अमेरिका में पुरस्कार मिला था। तीन दिन पहले ही उन्होंने अपने जीवन के अंतिम पोस्ट में लिखा था- ‘अमेरिका प्रवास खत्म, अस्पताल प्रवास शुरू। एक जिंदगी, अनेक रंग। शुक्रिया मेरे डॉक्टर्स। दोनों ही रंगों की अपनी-अपनी भूमिका है। मैं दोनों के मजे ले रहा हूँ…’।

तब उन्हें भी नहीं पता था कि यह उनके जीवन का अंतिम पोस्ट है… कुछ दिन पहले उन्होंने यह भी लिखा था कि चलते-फिरते चला जाऊं, यही भगवान से इच्छा है। अमेरिका यात्रा तक जिंदा रहूँ… ईश्वर ने उनकी सुन ली, लेकिन हमलोगों की नहीं सुनी…
अब रवि सर यादों में ही रहेंगे… पहली बार उनसे प्रभातखबर पटना में मुलाकात हुई थी… नवंबर 2004 का समय था… और अंतिम मुलाकात 2017 में रामनवमी के मौके पर रांची में उनके आवास पर हुई थी… उनके सानिध्य में दो बार हमें काम करने का मौका मिला… प्रभात खबर और Inext Patna में वे हमारे संपादक रहे थे… सबसे बड़ी बात कि उन्होंने ही हमें रिपोर्टिंग से एडिटिंग में लाए थे। तब हमें न डेस्क के बारे में और न ही कंप्यूटर पर फॉन्ट के बारे में कोई जानकारी थी… उन्होंने ही पहली बार मेरे नाम के साथ उपसंपादक की पदवी दी थी… इतना ही नहीं, बीमार रहते हुए भी आपने हमारे मुखियाजीईपेपर के मास्क हेड के डिजाइन पसंद करने में मदद की थी.. अब यह कड़वा सच है कि आप चले गये… आप जहां भी रहें, सहयोग बनाए रखें… ईश्वर आपको अपने श्रीचरणों में स्थान दें और पीड़ित परिवार को दुख सहने की शक्ति प्रदान करें… ॐ शांति
सुधीर मिश्रा-
रवि नहीं रहे। बहुत लड़े कैंसर से। सिर्फ़ अपने लिए नहीं। अपने जैसे लाखों के लिए। दवाओं के दामों के लिए। कैंसर पीड़ितों के हक़ और सुविधाओं के लिए। उनमें जीते रहने की जिजीविषा पैदा करने के लिए। फ़रवरी महीने में मिले थे हम। कैंसर वाला कैमरा उनका आयोजन था। एक सेशन में मैं भी था।

मेरी पहली मुलाक़ात उनसे 2010 में हुई थी। दोनों इंटरव्यू देने के लिए भास्कर गये थे। फिर पहली बार संपादक बने। बाद में सोशल मीडिया पर जुड़ाव रहा। बीमारी में भी ख़ूब काम करते रहे। nbt गोल्ड के लिए भी लिखा। तीन दिन पहले ही अमेरिका में सम्मानित होकर वापस आये थे। अस्पताल जाने की पोस्ट भी डाली थी। अपने जीवन को सार्थक बनाकर आज अनंत यात्रा पर चले गये। ईश्वर उन्हें अपने चरणों में स्थान दें


