
संजय कुमार सिंह
आज इंडियन एक्सप्रेस और द टेलीग्राफ को छोड़कर मेरे सभी अखबारों में तिरुपति के लड्डू पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी लीड है। द टेलीग्राफ में यह खबर उस दिन भी पहले पन्ने पर नहीं थी। दिलचस्प यह है कि इंडियन एक्सप्रेस ने मूल खबर को पहले पन्ने पर चार कॉलम में छापा था जो तब दूसरे अखबारों में इतनी प्रमुखता से नहीं छपी थी। आज जब सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी कई अखबारों में लीड है तो इंडियन एक्सप्रेस में यह पहले पन्ने पर सिंगल कॉलम में छोटी सी खबर है। नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक अलग है, फैसलों का सुप्रीम दिन। इसके तहत तीन खबरें प्रकाशित की गई हैं। पहली तो भगवान को राजनीति से दूर रखने की है ही, दूसरी मजदूर के बेटे को आईआईटी में दाखिले से संबंधित आदेश और तीसरी खबर है, पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के खिलाफ जांच याचिका पर (सुप्रीम कोर्ट की) नाखुशी।
जहां तक लड्डू (दरअसल घी) में मिलावट का मामला है, भास्कर डॉट कॉम के अनुसार मुख्य मंत्री चंद्र बाबू नायडू ने 18 सितंबर 2024 को आरोप लगाया था कि पूर्व जगन सरकार में तिरुपति मंदिर के लड्डू में इस्तेमाल होने वाले घी में जानवरों की चर्बी और फिश ऑयल मिलाया गया था। टीडीपी ने एक (पुरानी) लैब रिपोर्ट दिखाकर अपने आरोपों की पुष्टि का दावा भी किया (था)। नायडू ने कहा (था), जब बाजार में 500 रुपए किलो घी मिल रहा था, तब जगन सरकार ने 320 रुपये किलो घी खरीदा। आप जानते हैं कि आम घरों में दूध की मलाई से घी बनता है और इतना होता है कि उसी से काम चल जाता है। इसमें श्रम और आग के खर्च के अलावा कुछ नहीं होता है फिर भी इस मामले से राजनीति करने की कोशिश की गई और दिल्ली के अखबारों में यह खबर 20 सितंबर को छपी थी। इस खबर को अखबारों ने जितना महत्व दिया उतना सेबी घोटाले को नहीं दिया है।
इस खबर की प्रस्तुति के बारे में मैंने तब लिखा था, “आज अमर उजाला में लीड का शीर्षक है, आस्था पर आघात … गाय की चर्बी, मछली के तेल से बन रहा था तिरुपति का प्रसाद। यह खबर मेरे सात अखबारों में सिर्फ अमर उजाला में लीड है। हिन्दी के दूसरे अखबार, नवोदय़ टाइम्स में यह लीड के बराबर में टॉप पर, दो कॉलम में है। अखबार ने खबर के साथ मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की फोटो के साथ उनके बयान को उपशीर्षक बनाया है, हम शुद्ध घी का इस्तेमाल कर रहे हैं। यानी एक तरफ प्रयोगशाला रिपोर्ट के हवाले से आस्था पर आघात की खबर और दूसरी तरफ मुख्यमंत्री का आश्वासन कि हम शुद्ध घी का इस्तेमाल कर रहे हैं (चर्बी का प्रयोग पहले होता था)। यह खबर अंग्रेजी के किसी अखबार में लीड नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस में चार कॉलम में और टाइम्स ऑफ इंडिया में सिंगल कॉलम में है। टाइम्स ऑफ इंडिया का शीर्षक वही है जो मामला है, तिरुपति लड्डू के घी में लार्ड (सुअर की चर्बी का अंश), टैलो (पशुवसा) : प्रयोगशाला रिपोर्ट। इंडियन एक्सप्रेस में इस खबर का शीर्षक है, “तिरुपति के लड्डुओं पर आंध्र प्रदेश में हंगामा : टीडीपी के लोकेश ने कहा घी में फिश ऑयल, बीफ टैलो”।”
मुझे यह प्रचार या राजनीति ‘बैसाखी’ को मजबूत करने की कोशिश लगती है और यह उसकी अपनी या उनकी हो सकती है जिन्हें इसकी जरूरत है। हरियाणा चुनाव के समय यह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री की विशेष कोशिश हो सकती है। टाइम्स ऑफ इंडिया में आज सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी लीड है और उसके साथ की एक खबर में कहा गया है कि टीडीपी अपने मुख्यमंत्री के आरोपों पर कायम है और केंद्रीय जांच के लिए तैयार है। आप इसका मतलब समझ सकते हैं। हालांकि, अमर उजाला की खबर के अनुसार, पीठ ने सुनवाई के बाद कहा कि राज्य सरकार की ओर से गठित एसआईटी जांच जारी रखे या किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाये, इस पर हम सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से सुझाव चाहते हैं। पीठ ने कहा, सभी याचिकाओं पर एक साथ तीन अक्तूबर को सुनवाई होगी। यहां यह बताना उचित रहेगा कि मंदिर समिति ने कहा है कि वह घी की जांच करके ही उपयोग करता है और मानकों के अनुरूप नहीं पाये जाने पर घी के टैंकर लौटाये गये हैं। ऐसे में बहुत सारे अनुत्तरित सवाल है और एक बात पक्की है कि मामला आस्था का नहीं, राजनीति का ही है।
प्रधानमंत्री की छवि और प्रचार
प्रचार और छवि बनाने-बिगड़ने की भाजपाई राजनीति के तहत आज के अखबारों में प्रधानमंत्री को महान बताने और उनके प्रचार में एक खबर या शीर्षक है, “दुनिया में आतंकवाद की कोई जगह नहीं”। इसके तहत खबर है, नरेन्द्र मोदी ने अपने इजराइली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू से पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रम पर बात की और इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद के लिए हमारी दुनिया में कोई जगह नहीं है। यह इस तथ्य के बावजूद है 2019 के चुनाव में भाजपा को पुलवामा से भारी लाभ मिला था (या ऐसी व्यवस्था की गई थी जिससे लाभ लिया गया था)। फिर भी वारदात से संबंधित खास जानकारी या जांच की भी चर्चा नहीं हुई जबकि वारदात को लेकर ही कई तरह की आशंका जताई जा चुकी है। हालांकि, उसी चुनाव में आतंकवाद की आरोपी साध्वी प्रज्ञा को सांसद बनाया गया। समझौता एक्सप्रेस ब्लास्ट के अभियुक्तों के छूट जाने और अदालत की टिप्पणिय़ों के बावजूद आगे की कोई कार्रवाई नहीं किये जाने तथा ऊपर अपील करने की जरूरत नहीं है, जैसी घोषणा पहले ही कर दिये जाने तथा जज लोया की मौत की जांच नहीं कराये जाने के बावजूद है। इतना ही नहीं, मणिपुर में जो हो रहा है उसे डेढ़ साल में भी नहीं रोका जा सका है। लेकिन खरगे ने कहा कि वे नरेन्द्र मोदी को हटाये बगैर नहीं मरेंगे तो केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनकी आलोचना की है। मूल खबर दि एशियन एज में पहले पन्ने पर थी और आज भी यह खबर उसी में पहले पन्ने पर है। जनसत्ता डॉट कॉम के अनुसार, खड़गे के बयान पर अमित शाह का तीखा पलटवार, कहा- मोदी के प्रति कांग्रेसियों में है नफरत और डर। अमित शाह ने इसे अत्यंत खराब और अपमानजनक करार दिया है। दि एशियन एज के अनुसार, बाद में खरगे ने कहा कि गृहमंत्री को मणिपुर और जाति वार जनगणना जैसे गंभीर मामलों पर ध्यान देना चाहिये।
सिद्धरमैया के खिलाफ मामला
दूसरी ओर, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया के खिलाफ भ्रष्टाचार की खबर तकरीबन सभी अखबारों में है। इंडियन एक्सप्रेस में यह तीन कॉलम की लीड है। मनीलांडरिंग का आरोप – इस खबर का फ्लैग शीर्षक है। आप जानते हैं कि इस आरोप पर अरविन्द केजरीवाल को महीनों जेल में रहना पड़ा है। यह मामला पुराना और अपेक्षाकृत ज्यादा सबूत वाला लग रहा है लेकिन बाद में सामने आया है। या कहिये कि मुख्यमंत्री बनने के बाद यह मामला हाथ में लिया गया है। इससे पहले कर्नाटक की गैर भाजपा सरकार विधायक खरीदकर गिरा दी गई थी। इसबार ऐसा संभव नहीं हुआ तो यह मामला बनाया गया है। हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर बताती है कि मुख्यमंत्री की पत्नी ने एमयूडीए को प्लॉट वापस देने की पेशकश की है; ईडी आगे आया जबकि टाइम्स ऑफ इंडिया का शीर्षक है, भूमि मामले में ईडी ने मुख्यमंत्री सिद्धरमैया और पत्नी के खिलाफ जांच शुरू की। द हिन्दू में यह खबर चार कॉलम में है और शीर्षक हिन्दी में इस तरह होता, एमयूडीए मामले में ईडी ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री के खिलाफ मामला दायर किया, पत्नी ने प्लॉट वापस करने की पेशकश की। अमर उजाला में यह दूसरे पहले पन्ने पर है। शीर्षक है, मुख्यमंत्री सिद्धरमैया पर ईडी ने दर्ज किया केस, पत्नी सरेंडर करेंगी भूखंड। नवोदय टाइम्स में भी यह दूसरे पहले पन्ने पर है। दो कॉलम की इस खबर का शीर्षक है, ईडी ने सिद्धरमैया के खिलाफ दर्ज किया धन शोधन का मामला। पत्नी ने भूखंड वापस करने की पेशकश की – यह अलग सिंगल कॉलम की खबर है।
हरियाणा में भाजपा का चुनाव प्रचार
जहां तक हरियाणा में भाजपा के चुनाव प्रचार का मामला है, वरिष्ठ पत्रकार शीतल पी सिंह ने एक्स पर लिखा है, हरियाणा चुनाव में चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में राहुल गांधी के मुक़ाबले में बीजेपी ने राम रहीम को पेश किया है । बीजेपी को बलात्कार और हत्या के मामले में सजा काट रहे इस दुर्दांत अपराधी के करिश्मे पर मोदीजी से ज़्यादा भरोसा है। इनके पेरोल की दरख्वास्त पर ऐतिहासिक तौर पर निष्पक्ष चुनाव आयोग ने एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) दी है! सोशल मीडिया पर राम रहीम की पेरोल का इलेक्शन कनेक्शन इस तरह बताया जा रहा है। आपको उनकी गिरफ्तारी पर राज्य के शहरों में हुई तोड़फोड़ की भी याद होगी। इसके मुकाबले डबल इंजन वाले दूसरे राज्यों में नागरिकों के प्रदर्शन और तोड़फोड़ पर पुलिस यानी सरकार की कार्रवाई को याद कीजिये। अमर उजाला में यह दो कॉलम की खबर है और चुनाव आयोग के प्रवक्ता मनीष लोहान के हवाले से बताया गया है कि जेल से छूटकर वह हरियाणा नहीं आयेगा, चुनाव को किसी तरह से प्रभावित नहीं करेगा और जनसभा करने या सोशल मीडिया के जरिये किसी तरह की अपील करने पर पाबंदी रहेगी।
राम रहीम और चुनाव पर पैरोल
आपको याद होगा कि अरविन्द केजरीवाल को लोकसभा चुनाव के समय सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी तो कहा गया था कि उन्हें स्पेशल ट्रीटमेंट मिला है। राम रहीम के साथ ऐसी कोई बात नहीं है। यह चुनाव आयोग ने बताया है और अमर उजाला में खबर है। उससे पहले, सचिन गुप्ता ने राम रहीम के पैरोल का यह विवरण एक्स पर दिया है। इसे भी देख लीजिये :
- फरवरी 2022 में 21 दिन पैरोल– पंजाब विधानसभा चुनाव
- जून 2022 में 30 दिन पैरोल– हरियाणा नगर निकाय चुनाव
- अक्तूबर 2022 में 40 दिन पैरोल– आदमपुर सीट का चुनाव
- जुलाई 2023 में 30 दिन पैरोल– हरियाणा का पंचायत चुनाव
- नवंबर 2023 में 21 दिन पैरोल– राजस्थान विधानसभा चुनाव
- जनवरी 2024 में 50 दिन पैरोल– लोकसभा चुनाव
- अगस्त 2024 में 21 दिन पेरोल-हरियाणा विधानसभा चुनाव
- अक्टूबर 2024 में 21 दिन पेरोल-हरियाणा विधानसभा चुनाव।
इस संबंध में आज हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने की खबर का शीर्षक है, हरियाणा चुनाव से पहले राम रहीम को जमानत मिल सकती है। खबर में बताया गया है कि दो शिष्याओं से बलात्कार के मामले में वे 20 साल की सजा काट रहे हैं। हरियाणा चुनाव से पहले भाजपा अगर राम रहीम की सेवा ले रही है तो महाराष्ट्र चुनाव से पहले वहां की डबल इंजन वाली सरकार ने देसी गाय को राज्यमाता का दर्जा दे दिया है।
महाराष्ट्र में देसी गायें राज्यमाता
टाइम्स ऑफ इंडिया में आज प्रकाशित खबर के अनुसार महाराष्ट्र में देसी गायों को अब राज्यमाता-गौमाता कहा जायेगा। महाराष्ट्र के लिए पैकेज की घोषणा प्रधानमंत्री कर चुके हैं और महाराष्ट्र के साथ झारखंड में भी चुनाव होना है सो आज दि एशियन एज में पहले पन्ने पर खबर है, प्रधानमंत्री कल झारखंड जायेंगे, 83,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू करेंगे। इससे पहले भी वे एक बार झारखंड की चुनावी यात्रा कर चुके हैं। आज की खबर प्रधानमंत्री कार्यालय से जारी बयान के आधार पर है। इसमें कहा गया है कि देश भर में आदिवासी समाज का समग्र और व्यापक विकास सुनिश्चित करने की उनकी प्रतिबद्धता के क्रम में प्रधानमंत्री 79150 करोड़ रुपए की धरती आभा जनजातिय ग्राम उत्कर्ष अभियान शुरू करेंगे। कुल मिलाकर, कहा जा सकता है कि हरियाणा जीतने के लिए भाजपा ने जो उपाय और प्रयास किये हैं वह उसके सामान्य चुनावी प्रयासों से अलग है और झारखंड व महाराष्ट्र में लगभग वैसा ही है जैसा अभी तक रहा है।
सोनम वांगचुक दिल्ली में गिरफ्तार
इसका पता इस खबर से भी लगता है, दिल्ली सीमा में घुसते ही वांगचुक हिरासत में (अमर उजाला)। खबरों के अनुसार, शिक्षाविद और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक लेह से पैदल आ रहे थे। टीवी9हिन्दी डॉट कॉम के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने सोमवार रात सोनम वांगचुक समेत करीब 150 लोगों को शहर की सीमा पर हिरासत में ले लिया। ये लोग लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग पर लद्दाख से दिल्ली मार्च कर रहे थे और राजघाट तक जाना चाहते थे। लेकिन उन्हें शहर के सिंघु बार्डर से हिरासत में लिया गया क्योंकि शहर में निषेधाज्ञा लागू है। मोटे तौर पर यह भी पहले के मामलों की ही तरह है कि दिल्ली में जो सरकार में बैठा है वही तय करेगा कि कौन दिल्ली आयेगा या नहीं आयेगा। हरियाणा चुनाव को लेकर लोग सड़क पर लगी कील की तस्वीर साझा कर रहे हैं और पूछ रहे हैं, इसकी फसल तैयार हो गई है, काटने का समय आ गया है।


