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एंकरिंग के वक्त चित्रा के चेहरे पर तनाव साफ दिखता है!

डॉ माधो सिंह-

हाल ही में चित्रा त्रिपाठी ने abp join करके “जनहित” शुरू किया है, लेकिन न्यूजरूम में क्रिएटिविटी का इतना अकाल पड़ चुका है कि जगविंदर पटियाल जी के शो “public interest” का हिंदी अर्थ करके “जनहित” कर दिया गया है। अगर इसे public interest ही रहने दिया जाता तो क्या कुछ बिगड़ जाता और जनहित करके चित्रा त्रिपाठी इसमें कौन से तीर मार रही है। वही दिन की 5 बड़ी खबरें जो रात 9 बजते बजते इतनी घिस चुकी होती हैं कि उनमें नया कुछ रहता ही नहीं।

एंकरिंग के वक्त चित्रा के चेहरे पर तनाव साफ दिखता है, जबकि 2006 में इसे RFC की ट्रेनिंग मिल चुकी है, लेकिन वो मर्यादित आचरण, सौम्यता वाला मीडिया का दौर अब बीते जमाने की बात हो गई है जब राधिका कौशिक जी जैसी एंकर को सिर्फ देखने भर के लिए लोग पूरा आधा घंटा टीवी देख लेते थे।

अब जनहित पर आता हूं। मेरी पत्नी मेरी tv news देखने की आदत से बेहद तंग है। उसका कहना है कि क्या ये सब देखते रहते हो। एक ही खबर को एक ही बात को बार बार रटते रहते हैं ये लोग। अब धर्मपत्नी को कैसे समझाऊं कि जिससे गठबंधन हुआ है वो भी इसी दुनिया का जीव है अपने मुंह से अपने ही धंधे की बुराई कैसे कर दूं, लेकिन जनहित में मुझे जनहित जैसा अभी तक तो कुछ नया लगा नहीं। बाकी dna में सुधीर चौधरी जी ने न्यूज प्रेजेंटेशन का काफी कुछ तरीका बदला था। But black & white बोर करता है। आखिर चैनल की अपनी भी तो कोई पॉलिसी एजेंडा होता है।

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