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उत्तर प्रदेश

राम मंदिर में कैश के अलावा 1250 सोना चांदी और हीरा जड़ी मूर्तियां भी गायब होने का दावा!

Hindi newspaper front page with a bold headline 'जिन पर उठे सवाल, उनके पद बरकरार' and multiple article columns with subheads and a boxed inset image.

अयोध्या। राम मंदिर निर्माण के लिए देश-विदेश से श्रद्धालुओं द्वारा भेंट की गईं करीब 1250 श्रीराम शिलाओं को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। दावा किया जा रहा है कि इनमें से बड़ी संख्या में शिलाओं का अब कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इनमें सोने-चांदी से निर्मित, रत्नजड़ित और बेहद मूल्यवान शिलाएं भी शामिल थीं, जिन्हें राम मंदिर निर्माण के लिए श्रद्धाभाव से दान किया गया था।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, राम मंदिर आंदोलन के दौरान और उसके बाद देश के विभिन्न हिस्सों के अलावा विदेशों से भी विशेष शिलाएं अयोध्या भेजी गई थीं। इनमें से सबसे महंगी शिला मॉरीशस से आई बताई जाती है, जबकि मुंबई के एक कारोबारी ने हीरे जड़ी शिला दान की थी। कई शिलाएं सोने और चांदी से निर्मित थीं, जिनका धार्मिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से विशेष महत्व माना जाता है।

बताया जा रहा है कि इन शिलाओं को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी अलग-अलग चरणों में विभिन्न संस्थाओं और समितियों के पास रही। हालांकि अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर ये शिलाएं कहां हैं और उनका वर्तमान रिकॉर्ड क्या है। दावा है कि करीब 1250 शिलाओं का कोई स्पष्ट हिसाब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है, जिससे श्रद्धालुओं और रामभक्तों के बीच जिज्ञासा और चिंता दोनों बढ़ गई हैं।

इस मामले में संबंधित पक्षों से जवाब और आधिकारिक स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग भी उठने लगी है। लोगों का कहना है कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी इन भेंटों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि किसी तरह की आशंका या भ्रम की स्थिति न रहे।

हालांकि, इस संबंध में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह स्पष्ट होना बाकी है कि कथित रूप से गायब बताई जा रही शिलाओं का वास्तविक रिकॉर्ड क्या है, वे कहां सुरक्षित रखी गई हैं और उनके संबंध में भविष्य में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया जाएगा या नहीं।

फिलहाल, राम मंदिर निर्माण में श्रद्धालुओं द्वारा समर्पित इन विशेष शिलाओं को लेकर उठे सवाल अयोध्या से लेकर देशभर में चर्चा का विषय बने हुए हैं। यदि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो यह मामला आस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही से जुड़ी एक बड़ी बहस का रूप ले सकता है।


पीएम की वेबसाइट के मुताबिक नरेंद्र मोदी फिलहाल 12 साल के राज में अपनी सौवीं विदेश यात्रा पर हैं।
इतने देशों में घूमने का हासिल यह है कि बीते 21 महीने में विदेशी संस्थागत निवेशक भारत से 3.19 लाख करोड़ निकालकर भाग गए।
करीब 100 लाख करोड़ की नकदी पर बैठा देश का कॉरपोरेट विदेशों में पैसा लगा रहा है।
वहीं, भारतीय मंदिर से चंदा चोरी कर रहे हैं।
-सौमित्र राय, वरिष्ठ पत्रकार

Three people in traditional attire exchange a book in a village square; video play button overlay indicates a video.

राजेश साहू-

अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी कोई नई नहीं है। धर्मसेना के संस्थापक संतोष दुबे का दावा है कि 1989 में गांव-गांव, शहर-शहर और देश-विदेश से पूजित होकर अयोध्या आईं सोने-चांदी, हीरे-माणिक्य और अष्टधातु की 1250 शिलाएं अब ‘गायब’ हो चुकी हैं।

ये शिलाएं 2002 तक कारसेवकपुरम में रहीं। मिट्‌टी की पूजित शिलाएं आज भी कारसेवकपुरम में रखी हैं, लेकिन धातु की शिलाएं कहीं दिखाई नहीं देतीं। संतोष दुबे के मुताबिक, सोने-चांदी की शिलाओं की देख-रेख का जिम्मा भी ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के पास था।

ये शिलाएं कारसेवकपुरम में जहां सुरक्षित रखी गई थीं, वहां 3 ताले लगे थे। फिर ये शिलाएं कहां गायब हो गईं, यह किसी को नहीं पता है।

कई लोग जानना चाहते हैं कि राम मंदिर में दान चोरी का मामला खुला कैसे? असल में कुछ दिन पहले चढ़ावे की गिनती करने वाली टीम में एक नया कर्मचारी शामिल हुआ था। 7 जून, 2026 को उसने नोटों की एक गड्डी छिपा ली। उसकी यह हरकत CCTV में रिकॉर्ड हो गई।

पूछताछ होने पर उसने चढ़ावे की रकम में हो रही चोरी से जुड़ी कई बातें बताईं। 9 जून को यह जानकारी सार्वजनिक हो गई और मामला सुर्खियों में आ गया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इसे मुद्दा बनाकर सरकार और ट्रस्ट को घेरा।

Elder Indian man in an orange kurta and beige vest points while speaking, holding a document.

हैरानी की बात यह है कि मामला सामने आने पर चंपत राय ने बाकी ट्रस्टियों को इसकी जानकारी नहीं दी। हेरा-फेरी की जानकारी होने के बावजूद पुलिस में शिकायत भी दर्ज नहीं कराई।

चंपत राय ने 12 जून को सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर सफाई दी। कहा- ट्रस्ट समय-समय पर चढ़ावे की राशि को ऑडिट कराता है। किसी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं है।

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