गीता श्री-
इरा झा… वरिष्ठ पत्रकार. हमारी इरा दीदी! हंसती , गाती , झूमती एक ज़िंदादिल स्त्री , मेरे लिए बड़ी बहन.
दोपहर में उनके निधन की खबर आई और तब से किसी काम की नहीं रही. जो भी उनके क़रीब गया, उसे बहुत प्यार दिया. आज दिन भर सहेलियां इतने मातम में रहीं कि मुझे कुछ भी लिखने और बोलने का मन न हुआ. चुप -सी लगी रही.
इन सर्दियों में उन्हें हम गोवा लेकर जाने वाले थे. बाई पास सर्जरी के बाद उन्हें डॉक्टर ने सलाह दी थी, अधिक ठंड और गर्मी से बचे. पिछले साल मई में हमने रामगढ में कुछ दिन साथ बिताए. वे दिन अब सदा स्मृतियों में रहेंगे.
मुझे और मंजरी को वे अपने राइट एंड लेफ़्ट सिस्टर्स कहती थीं. उनके स्वभाव में, आदत में बिखराव -सा था, लापरवाही थी. हम जब साथ-साथ स्पेन घूम रहे थे तब हम दोनों उन्हें समेटते चलते… बैग किधर, कोट किधर, मोबाइल किधर… इरा दी इधर… उधर.
बातें करना उन्हें पसंद था. ख़ूब बातूनी… उनके पास पत्रकारिता के इतने क़िस्से, घटनाएँ , संस्मरण. ख़त्म ही नहीं होती थीं. मैं उन्हें कहती रही , मैं ये चाहती भी थी कि वे महिला पत्रकारिता का इतिहास लिखें. वे उस दौर में आईं थीं जब लड़कियाँ कम थीं. हिंदी मीडिया में तो ऊंगली पर गिनने लायक़ संख्या थी. जब हमारी पीढ़ी आई तो इरा दी हम लोगों की आदर्श हो गईं थीं. हार्ड वर्क , अख़बार की नाइट ड्यूटी सबमें आगे. मैं उन्हें भौंचक होकर निहारा करती. जंक ज्वेलरी, वेशभूषा सबमें एक स्टायल था.
उनकी संगति में कोई बोर नहीं हो सकता था. बात करते-करते गाना गाने लगतीं. रामगढ में रील्स बनाना सीख गईं और मनपसंद गाने चुन चुन कर अपने वीडियो में डालने लगी थीं.
ऑपरेशन के बाद बहुत कमजोर हो गईं थीं. मुझे चिंता होती थी. खाने -पीने में उनकी पसंद -नापसंद सख्त और सीमित. कम चीजें खाती थीं.
बहुत -सी यादें आ रही हैं… क्या -क्या लिखूँ… मन भारी है. यक़ीन नहीं हो रहा… इरा दी … बहुत बड़ा अभाव … बहुत बड़ा दुख दे गईं.

रमेश शर्मा-
सीनियर पत्रकार ईरा झा इतनी जल्दी विदा हो जाएंगी यह ख्याल तो कभी आया ही नहीं था क्योंकि जीवंत और जज्बे से भरी वे सक्रिय थीं लेकिन खबर आई है कि आज एम्स दिल्ली में उनका निधन हो गया। वे छत्तीसगढ़ से गहरा अनुराग रखती थीं क्योंकि बस्तर में जन्मी।
वे निरंतर आदिवासी समाज के मुद्दों को राष्ट्रीय स्वर देती थीं। दिल्ली उनका कार्यक्षेत्र रहा। दिल्ली में 80/90 के दशक में जब न्यूज रूम में फीमेल जर्नलिस्ट की धमक हिंदी पत्रकारिता में सुनाई देने लगी थी तो उसमें एक दबंग आवाज़ ईरा झा की भी थी।
NBT, Hindustan इत्यादि अखबारों में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज करा चुकी ईरा झा कुछ अरसा रायपुर में भी रहीं। एक बेटा है और उनके पति अनंत मित्तल भी जानेमाने पत्रकार हैं। इस असीम दुख की घड़ी में ईश्वर उनको आघात सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
ये भी पढ़ें…


