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बिहार

हरियाणा में गोबर खाने वाले टार्जन के बाद न्यूज़ चैनलों और यूट्यूबरों ने सुपरसोनिक बिहारी टार्जन खोजा है!

आप 15 की स्पीड पर थार चलवा कर उसके बगल से स्टाइल दिखाते हुए दौड़कर निकल जाइए, बस हो गए विश्व के सबसे बड़े धावक. प्रेक्टिस, कॉम्पीटिशन वो सब क्या होता है भाई? अगर आप दौड़ने का रील नहीं बनाते तो झांट धावक हो!

दीपांकर-

मानवता के दर्ज इतिहास में 44.72 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार पाने वाले के रूप में उसैन बोल्ट का नाम दर्ज है. इससे तेज दौड़ने वाले मनुष्य की खोज अभी तक नहीं की जा सकी है.

अब आते हैं महिन्द्रा थार की रफ्तार पर. लोग थार 160-180 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार तक चलाते हैं,

हालांकि ये 100 से ऊपर चलाने लायक गाड़ी नहीं है. लेकिन महिन्द्रा थार तो छोड़िए स्प्लेन्डर प्लस भी दूसरी गियर में उसैन बोल्ड की 44.72 वाली रफ्तार को पछाड़ देगी.

अब टीवी चैनल और यूट्यूब को देखिए तब आपको पता चलेगा कि सुपरसोनिक राजा यादव दुनिया के सबसे बड़े धावक हैं. इतना बड़ा धावक होने के बाद भी अभी तक इन्होंने स्टेट या नेशनल लेवल का कोई रनिंग ट्रायल क्यों नहीं दिया ये समझ से परे है.

इसके पहले हरियाणा के यूट्यूबरों ने गाय का गोबर खाने वाला टार्जन खोजा था. हरियाणवी टार्जन गाय का गोबर खाकर एक लाख दंड-बैठक करता था.

अब बिहार के यूट्यूबरों ने गाय का दूध पीने वाला बिहारी टार्जन खोजा है. बिहारी यूट्यूबरों को हरियाणा के यूट्यूबरों से कम समझा क्या?

बिहारी टार्जन छाया है, उसकी रफ़्तार को चीता, बाघ से लेकर स्कॉर्पियो और थार से ज्यादा बता दिया जा रहा है.

सोशल मीडिया अपने स्टार तैयार करती है, उसे दौड़ने की परिभाषा में नहीं जाना.

आप 15 की स्पीड पर थार चलवा कर उसके बगल से स्टाइल दिखाते हुए दौड़कर निकल जाइए, ट्रांजिशन लगाकर वीडियो लगाकर सोशल मीडिया पर डालिए. बस हो गए विश्व के सबसे बड़े धावक.

प्रेक्टिस, कॉम्पीटिशन वो सब क्या होता है भाई? अगर आप दौड़ने का रील नहीं बनाते तो झांट धावक हो?

ओलंपिक में दौड़ आओ. नेशनल दौड़ लो. कुछ भी कर लो अगर जिम वाली देह नहीं और रील नहीं बनाते तो “अनंत सिंह के” धावक हो.

भारत के फास्टेस्ट स्प्रिंट रनर अमलान बोरगोहिन जिनकी पेरिस ओलंपिक में खूब तारीफें हुई. उस पर बना टीवी पैकज और स्पेशल शो खोज रहा था. जैसे मिलेगा बताता हूं.

तब तक आप लोग सुपरसोनिक राजा यादव का थार पिछाड़ने वाला वीडियो देखिए. आज के 400 साल बाद विश्व गुरु भारत की पीढ़ियां यही सब थंबनेल देखकर वाकई में ये मानेंगी कि उनके यहां कोई थार और चीता को पछाड़ने वाला धावक था लेकिन इंडिया गरीब देश था इसलिए उसे ओलंपिक में नहीं दौड़ने दिया गया.

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