सच भी है, कल अगर पाठक जी ना होते तो शायद राघवेंद्र को सही समय पर उचित इलाज मिल पाना असंभव था। पर, पाठक जी की दरियादिली में वह कमी छुप गई, जिस पर सबसे ज्यादा चर्चा होनी चाहिए थी। अच्छे पर चर्चा हो चुकी है, अब मैं उन कमियों पर चर्चा करुंगा, जिसको पाने का हक हर आम नागरिक, मरीज को है….

अनिल सिंह-
अच्छे आवरण में खराबियां छुप जाती हैं। सिस्टम में समझदार वही होता है, जो मौके का भरपूर फायदा उठाता है। कल से स्वास्थ्य विभाग के मुखिया एवं उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के दरियादिली की चर्चा सोशल मीडिया पर छाई हुई है कि उन्होंने खुद घंटों समय देकर एक पत्रकार राघवेंद्र प्रताप सिंह की जान बचा ली। पूरा सोशल मीडिया गुणगान से भरा हुआ है। सच भी है, अगर पाठक जी ना होते तो शायद राघवेंद्र को सही समय पर उचित इलाज मिल पाना असंभव था। पर, पाठक जी की दरियादिली में वह कमी छुप गई, जिस पर सबसे ज्यादा चर्चा होनी चाहिए थी। अच्छे पर चर्चा हो चुकी है, अब मैं उन कमियों पर चर्चा करुंगा, जिसको पाने का हक हर आम नागरिक, मरीज को है।
कल केडी सिंह बाबू स्टेडियम में मीडिया कप का मैच चल रहा था। फील्डिंग के दौरान राघवेंद्र को सीने में दर्द होने लगा तो वह मैदान से बाहर आ गये। मैं, विमल पाठक जी और राजीव श्रीवास्तव भइया वहीं बैठकर मैच देख रहे थे। राघवेंद्र ने इस दर्द को गैस समझकर इग्नोर करने की कोशिश की, लेकिन उनकी परेशानी देखकर मैंने और राजीव भइया ने कहा कि चलो सिविल अस्पताल में दिखा लेते हैं, रिस्क लेना ठीक नहीं है। मेरे कहने पर राघवेंद्र दिखाने को तैयार हुये। मैं, उनका सहयोगी लालचंद उनके ड्राइवर के साथ सिविल अस्पताल पहुंचे। इस दौरान गाड़ी चालक ने जिस तरीके से हजरतगंज के भीड़भाड़ में गाड़ी चलाकर जल्दी से सिविल अस्पताल पहुंचा, निश्चित ही काबिल-ए-तारीफ है।
कार से उतरने के बाद राघवेंद्र को चलने में दिक्कत हो रही थी तो लालचंद और हम उनके दोनों बाजू पकड़कर उन्हें इमरजेंसी में ले गये। डाक्टर ने जल्दी से उनका ब्लडप्रेशर नापा, जो नार्मल आया। फिर भी मैंने कहा कि आप एहतियातन कोई दवा तो दीजिये। डाक्टर ने कहा कि आप पर्चा बनवा लाइये, मैं इन्हें इंजेक्शन लगवाता हूं। मैं पर्चा बनवाकर लाया, तब तक राघवेंद्र को दो इंजेक्शन लगाये जा चुके थे। इसके बाद डाक्टर ने कहा कि आप सेकेंड फ्लोर पर ईसीजी कराकर कार्डियो के डाक्टर को दिखा दीजिये। हमने आनन फानन में ईसीजी कराया तथा वहां मौजूद कार्डियो के डाक्टर को दिखाया। डाक्टर ने ईसीजी देखने के बाद कहा कि कुछ गड़बड़ तो नहीं दिख रहा है, लेकिन कुछ घंटे ऑब्जर्वेशन के लिये रख लेता हूं।
डाक्टर ने मुझसे कहा कि तब तक आप इनकी फाइल बनवा लाइये। मैं नीचे से फाइल बनवा लाया तथा डाक्टर से कहा कि एक बार इको करवा कर देख लीजिये। वहां मौजूद स्टॉफ ने बताया कि इको मशीन महीनों से खराब पड़ी है। मतलब साफ था कि अगर आप हृदयाघात जैसी गंभीर समस्या से पीडि़त हैं तो आपको सिर्फ ईसीजी के भरोसे ही रहना है। खैर, इस बीच राघवेंद्र को एक और इंजेक्शन दिया गया। राघवेंद्र ने बताया कि थोड़ा आराम मिला है, लेकिन दर्द अभी है। मैंने डाक्टर को बताया तो उन्होंने कहा कि इंजेक्शन लगा है, थोड़ी देर में आराम मिल जायेगा। डाक्टर ने कहा कि अटैक जैसी कोई समस्या नहीं है। लिहाजा मैं निश्चिंत हो गया।
राघवेंद्र को थोड़ी आराम मिलने के बाद मैंने कहा कि मुझे अपने बच्चे को स्कूल लेने जाना है, तो मैं उसे छोड़कर आ रहा हूं। दुबारा जब मैं अस्पताल पहुंचा वहां मुझे कोई नहीं मिला। मुझे लगा कि राघवेंद्र ठीक होकर घर जा चुके हैं। मैंने उनको फोन मिलाया, लेकिन उनका फोन नहीं उठा। उनके चालक ने भी फोन नहीं उठाया। इसी बीच, राजीव भइया का फोन राघवेंद्र का हालचाल लेने के लिये आया तो मैंने उन्हें बताया कि डाक्टर ने कहा था कि कोई समस्या नहीं है, तो शायद वह ठीक होगा। उन्होंने फिर दुबारा मुझे फोन किया और बताया कि उसे मेजर अटैक आया था, उसे पीजीआई ले जाया गया है साथ में ब्रजेश पाठक और भूपेंद्र चौधरी भी हैं।
फिर मैंने राघवेंद्र के साथ रहने वाले संभावित लोगों को फोन करना शुरू किया। तब पता चला कि जब टीम के लोग क्रिकेट खेलकर अस्पताल पहुंचे तथा दुबारा ईसीजी कराया गया, तब कार्डियो के दूसरे डाक्टर ने बताया कि इन्हें मेजर अटैक आया है। सही समय पर अस्पताल पहुंच जाने से बात बिगड़ी नहीं, लेकिन अगर इन्हें कहीं अच्छे अस्पताल में चौबीस घंटे के भीतर ऑपरेशन नहीं हुआ तो दिक्कत हो जायेगी। इसके बाद वहां मौजूद पत्रकारों ने नेताओं-मंत्रियों को फोन करना शुरू किया, जिसके बाद ब्रजेश पाठक और भूपेंद्र चौधरी सिविल अस्पताल पहुंचे। वहां से पीजीआई तक लगातार साथ बने रहे। दोनों नेताओं ने पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की। निश्चित रूप से यह दोनों लोग बधाई के पात्र हैं।
पर, वह सवाल जो अनुतरित रह जाता है, उसका जवाब भी जरूरी है। क्या पत्रकार राघवेंद्र की जगह कोई दूसरा मरीज होता तो क्या उसकी जिंदगी बचाई जा सकती थी? मंत्री जी की नाक के नीचे महीनों से इको मशीन खराब है, किसी भी डाक्टर या जिम्मेदार व्यक्ति को इसकी चिंता है? क्या हार्ट अटैक जैसी गंभीर खतरों वाले बीमारियों को लेकर स्वास्थ्य विभाग की इतनी लापरवाही क्षमायोग्य है? मरीजों की जिंदगी से खेलने वाला अयोग्य डाक्टर, जो ईसीजी के बाद भी हार्ट अटैक को नहीं पकड़ पाया, चिकित्सा सेवा में रहने योग्य हैं? क्या उत्तर प्रदेश का प्रत्येक मरीज सही समय पर सही इलाज पाने का हकदार नहीं है? आखिर आम आदमी की समुचित चिकित्सा व्यवस्था कौन सुनिश्चित करेगा?
क्या राघवेंद्र के बाद सिविल अस्पताल में हृदयाघात के किसी दूसरे मरीज को भी सही इलाज मिल पाया होगा? क्या डाक्टर और मशीन ने उसका सही रोग पकड़ लिया होगा? क्या उसके भी किसी रिश्तेदार और परिचित का किसी मंत्री या अधिकारी से इतनी जान पहचान होगी कि वह पीजीआई या किसी दूसरे सरकारी अस्पताल में अपने मरीज की के इलाज की त्वरित व्यवस्था सुनिश्चित करा ली होगी? क्या उसे सही समय पर सही इलाज उपलब्ध हो गया होगा? ऐसे बहुतेरे सवाल हैं, जो स्वास्थ्य सिस्टम से जवाब चाहते हैं। सरकारी अस्पताल आने वाले सभी मरीजों को सही समय पर सही इलाज मिले, आखिर इसकी जवाबदेही कौन तय करेगा? यह भी बेहद शर्म की बात है कि आपका बहुत बड़ा जुगाड़ होगा, तभी आपको इलाज मिलेगा। सामान्य स्थिति में इलाज मिलना मुश्किल है।
पत्रकार रघ्घू ने ज़िन्दगी जीती, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने जीता दिल
नवेद शिकोह-
आपने क्रिकेट मैच बहुत देखे होंगे, लेकिन पत्रकार एकादश सेमीफाइनल में जान की बाज़ी जीतने का संघर्ष था। सांसे अटकने से लेकर राहत की सांस लेने, दिल को दहलाने से लेकर दिल जीतने के रोमांच वाले इस मैच में कोई खिलाड़ी नहीं बल्कि एक राजनेता को मैन ऑफ दी मैच माना गया।
इस क्रिकेट मैच में क्रिकेट की प्रतिभाओं ने ही नहीं भगवान के जीवनदान , पत्रकारों की एकता, चिकित्सकों की कार्यकुशलता और भाजपा नेता भूपेंद्र चौधरी व डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने सबका दिल जीत लिया।
मैच की पिच केडी सिंह बाबू स्टेडियम से सिविल अस्पताल और पीजीआई तक फैल गई थी। स्टेडियम में ही कप्तान राघवेन्द्र प्रताप सिंह रघ्घू के जीवन के विकेट पर पड़े जानलेवा हार्ट अटैक के बॉल को सृष्टि के अंपायर (भगवान) ने नो बॉल करार दिया। लगा भगवान कृष्ण ने अपने नामाराशि डिप्टी सीएम बृजेश पाठक (भगवान कृष्ण का एक नाम ब्रजेश भी है।) को प्रदेश के हर दिल अजीज युवा पत्रकार राघवेन्द्र प्रताप सिंह रघ्घू का जीवन बचाने के लिए मौके पर भेज दिया हो।
दिन ढलने के साथ केडी सिंह बाबू स्टेडियम में पत्रकार एकादश रोमांच की तरह बढ़ रहा था। चंद आखिरी ओवर बचे थे। इस बीच मैच के कप्तान पत्रकार (नेटवर्क टेन न्यूज चैनल के स्टेट हैड) राघवेन्द्र को सीने में तेज़ दर्द उठा। वो बिना किसी को बताए स्टेडियम छोड़ कर अपने ड्राइवर की मदद से सिविल अस्पताल पंहुच गए।
सिविल अस्पताल के चिकित्सकों ने गहन प्रतिक्षण में मेजर हार्ट अटैक की पुष्टि की और इन अटैक को काबू करने के लिए कई इंजेक्शन लगाए।हालत गंभीर थी, तत्काल ऑपरेशन ही जीवन बचा सकता था, जो पीजीआई मे ही संभव था। स्टेडियम तक खबर पहुंचते ही पत्रकारों की पूरी टीम सिविल अस्पताल पहुंची।
पत्रकार राघवेन्द्र पांडेय ने तुरंत डिप्टी सीएम से मदद मांगी। कुछ ही मिनटों में ब्रजेश पाठक और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी खुद सिविल अस्पताल पहुंच गए। यहां से डिप्टी सीएम ने पीजीआई में बात की, आनन फानन में रघ्घू को एंबुलेंस में शिफ्ट कराया। आगे एंबुलेंस पीछे ब्रजेश पाठक का काफिला और पत्रकार एकादश की टीम समय रहते पीजीआई पहुंची। यहां डाक्टर प्रतीक्षा कर रहे थे। जान बचाने के लिए तुरंत आपरेशन होना बेहद जरूरी था।
आपरेशन हुआ और स्टंट डाला गया। तब कहीं जाकर रघ्घू की जिन्दगी की जीत की उम्मीद जगी। लगभग एक घंटा आपरेशन चला। पीजीआई में पचपन हजार रुपए जमा होने थे, अभिभावक की तरह उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने ये राशि जमा की। सिविल अस्पताल से लेकर पीजीआई में आपरेशन तक के संघर्ष से जूझते डिप्टी सीएम और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तब तक नहीं गये जब तक चिकित्सकों ने बता नहीं दिया कि पेशेन्ट को अब जान का खतरा नहीं है।
इन दोनों नेताओं पर प्रदेश के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में उप चुनाव की बड़ी जिम्मेदारी है। इनके सहयोगियों ने बताया कि चुनावी व्यस्तता के कारण कई बार समय से ये लोग भोजन भी नहीं कर पा रहे। घर-परिवार से दूर है।
लेकिन इन जमीनी नेताओं को लगता होगा कि इंसानियत के विशाल विधानसभा क्षेत्र का कर्तव्य निभाना ज्यादा जरूरी है। क्योंकि दिल जीतने वाला हर विधानसभा क्षेत्र का चुनाव जीत सकता है।
सचमुच आज केडी सिंह बाबू स्टेडियम से शुरू होकर सिविल अस्पताल और पीजीआई तक चलने वाले पत्रकार एकादश के फाइनल में राघवेन्द्र के पत्रकार मित्र/अग्रज/सहयोगी राघवेन्द्र पांडे, रतीश त्रिवेदी, विवेक त्रिपाठी, दिनेश त्रिपाठी, प्रेम शंकर मिश्र, अंकित भारती, विक्रम श्रीवास्तव, अखंड प्रताप शाही, विशाल प्रताप सिंह, पंकज चतुर्वेदी, ज्ञानेंद्र शुक्ल, लालचंद, मनीष और अन्य पत्रकारों सहित सिविल अस्पताल व पीजीआई के चिकित्सकों, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने दिल जीत लिया। पत्रकार कह रहे हैं कि डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक को पत्रकार एकादश सेमीफाइनल का मैन ऑफ द मैच कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।
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