ट्रम्प के राष्ट्रपति बनते ही भारतीय बिजनेसमैन गौतम अडानी पर बड़ी गाज गिरी है. यह तब है जब पिछले सप्ताह अमेरिकी चुनाव के नतीजे आने के बाद अडानी ने उचककर ट्रम्प को जीत की बधाई भी सौंपी थी. लेकिन यह सब टंट-घंट काम नहीं आया.
भारतीय अरबपति गौतम अडानी व उनकी कंपनी के अन्य अधिकारियों पर भारत सरकार के अधिकारियों को 250 मिलियन डॉलर से ज्यादा की कथित रिश्वत देने और इसे अमेरिकी निवेशकों से छिपाने का आरोप लगा है. अडानी की धोखाधड़ी से जुड़ा यह पूरा मामला अमेरिका के न्यूयॉर्क का है.
बुधवार को अमेरिकी अभियोजकों ने अडानी और अडानी ग्रीन एनर्जी के दो अन्य अधिकारियों, उनके भतीजे सागर अडानी और विनीत जैन पर 2020-2024 के बीच भारत सरकार के अधिकारियों को सौर उर्जा आपूर्ति का कॉन्ट्रैक्ट पाने के लिए 250 मिलियन डॉलर से ज्यादा की रिश्वत देने का सीधा आरोप है. अडानी को इस अनुबंध से 2 बिलियन डॉलर का मुनाफा कमाने की उम्मीद थी.
अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास के अफसरों ने इस संबंध में कोई भी जवाब नहीं दिया है. रिपोर्ट यह भी बताती है कि एक न्यायाधीश ने गौतम अडानी और सागर अडानी के लिए गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया है. अभियोजक वारंटों को विदेशी कानून प्रवर्तन को सौंपने की योजना बना रहे हैं.


अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग ने गौतम अडानी, सागर अडानी और एज्योर पावर ग्लोबल के 50 वर्षीय कार्यकारी कैबन्स के खिलाफ संबंधित आरोप दायर किए. अभियोजकों ने कैबेन्स की कनाडाई निवेशक के कर्मचारियों में से एक के रूप में पहचान की है.
फोर्ब्स पत्रिका के अनुसार, गौतम अडानी की संपत्ति 69.8 बिलियन डॉलर है, जो उन्हें दुनिया का 22वां सबसे अमीर और भारत का दूसरा सबसे अमीर व्यक्ति बनाती है. हालांकि दौलत की यह भूख कम नहीं पड़ी और धोखाधड़ी करने पर मजबूर होना पड़ा.
अल जजीरा के अनुसार, यूएस अटॉर्नी ब्रियोन पीस ने एक बयान में कहा- “प्रतिवादियों ने अरबों डॉलर के अनुबंध हासिल करने के लिए भारतीय सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने की एक विस्तृत योजना बनाई और गौतम एस अडानी, सागर आर अडानी और विनीत एस जैन ने रिश्वत योजना के बारे में झूठ बोला क्योंकि वे अमेरिकी और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों से पूंजी जुटाने की कोशिश कर रहे थे.”
उप सहायक अटॉर्नी जनरल लिसा एच मिलर ने कहा- “ये अपराध कथित तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों और निदेशकों द्वारा अमेरिकी निवेशकों की कीमत पर भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी के माध्यम से बड़े पैमाने पर राज्य उर्जा आपूर्ति अनुबंध प्राप्त करने और वित्तपोषित करने के लिए किए गए थे.”
यह भी आरोप है कि कई मौकों पर गौतम अडानी ने रिश्वत योजना को आगे बढ़ाने के लिए व्यक्तिगत रूप से भारत सरकार के एक अधिकारी से मुलाकात की और प्रतिवादियों ने इसके कार्यान्वयन के पहलुओं पर चर्चा करने के लिए एक-दूसरे के साथ व्यक्तिगत मीटिंग्स कीं.
इन बैठकों में अडानी को “न्यूमेरो यूनो” और “द बिग मैन” कोड से परिचित कराया गया. जबकि सागर अडानी ने कथित रिश्वत के बारे में जानकारी ट्रैक करने के लिए अपने सेलफोन का इस्तेमाल किया.
अडानी द्वारा बुधवार को, 20 साल के लिए ग्रीन एनर्जी बांड की बिक्री से 600 मिलियन डॉलर जुटाने के कुछ घंटों बाद आरोपों की घोषणा की गई.

गौरतलब है कि पिछले साल जनवरी में अमेरिकी शॉर्ट सेलर कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च में अडानी और उनकी कंपनियों पर शेयर बाजार में हेरफेर करने और धोखाधड़ी का आरोप लगाया था, समूह ने आरोपों से इनकार किया था. सुप्रीम कोर्ट ने एक साल बाद अडानी समूह के पक्ष में फैसला सुनाया था.



Aarav jain
November 21, 2024 at 9:30 am
There is no such news on NDTV