
कन्हैया शुक्ला-
अजब सिस्टम गज़ब सिस्टम! हमारे सिस्टम की एक और जीत हुयी है. एक और क्रूर पति को सिस्टम ने ठिकाने लगा दिया है. जिसकी पत्नी परिवार को इस कदर बचाना चाहती थी कि ९ केस कर दिए पूरे परिवार पर, मर्डर तक का चार्ज लगा दिया, ताकि सब लोग घबरा कर साथ रहने लग जाएँ और परिवार बच जाये.
पर अतुल सुभाष तो निहायत ही मतलबी निकला. आराम से आत्म हत्या करके चला गया, वो भी अपनी पत्नी को पैसे दिए बिना.
बेचारी ने केवल और केवल ३ करोड़ ही तो मांगे थे, पर नहीं .. पैसा हाथ का मैल होता है ये हम सब जानते हैं, इसके बावजूद अतुल पैसे देना ही नहीं चाहता था. ऐसे में पत्नी ने झूठे केस लाद दिए तो क्या गलत किया?
मल और मूत्र द्वार चाटना तो अमर प्रेम की निशानी होता है. ये भी वो कर न पाया, बेवजह ही पत्नी को मना किया और झगड़ा कर बैठा. वो समझ न पाया सच्चे प्रेम को. तब भी नहीं, जब उसकी पत्नी उसकी बगल चाटने की भीख मांगती थी.
अपने मरद के अंग विशेषों को चाटेगी तो क्या गलत करेगी? इतना भी नहीं समझा. पत्नी ने २ साल के बेटे को पिता से मिलने से रोक लगा रखी थी, वो भी उसने कुछ सोच समझ कर ही किया होगा.
जज साहिबा ने भी बच्चे से मिलवाना उचित नहीं समझा, उन्होंने भी होशियारी का ही परिचय दिया होगा.




इसपर भी वो बिलखता रहता था, अपने बच्चे से मिलने की जिद हर तारीख पर कोर्ट में करता था. अब आप ही बताइए… जज साहिबा एक आदमी का बिलखना देखेंगी या उसकी पत्नी की वसूली पहले करवाएंगी? नारी का दुःख पहले है या पुरुष का? जज साहिबा पर भी उसने भरोसा नहीं किया.
वो जज साहिबा जिन्होंने मात्र ५ लाख मांगे. वो भी अतुल ने अपनी कंजूसी के मारे दिए ही नहीं. अरे इतने बड़े AI साइंटिस्ट हो, आर्टिफिशिअल न सही अपना असली इंटेलिजेंस कुछ तो लगा लेते .. ५ लाख आज के ज़माने में होते ही कितने है? वो न देकर कानून पर भरोसा है.. येही बोलता रहा. अरे जज साहिबा को कानून पर भरोसा नहीं है.. तू क्या ही उखाड़ लेगा कानून पर भरोसा करके?
ऊपर से तमाम शिकायतें भी करके गया है अपने सुसाइड नोट में…
मतलब ये भी कोई तरीका है अपनी पत्नी को बदनाम करने का?
उसका पिता ब्रेन हैमरेज से मर गया.. ज़रूर अतुल ने उसके कपार में कुछ खोंस दिया होगा.. तभी तो निकिता बोल रही है कि पति ने मारा है पिता को..
पति वहां पर नहीं था, हो सकता है ड्रोन से हमला करवा दिया हो तभी पिता मर गए हों. अरे बिना जाँचे कैसे पता चलेगा किसने मारा है? सही FIR की है बेटी ने.
वैवाहिक हिंसा के लिए ४९८अ होता है, और DV एक्ट भी होता है. एक ही जुर्म के लिए दोनों का प्रयोग उसने कर दिया तो क्या जुर्म किया भाई? जब देश की लाखों महिलायें यही कर रही हैं तो सही ही कर रही होंगी.
DV एक्ट अगर मारपीट के लिए है तो वैसी ही धाराएँ ३२३, ५०४, ५०६ भी हैं. यहाँ भी दोहरा केस कर दिया तो कौन सा पहाड़ टूट पड़ा? बस इसीलिए किया होगा कि अगर गलती से एक केस में अन्याय हो जाए और पति बरी हो जाए तो दूसरे में वो फंसे और पत्नी को न्याय मिल सके.

अंत में राष्ट्रपति जी से गुज़ारिश करूंगा कि जज कौशिक जी को भारत रत्न पुरस्कार दिया जाये, पत्नी निकिता को रायसीना हिल्स में आजीवन आवास सुविधा दी जाये. पति को मिलने वाली जीवन भर की सैलरी के बराबर पारितोषक दिया जाये. और उसपर आत्महत्या के लिए उकसाने जैसी वाहियात FIR कभी न की जाए.
– भारतीय लीगल सिस्टम का एक प्रशंसक पत्रकार कन्हैया शुक्ला!



Raj Mishra
December 11, 2024 at 6:27 pm
भारतीय पुरुष को कोई अधिकार नही है, कि वह अपना सुखी विवाहित जीवन व्यतीत कर सके, हमारे कानून मे ऐसी कोई व्यवस्था नही है कि पुरुष को निदोॅश करार दिया जाये
Dr Naveen
December 11, 2024 at 8:39 pm
Same situation is facing so many husbands. Wives are thinking that she s winner….but actually these devils loose their inner(soul)….Indian democratic system is best in world but justice is worst in the world…
Satyapal Singh
December 12, 2024 at 10:42 pm
Waqt a Gaya sanvidhan Ko jalane Ka Sabhi bhaiyon se gujarish hai Har Jila Court ke bahar sanvidhan Dahan kiya jaaye Doctor bheemrav Ambedkar dwara likhe Gaye sanvidhan ki Ab Koi value Nahin Hai family court ke jahil jaj Apna naya sanvidhan Lekar Baithe Hain Jo ki UN jahil jajon ke jahil man Baap Ne likha hai jinmen ine jajon ki man koi randi aur Veshya hi Hogi Jinse neech Paida hue hain