विश्व दीपक-
मंडल ही कमंडल है- यह डिस्कोर्स चलता रहेगा. द ग्रेट दशरथ मांझी के शब्दों में कहूं तो जब तक तोड़ेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं. आज बात अपने गौतम भाई अडानी और इंडिया गठबंधन की.
हरियाणा और महाराष्ट्र में इंडिया गठबंधन की हार हुई. हार से सबसे ज्यादा नुकसान किसका हुआ? कांग्रेस का. हार का जिम्मा किसका? कांग्रेस का. यूपी, बंगाल, बिहार के घटक दलों का नुकसान हुआ? नहीं. अधिक से अधिक मनोबल का नुकसान हुआ. यह कह सकते हैं.
क्या ममता बनर्जी, लालू यादव, रामगोपाल यादव यानी तृणमूल कांग्रेस, राजद और समाजवादी पार्टी का हरियाणा, महाराष्ट्र में कोई स्टेक था? नहीं. फिर इंडिया गठबंधन के अंदर नेतृत्व का सवाल उठाने की वजह क्या है?
जवाब हैं गौतम भाई अडानी. ममता दीदी ने इंडिया गठबंधन के नेतृत्व पर सवाल उठाया. लालू जी ने उनका समर्थन किया. आज दीदी ने लालू को थैंक्यू भी बोल दिया.
बात यह है कि अडानी के 2000 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार पर कोई सवाल नहीं उठाना चाहता. कई कारण हैं- पहला यह कि इन पार्टियों के कई नेता खुद भ्रष्टाचार के आरोपी हैं. कई जेल भी जा चुके हैं. दूसरा- भारत की जनता के लिए भ्रष्टाचार कोई मुद्दा नहीं. यह बात ये समझते हैं. तीसरा-निवेश से लेकर भाई-भतीजों, चेले-चापड़ों की नौकरी का जुगाड़ भी अडानी से करवाना है. इसलिए सब चुप हैं.
आपने नोटिस किया होगा कि कुछ समय पहले तक अडानी के खिलाफ जोर-शोर से बोलने वाली टीएमसी की महुआ मोइत्रा आजकल खामोश हैं. महुआ की खामोशी और दीदी की वाचालता में सीधा संबंध है.
किसी देश में मात्र टेंडर हासिल करने के लिए 2000 करोड़ की घूस देना मामूली बात नहीं लेकिन विपक्ष का कोई नेता/पार्टी इस पर सवाल नहीं करना चाहता. सिर्फ़ राहुल अकेले लड़ रहे हैं. चूंकि राहुल गांधी, अडानी के भ्रष्टाचार का मुद्दा छोड़ना नहीं चाहते, सहयोगी दलों ने इंडिया गठबंधन में नेतृत्व परिवर्तन की बात शुरू कर दी.
राहुल की राजनीति ममता, लालू, मुलायम की पार्टी के नेताओं को पसंद नहीं आती. यहां तक कि कांग्रेस के लोगों को भी पसंद नहीं आती. लेकिन राहुल भी द ग्रेट दशरथ मांझी की तरह अकेले ही पहाड़ काटने निकला है. उम्र उसके साथ है. स्वास्थ्य उसके पास है. एक दिन पहाड़ काटकर रास्ता बना ही लेगा.


