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सियासत

मरने के बाद भी मनमोहन सिंह को दो गज जमीन नसीब नहीं, मोदी सरकार की अड़ंगेबाजी निंदनीय!

बोधिसत्व-

मनमोहन जी को दो गज जमीं भी ना मिली कू ए यार में! जैसा व्यवहार अंतिम बादशाह बहादुर शाह जफर के साथ अंग्रेजों ने किया वैसा व्यवहार मोदी एंड कंपनी डॉ. मनमोहन सिंह जी के साथ कर रही है! भारत की राजधानी में मनमोहन जी की स्मृति का कोई स्थान देने में कष्ट हो रहा है! जैसे मुल्क और उसकी राजधानी बीजेपी सरकार की बपौती है?

यह ओछी हरकत कब तक? यह अपमान का खेल कब तक? पढ़िए भाई राकेश पाठक जी की पोस्ट!


डॉ राकेश पाठक-

डॉ. मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार निगम बोध घाट पर होगा. दस साल प्रधानमंत्री रहे डॉ. मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार राजधानी दिल्ली में निगम बोध घाट पर होगा। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस बारे में सूचना जारी कर दी है।

कांग्रेस ने सरकार के इस निर्णय को पूर्व प्रधानमंत्री का अपमान बताया है।

पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने आज ही प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से फोन पर बात की फिर पत्र लिख कर मनमोहन सिंह के अंतिम संस्कार के लिए विशेष स्थान आवंटित करने की मांग की थी।

पार्टी ने कहा था कि जहां अंतिम संस्कार होगा वहां पार्टी स्मारक बनाएगी।

सरकार ने कांग्रेस की मांग को अनसुना करके निगम बोध घाट पर अंतिम संस्कार तय कर दिया।

सरकार के इस फैसले के बाद सांसद प्रियंका गांधी ने कहा है कि पार्टी मनमोहन सिंह का अंतिम संस्कार करने लिए शक्ति स्थल या वीर भूमि में स्थान देने को तैयार है।

इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा है कि किसी भूतपूर्व प्रधानमंत्री का अंतिम संस्कार निगम बोध घाट पर करने का निर्णय किसी सरकार ने लिया हो।

मोदी सरकार के इस निर्णय की चौतरफ़ा आलोचना हो रही है।

उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई का अंतिम संस्कार राजघाट के पास किया गया था। वहां सात एकड़ में ‘सदैव अटल’ नाम से स्मारक बना है।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में राजघाट राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्रियों (पूर्व या पद पर) के अंतिम संस्कार के लिए निर्दिष्ट स्थान है। इसके बावजूद मोदी सरकार मनमोहन सिंह के अंतिम संस्कार के लिए वहां स्थान नहीं दे रही है।



डॉ मुकेश कुमार-

सवाल उठता है कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का निगमबोध घाट पर अंतिम संस्कार करने की टुच्ची हरकत क्यों की गई?

ज़ाहिर है कि ये फ़ैसला निचले स्तर पर किसी अधिकारी ने तो किया नहीं होगा। ऐसे फ़ैसले सर्वोच्च स्तर से होते हैं।

तो अगर सर्वोच्च स्तर पर ये फ़ैसला हुआ तो उस सर्वोच्च नेतृत्व की मानसिकता क्या निम्न स्तर की है?

ऐसे मौक़े हैं जब फ़ैसला लेने वालों के दिल दिमाग़ की परीक्षा होती है। इस परीक्षा में सर्वोच्च नेतृत्व बुरी तरह से फेल हो गया है।

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