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रुबिका लियाकत, प्रेम शुक्ला और मनोज काका के बीच कुछ हुआ है क्या? देखें वीडियो

क्रांति कुमार-

रुबिका लियाकत कल तीन गलती की. पहली गलती जब बीजेपी के प्रेम शुक्ला ने सपा नेता को बिजली चोर – बकरी चोर कहा,

तब रुबिका लियाकत के मुंह में दही जम गया था.

दूसरी गलती जब प्रेम शुक्ला ने मनोज काका को इसकी अहिराई और भैंस का पिछड़वा धोने वाला कहा,

तब भी रुबिका लियाकत के मुंह में दही जमा रहा.

लेकिन जैसे ही मनोज काका एक्शन मोड में आए और प्रेम शुक्ला को धोने लगे.

इसके बाद रुबिका लियाकत के मुंह का दही पिघल गया. दही पिघलते ही रुबिका लियाकत प्रेम शुक्ला का बचावकर्मी बनकर बचाव करने लगी.

मनोज काका ने रुबिका लियाकत को दलाल पत्रकार की उपाधि से सम्मानित कर दिया.

अब रुबिका लियाकत ने मनोज काका का माइक स्लो करवा दिया और अपना माइक लाउड करके पागलों की तरह चिल्लाने लगी.

आज कल के एंकर इस तरह सामने वाला का माइक स्लो करके खुद का माइक लाउड कर चिल्लाते हैं. ये SCAM है.

देखें वीडियो-

https://x.com/yashbhadas/status/1873009803376927117?s=46

https://x.com/pankaja2y/status/1872862216963117071?s=46

https://x.com/manojsinghkaka/status/1872626902373917132?s=46

https://x.com/the_gaharwar/status/1872926610216915258?s=46


राजीव राय-

आदरणीया रुबिका लियाकत जी “पोंगा पंडित”का मतलब होता हैं-“वो पंडित (ब्राह्मण) जिसको कोई ज्ञान ना हो,क्योंकि पंडित का मतलब विद्वान भी होता हैं” और जो ब्राह्मण अज्ञानी हो उसे सामान्य बोलचाल में ये भाषा पूर्वांचल में बोली जाती है

वैसे आम बोलचाल है में हमारे यहाँ पोंगा किसी भी वेवकूफ या अज्ञानी को कहा जाता हैं, जैसे-

पोंगा पत्रकार या पोंगा मास्टर भी हो सकता है,

आपको ग़ुस्सा या टोकना तब याद नहीं आया जब तक वो भाजपा प्रवक्ता जिसे पोंगा प्रवक्ता भी कह जा सकता है ,

उसने मनोज सिंह काका को शुरू से ही अहीर शब्द के साथ अन्य घटिया संबोधन भी करने लगा?

तब आप सुनती रही,और जबाब में मनोज ने उसे बेवक़ूफ कह दिया को आप को इतना ग़ुस्सा? क्या साबित करना चाहती थी आप?

आत्म चिंतन करिएगा ज़रूर!


विवेक कुमार-

बहुजन समाज व सामाजिक न्याय की बुलंद आवाज सपा प्रवक्ता मनोज सिंह ‘काका’ गाँव-देहात से जुड़े जमीनी नेता हैं।

मनोज सिंह ‘काका’ अपनी विनम्रता, सौम्यता, तार्किक व वैज्ञानिक दृष्टिकोण की वाक्य पट्टूटा के लिए जाने जाते हैं।

काका का बीजीपी प्रवक्ता प्रेम शुक्ला के वाहियात टिप्पणी पर उनको पोंगा पण्डित बोलना एंकर रुबिका लियाक़त को तकलीफ दे गया किसी पिछड़े, दलित व्यक्ति को भाजपा के प्रवक्ता द्वारा बिजली चोर, अहीर, भैस का पिछवाड़ा साफ करने वाला बोलना कोई समस्या नहीं है।

सामंती मनुवादी पोंगा पंडितों को लगता है कि वह कुछ भी बोलेंगे बहुजन समाज चुप रहेगा जवाब नहीं देगा लेकिन यह बाबा साहब के संविधान का युग है आपके हर सवाल का जवाब दिया जायेगा।


अनुज यादव-

Manoj Kaka ने केवल पोंगा पंडित कहा. पोंगा पंडित जातिसूचक शब्द नही है. पोंगा यानी अज्ञानी अब अगर अज्ञानी को अज्ञानी कह दिया तो इसमें जाति सूचक क्या है…??

Prem Shukla : अच्छा तेरी अहिराई चालू हो गयी. भैंस का पिछवाड़ा धोना शुरू कर, इसकी अहिराई तो देखिए.

पोंगा पंडित तो आए दिन इस्तेमाल होने वाला आम बोलचाल का शब्द है, इस तरह तो से दिन इनकी भावनाएं आहत होंगी, और फिर ये किसी भी जाति को अपमानित करते रहेंगे

प्रेम शुक्ला (BJP प्रवक्ता) ने मनोज काका, पर जातिसूचक टिप्पणी कर पूरे बहुजन समाज का अपमान किया है. पूरे अहीर समाज का अपमान किया है.

प्रेम शुक्ला की जातिसूचक टिप्पणी बता रही है. इस देश में कोई HINDU नहीं है. सब मनु महाराज की बनाई जातियों में विभाजित हैं.


परमिंदर अम्बर-

मनोज सिंह काका जी सिर्फ़ प्रवक्ता नहीं हैं. वह जमीन पर काम करने वाले लीडर भी हैं.

उनके पास भाषा है, काबिलियत है, बेहद, विनम्र और सौम्य व्यक्ति हैं.

किसी पिछड़े, दलित व्यक्ति को भाजपा के प्रवक्ता द्वारा बिजली चोर, अहीर आदि बोलना क्या दर्शाता हैं.

इन पोंगा पंडितों ने मेहनतकशों के कामों को गाली बना दिया है.

यह अंबेडकर का भारत है, यहाँ मनुवाद और ब्राह्मणवाद को कुचल दिया जाएगा.

जिन सामंती लोगों को लगता है कि वह कुछ भी बोलेंगे बहुजन समाज चुप रहेगा. अब ऐसा होने वाला नहीं है.


ए के स्टालिन-

पाल, गड़रिया और अहीर को भेड़, बकरी, भैंस चराने वाला कहने वाले लोग कौन हैं, भाई?

मौर्य, कुशवाहा और शाक्य को सब्जी बेचने वाला कहने वाले लोग कौन हैं, भाई?

जाटव समाज को चमड़ा उतारने वाला कहने वाले लोग कौन हैं, भाई?

कुर्मी को जमीन जोतने-गोड़ने वाला बताने वाले लोग कौन हैं, भाई?

चौहान, लोहार और लोनिया को लोहे का काम करने या लोहा पीटने वाला कहने वाले लोग कौन हैं, भाई?

राजभर को दारू बनाने वाला बताने वाले लोग कौन हैं, भाई?

धोबी को केवल कपड़ा धोने वाला समझने वाले लोग कौन हैं, भाई?

वाल्मीकि समाज को सिर्फ सफाई कार्य के लिए मानने वाले लोग कौन हैं, भाई?

कहार और निषाद को नाव चलाने वाला बताने वाले लोग कौन हैं, भाई?

नाई समाज को सिर्फ बाल काटने और शादी-ब्याह कराने वाला कहने वाले लोग कौन हैं, भाई?

कोरी समाज को केवल बुनाई और कपड़ा बनाने वाला समझने वाले लोग कौन हैं, भाई?

कुम्हार को सिर्फ मिट्टी के बर्तन बनाने वाला कहने वाले लोग कौन हैं, भाई?

ताम्रकार को केवल बर्तन बनाने वाला बताने वाले लोग कौन हैं, भाई?

बनिया समाज को सिर्फ पैसा गिनने और व्यापार करने वाला मानने वाले लोग कौन हैं, भाई?

गौड़ और परिहार को केवल अपने गांव के पहरेदार बताने वाले लोग कौन हैं, भाई?

आखिर ये सोच और ये धारणाएं किसने बनाई और क्यों बनाई गईं?

हर समाज का काम महत्वपूर्ण है। ये वर्गीकृत सोच हमारे समाज की प्रगति में सबसे बड़ी रुकावट है। हमें इसे चुनौती देनी होगी और हर व्यक्ति, हर काम और हर समुदाय को सम्मान देना होगा।

जय भीम!
जय समानता!
जय संविधान!


मयंक मौर्य-

सपा प्रवक्ता मनोज सिंह ‘काका’

यूपी के चंदौली जनपद के महुरा ग्राम के एक बेहद साधारण परिवार मे जन्में मनोज सिंह काका आज प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा नाम बनकर उभरे हैं।

कल इनसे बीजेपी का एक प्रवक्ता जातिसूचक टिप्पणी की,
जिसके बाद ये उसकी जबरजस्त रगड़ाई की.

मनोज सिंह काका पिछड़े समाज के यादव जाति से आते है,

इसलिए इन पर ऐसे टिप्पणियां कर के बीजेपी वाले अपनी संस्कार दिखाए लेकिन उसको अंदाजा नहीं था ये मनोज काका तुरंत उसकी हेकड़ी बंद कर देगा.

उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा गांव के हीं प्रथामिक विद्यालय में ही हुई थ

इनके पास 4 से अधिक डिग्री है

इन्होंने समाजवादी पार्टी को ज्वाईन किया और 2010 में उन्होंने सपा के राष्ट्रीय सचिव रहें, वे इस पद पर 2010 से 2012 तक रहें। 2013 में उन्हें सपा का प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया।

छात्र राजनीति में रहने के दौरान उनका संपर्क समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से हुआ। ऐसा कहा जाता है कि वह अखिलेश यादव के खास हैं और उनकी युवा टीम में भरोसेमंद भी हैं।

आप को बतादें कि मनोज काका बेहद साधारण परिवार में जन्म लेने के बाद भी जनता की सेवा करना ही चाहा। उनके पास तमाम प्रकार की डिग्रिया होने के बावजुद भी कोई भी एमएनसी या सरकारी नौकरी में जाना नही चाहा। उन्होंन आराम की जिंदगी को तिलांजली देकर समाजिक जिंदगी ही जीना चाहा। और जनता के सुख दुख में हमेशा साथ रहना ही चाहा।

काका ने जनसेवा को ही सर्वोपरी रखा। बेहद शांत और शौम्य दिखने वाले काका जनता के साथ मिलकर अनेक प्रकार के धरना-प्रदर्शन की अगुवाई भी की। और अपने जोशीले भाषण से युवाओं में काफी लोकप्रिय भी रहे हैं।

उन्होने किसान आंदोलन से लेकर छात्र आंदोलन में काफी जोर-शोर से भाग लिया और सरकार को झुकने पर मजबुर कर दिया था।


https://x.com/samarraj_/status/1872682169577214193?s=46

https://twitter.com/samarraj_/status/1872682169577214193?s=46
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