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गोडसे ने गांधी को मार दिया… यह लिखने से टाइम्स ऑफ इंडिया को डर क्यों लग रहा है!

मंजुल-

Passed away? How did he pass away, ToI? In his sleep? Are you too scared to say he was killed by a member of the order ruling today?

(निधन हो गया? हे टाइम्स ऑफ़ इंडिया, उनका कैसे निधन हुआ? क्या नींद में? या आपको ये कहने में डर लग रहा है कि आज सत्ता में बैठी पार्टी के एक सदस्य द्वारा मार डाले गए?)


दयाशंकर मिश्रा-

नया इतिहास ऐसे ही लिखा जाता है। भारत के सबसे बड़े अंग्रेज़ी अख़बार ने लिख दिया है, गांधी की मौत हुई थी। पहले कोर्स की किताबों से गांधी की हत्या हटायी गई। अब हत्या को मौत में बदल दिया गया।स्मृतियों को ऐसे ही ख़त्म किया जाता है। एक बार स्मृति ख़त्म हो गई, उसके बाद दिमाग़ में जो चाहे भर सकते हैं।

गांधी के जीवन के अंतिम दृश्य के बारे में मनुबेन ने लिखा है, बस एक पैराग्राफ़ है। उन लोगों को पढ़ाना चाहिए, जो टाइम्स ऑफ़ इंडिया का सच मानकर पढ़ेंगे। याद रखेंगे। गांधी, अम्बेडकर और नेहरू हर रोज़ नई शक्ति से मिटाए जा रहे हैं। नए नायक वाट्सएप से निकलकर किताबों और आपके दिमाग़ में जगह ले चुके हैं।

अगर ऐसा नहीं होता तो आज टाइम्स ऑफ़ इंडिया के सामने प्रदर्शन होता। ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा होता। टेलिविज़न में बहस होती । ऐसा कुछ नहीं हुआ। जब समाज, देश नायकों की विरासत नहीं बचा सकते वह तानाशाही के लिए सबसे मुफ़ीद होते हैं। मनुबेन का अंतिम दृश्य अशोक कुमार पांडे की किताब उसने गांधी को क्यों मारा से साभार।

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