नई दिल्ली | सोशल मीडिया दिग्गज फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा ने भारत के केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव से माफी मांगी है। यह माफी मेटा के सीईओ मार्क जुकरबर्ग द्वारा भारत के 2024 के आम चुनावों को लेकर दिए गए एक विवादित बयान के बाद आई है।
13 जनवरी 2025 को केंद्रीय सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर जुकरबर्ग के बयान का खंडन करते हुए इसे “भ्रामक” और “तथ्यों से परे” करार दिया।
दरअसल, जुकरबर्ग ने जो रोगन एक्सपीरियंस पॉडकास्ट में यह दावा किया था कि 2024 के चुनावों में COVID-19 के बाद वैश्विक स्तर पर अधिकांश सत्तारूढ़ सरकारें सत्ता से बाहर हो गईं। उन्होंने गलती से भारत को भी इस प्रवृत्ति का हिस्सा बता दिया।
वैष्णव ने जुकरबर्ग के दावे को खारिज करते हुए कहा कि 2024 के आम चुनावों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने भारी बहुमत हासिल किया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार सत्ता में वापसी की।
उन्होंने मोदी सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार ने 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन, 2.2 अरब मुफ्त टीके, और COVID-19 के दौरान वैश्विक सहायता प्रदान की। इसके साथ ही भारत ने विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का दर्जा बनाए रखा।
मेटा की माफी- अश्विनी वैष्णव के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए मेटा इंडिया के पब्लिक पॉलिसी डायरेक्टर शिवनाथ ठुकराल ने X पर माफी जारी की। ठुकराल ने स्वीकार किया कि जुकरबर्ग द्वारा 2024 के चुनावों में कई देशों में सत्ता विरोधी लहर की बात करना सही था, लेकिन भारत के संदर्भ में यह गलत था।

उन्होंने इस ‘अनजाने में हुई गलती’ के लिए माफी मांगी और लिखा, “भारत मेटा के लिए बेहद महत्वपूर्ण देश है, और हम इसके डिजिटल भविष्य का अभिन्न हिस्सा बनने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
निशिकांत दुबे को भी आपत्ति- प्रकरण में, भाजपा सांसद और संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति के प्रमुख निशिकांत दुबे ने मेटा पर भारत की छवि “धूमिल” करने का आरोप लगाया और मेटा से माफी की मांग की। उन्होंने कहा कि स्थायी समिति जल्द ही मेटा को तलब करेगी।


