अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करते ही डोनाल्ड ट्रंप ने 6 जनवरी 2021 को कैपिटल हिल दंगों के दोषी 1500 लोगों को क्षमादान देकर एक विवादास्पद कदम उठाया। इस फैसले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के माफीनामों से राजनीतिक हिंसा को प्रोत्साहन मिल सकता है।
इसके अतिरिक्त, ट्रंप ने गर्भपात विरोधी प्रदर्शनकारियों और 2020 में एक अश्वेत व्यक्ति की मौत के मामले में दोषी ठहराए गए दो पुलिस अधिकारियों को भी माफी दी है।
वाशिंगटन पोस्ट की संपादकीय नीति पर सवाल
वाशिंगटन पोस्ट ने अपने एक संपादकीय में ट्रंप और उनके पूर्ववर्ती जो बाइडेन द्वारा दिए गए क्षमादानों की तुलना की। इसमें बाइडेन के ‘संदिग्ध क्षमादानों’ को ट्रंप के कैपिटल हिल दंगा दोषियों को दिए गए माफीनामों के साथ रखा गया। इस तुलना पर पुलित्जर पुरस्कार विजेता और वाशिंगटन पोस्ट के वरिष्ठ पत्रकार डेविड मैरानिस ने कड़ी आपत्ति जताई।
ब्लूस्काई पर लिखते हुए मैरानिस ने कहा, “वाशिंगटन पोस्ट का यह संपादकीय पूरी तरह अनुचित है। बाइडेन के संदिग्ध क्षमादानों की तुलना 6 जनवरी के दंगा दोषियों को दिए गए माफीनामों से करना न्यायोचित नहीं है। जिस अखबार का मैं 48 सालों से हिस्सा हूं, उसने अपनी आत्मा खो दी है।”
विशेषज्ञों की चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के इस कदम से कट्टरपंथी समूहों का मनोबल बढ़ सकता है और यह भविष्य में और अधिक राजनीतिक हिंसा को जन्म दे सकता है। वहीं, बाइडेन प्रशासन द्वारा दिए गए क्षमादानों को ‘राजनीति से प्रेरित मुकदमों’ से सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को बचाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
बाइडेन प्रशासन ने पूर्व महामारी सलाहकार एंथनी फौसी, रिटायर्ड जनरल मार्क, और कैपिटल हिल हमले की जांच करने वाली यूएस हाउस कमेटी के सदस्यों को भी क्षमा दी थी।
समाज में बढ़ते ध्रुवीकरण की चेतावनी
राजनीतिक विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि ट्रंप का यह कदम अमेरिकी समाज में ध्रुवीकरण को और बढ़ा सकता है। इसके अलावा, कुछ विशेषज्ञ इसे ट्रंप द्वारा अपने समर्थकों को खुश करने और राजनीतिक आधार मजबूत करने की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रंप का यह फैसला उनकी प्रशासनिक प्राथमिकताओं और अमेरिकी राजनीति के भविष्य को लेकर नई बहस को जन्म दे रहा है।


