सुप्रीम कोर्ट ने सहारा कंपनियों की याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने 10 लाख रुपये के जुर्माने वाले आदेश को वापस लेने की मांग की थी। यह जुर्माना सहारा समूह की कंपनियों पर लगाया गया था, जो निवेशकों को धन वापस करने के संबंध में कोर्ट के आदेशों का पालन करने में विफल रही थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कंपनियों ने अपने दायित्वों को पूरा करने में लगातार लापरवाही दिखाई है, और इसलिए जुर्माने को बरकरार रखा जाएगा। यह मामला सहारा समूह और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) तथा सेबी (SEBI) के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद का हिस्सा है।
मामले का बैकग्राउंड क्या है?
- निवेशकों से जुड़ा विवाद: सहारा समूह ने करोड़ों निवेशकों से पैसा जुटाया था, लेकिन उन्हें उनका धन वापस करने में विफल रहा।
- सेबी का हस्तक्षेप: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सहारा समूह के खिलाफ कार्रवाई की और कोर्ट में मामला दायर किया।
- सुप्रीम कोर्ट का आदेश: सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह को निवेशकों का पैसा वापस करने का आदेश दिया था, लेकिन कंपनी ने इसे पूरा करने में देरी की।
10 लाख रुपये का जुर्माना
- सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह पर 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था, क्योंकि उन्होंने कोर्ट के आदेशों का पालन करने में लापरवाही दिखाई।
- सहारा समूह ने इस जुर्माने को वापस लेने के लिए याचिका दायर की, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।
कोर्ट की टिप्पणी
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सहारा समूह ने निवेशकों के हितों की अनदेखी की है और कोर्ट के आदेशों का पालन करने में गंभीरता नहीं दिखाई।
- कोर्ट ने यह भी कहा कि कंपनी को अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए गंभीर प्रयास करने चाहिए।
भविष्य की कार्रवाई
- सहारा समूह को अब निवेशकों का पैसा वापस करने के लिए और अधिक गंभीरता से काम करना होगा।
- सेबी और आरबीआई इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं और भविष्य में और कार्रवाई की जा सकती है।
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