गाजियाबाद | मुरादनगर में एक कथित पत्रकार के खिलाफ धोखाधड़ी और धमकी का मामला सामने आया है। आरोपी ने खुद को पत्रकार बताकर एक महिला को झांसे में लिया और मुकदमे से गंभीर धाराएं हटवाने के नाम पर 80 हजार रुपये ऐंठ लिए। लेकिन जब मामला अदालत में पहुंचा और पुलिस ने चार्जशीट में वही धाराएं बरकरार रखीं, तो महिला को ठगी का एहसास हुआ।
कैसे जाल में फंसी पीड़िता?

पीड़िता के मुताबिक, उनके खिलाफ हत्या के प्रयास (धारा 307) का मुकदमा दर्ज था। गिरफ्तारी के बाद जमानत पर छूटी महिला को एक शख्स ने पत्रकार होने का दावा करते हुए संपर्क किया। उसने भरोसा दिलाया कि पुलिस से उसकी गहरी सेटिंग है और वह चार्जशीट से धारा हटवा सकता है। इसके बदले में उसने 80 हजार रुपये लिए।
धारा बरकरार रही, तो खुली पोल
टीवी9 की वेबसाइट में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, कुछ समय बाद जब पीड़िता को पता चला कि पुलिस ने हत्या के प्रयास की धारा हटाने के बजाय उसी में चार्जशीट दाखिल कर दी है, तो उसने आरोपी से संपर्क कर पैसे वापस मांगे। पहले तो आरोपी उसे बरगलाने लगा, लेकिन जब महिला ने दबाव डाला तो उसने जान से मारने की धमकी दे दी।
फर्जी पत्रकार निकला ठग
पीड़िता ने जब आरोपी की पड़ताल की, तो सामने आया कि वह किसी भी मीडिया संस्थान से जुड़ा नहीं है और न ही उसके पास पत्रकारिता की कोई डिग्री है। दरअसल, वह सिर्फ लाइजनिंग और सेटिंग के नाम पर लोगों से पैसे ऐंठने का काम करता था।
पुलिस जांच में जुटी
महिला की शिकायत पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपी की तलाश की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार कर इस पूरे फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया जाएगा।
बड़ा सवाल: पत्रकारिता के नाम पर क्यों फल-फूल रहे ठग?
इस मामले ने फिर से एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—पत्रकारिता की आड़ में ठगों का यह खेल कब तक चलेगा? बिना किसी मान्यता या संस्थान से जुड़े लोग खुद को पत्रकार बताकर कैसे लोगों को गुमराह कर रहे हैं? ऐसे मामलों पर सख्ती से लगाम लगाने की जरूरत है, ताकि मीडिया की साख पर सवाल न उठे और जनता ऐसे फर्जी पत्रकारों के चंगुल में न फंसे।


