मनोज अभिज्ञान-
यूक्रेन सिर्फ युद्ध का मैदान नहीं, बल्कि खरबों डॉलर की खनिज संपदा का खजाना है, जिस पर अमेरिका की पैनी नजरें टिकी हुई हैं। आज अमेरिका के प्रतिष्ठित समाचार पत्र ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ में ख़बर प्रकाशित हुई है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की को अमेरिका द्वारा खनिज सौदे पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। ट्रम्प प्रशासन, यूक्रेन के खनिज संसाधनों पर अधिकार प्राप्त करने के लिए निरंतर दबाव बना रहा है।
ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट द्वारा कीव में प्रस्तुत प्रस्ताव को ज़ेलेंस्की ने पहली बार अस्वीकार कर दिया था, जिससे ट्रम्प ने यूक्रेनी नेतृत्व की आलोचना शुरू कर दी। ज़ेलेंस्की ने ट्रम्प पर भ्रम के बुलबुले में रहने का आरोप लगाया, जिसके जवाब में ट्रम्प ने उन्हें तानाशाह कह दिया।
वॉल स्ट्रीट जर्नल में प्रकाशित ख़बर के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज ने फॉक्स न्यूज़ पर ज़ेलेंस्की से कहा कि उन्हें समझौते पर हस्ताक्षर करने चाहिए। हालांकि, ज़ेलेंस्की ने कहा कि वह किसी भी प्रस्ताव के लिए तैयार हैं, लेकिन इसे और अधिक स्पष्ट करने की आवश्यकता है। बेसेंट ने प्रस्तावित सौदे को ज़ेलेंस्की के सामने रख दिया और दबाव डालते हुए कहा कि इसे हस्ताक्षर करना आवश्यक है, जिससे यूक्रेनी राष्ट्रपति आश्चर्यचकित रह गए। ज़ेलेंस्की ने इस पर चर्चा करने की बात कही, लेकिन बिना विचार-विमर्श के हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।
यूक्रेन के पास यूरोप के सबसे बड़े टाइटेनियम और लिथियम भंडार हैं, जिनका उपयोग एयरोस्पेस और बैटरी उद्योग में किया जाता है। इसके अलावा, यूक्रेन के पास दुर्लभ खनिज भी हैं, जो रक्षा और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों में महत्वपूर्ण हैं। अमेरिकी प्रस्ताव के अनुसार, अमेरिका को यूक्रेन के खनिजों का 50% हिस्सा चाहिए था, लेकिन इसमें कोई सुरक्षा गारंटी शामिल नहीं थी। ज़ेलेंस्की ने इस प्रस्ताव को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि “मैं अपने देश को नहीं बेच सकता।” उन्होंने यह भी कहा कि यदि अमेरिका सुरक्षा गारंटी प्रदान करता है, तो वह किसी सौदे पर चर्चा के लिए तैयार हैं।
यूक्रेन के मुख्य सहयोगी के रूप में अमेरिका ने लगभग 100 बिलियन डॉलर की सैन्य और वित्तीय सहायता प्रदान की है, लेकिन ट्रम्प प्रशासन अब इसके बदले 500 बिलियन डॉलर मूल्य के खनिज संसाधन मांग रहा है। ज़ेलेंस्की ने इस मांग को अत्यधिक बताते हुए कहा कि वह एक आर्थिक और सुरक्षा साझेदारी के लिए तैयार हैं, लेकिन यह समझौता पारस्परिक रूप से लाभकारी होना चाहिए।
इस बीच, रूस भी इस स्थिति का लाभ उठाने की कोशिश कर रहा है। एक रूसी सरकारी थिंक टैंक ने क्रेमलिन को सुझाव दिया कि वे अमेरिकी कंपनियों को रूस-नियंत्रित यूक्रेनी क्षेत्रों में खनिज अधिकार प्रदान करें। यूक्रेन वर्तमान में रूस के आक्रमण को रोकने के लिए अमेरिका पर निर्भर है, लेकिन वाशिंगटन और कीव के बीच बढ़ते तनाव से सहयोग में गिरावट का खतरा पैदा हो गया है। ट्रम्प प्रशासन के रुख से यह स्पष्ट है कि अमेरिका अब यूक्रेन को दी गई मदद की भरपाई करना चाहता है।
ज़ेलेंस्की और ट्रम्प के संबंध पहले से ही तनावपूर्ण रहे हैं। ट्रम्प के पहले कार्यकाल में, उन्होंने ज़ेलेंस्की पर जो बाइडेन और उनके बेटे हंटर बाइडेन की जांच शुरू करने के लिए दबाव डाला था और 400 मिलियन डॉलर की सैन्य सहायता रोक दी थी। यह मामला सार्वजनिक होने के बाद ट्रम्प पर महाभियोग लगाया गया था, हालांकि उन्हें सीनेट ने दोषमुक्त कर दिया था।
अब, जब अमेरिका और रूस के बीच वार्ता यूक्रेन को शामिल किए बिना हो रही है, तो यह ज़ेलेंस्की के लिए नई चुनौती बन गई है। अमेरिका के साथ इस सौदे को लेकर उठे विवाद ने यूक्रेन को एक कठिन स्थिति में डाल दिया है।


