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उत्तर प्रदेश

यूपी बोर्ड एग्जाम : प्रवेशपत्र से चेहरे के मिलान पर ‘हिजाब’ के बहाने 4 छात्राओं ने परीक्षा क्यों छोड़ दी!

परीक्षा छोड़ने वाली छात्राएं क्या फर्जी थीं?

कैलाश सिंह-

जौनपुर/लखनऊ | सोमवार को पहले दिन यूपी बोर्ड के हाई स्कूल हिन्दी प्रथम पेपर की परीक्षा देने जौनपुर के खेतासराय स्थित सर्वोदय इंटर कॉलेज में हिजाब पहनकर आई चार छात्राओं ने प्रवेश पत्र में लगी फ़ोटो से चेहरे का मिलान कराने से इंकार कर दिया। उन्होंने तोहमत लगाई कि हमारा हिजाब उतरवाया जा रहा है, जबकि जांच करने वाली मुस्लिम महिला कक्ष निरीक्षक बग़ैर कैमरे वाले कामन रूम में छात्राओं के फ़ोटो से उनके चेहरों की पहचान के बाद उन्हें परीक्षा हाल में जाने की अनुमति दे रही थीं।

अजीबोगरीब स्थिति तब पैदा हो गई जब हिजाब पहने चार छात्राएं तेज़ आवाज़ में बोलते हुए हिजाब न उतारने की बात करने लगीं, जबकि उनसे चेहरे के नकाब उठाने को कहा जा रहा था। उनकी बातों से लग रहा था मानो वह किसी को अपना विरोध सुनाते हुए कॉलेज प्रशासन पर दबाव बना रही हों।

यह दीगर है कि उनके अभिभावक निर्धारित मानक की दूरी पर मौजूद थे। उनका दावा था कि छह और लड़कियाँ परीक्षा देने आईं थीं लेकिन केन्द्र पर पहले पहुंचीं चार छत्राओं का हिजाब उतारने की बात उन्हें नागवार लगी। ऐसे में बाकी लड़कियों को उन्होंने वाहन से नहीं उतरने दिया। उन चारों लड़कियों को भी लेकर वह घर चले गए और सोशल मीडिया में बयान दिया कि हिजाब पहने 10 छात्राओं को परीक्षा से वंचित कर दिया गया।

दूसरी ओर कॉलेज प्रशासन का कहना था कि पहले दिन परीक्षा में 20 हिन्दू- मुस्लिम छात्राएं अनुपस्थित रहीं। जबकि इस केन्द्र पर लगभग नौ सौ हाई स्कूल व इंटर के विद्यार्थी नामित हैं। इनमें हाई स्कूल के 441 बच्चे परीक्षा में बैठे जिनमें 120 मुस्लिम छात्राएं शामिल रहीं।

दरअसल, इस घटना का सारा दारोमदार ‘हिजाब’ को लेकर पैदा हुआ। सवाल ये है कि जब इसी परीक्षा में 120 मुस्लिम लड़कियाँ बैठीं तो क्या उन्होंने हिजाब नहीं पहना था? या फ़िर उन्होंने नकाब हटाकर प्रवेश पत्र पर लगी फ़ोटो से चेहरे की तसदीक़ कराने के बाद परीक्षा दी?

परीक्षा कक्षों में लगे कैमरों से दूसरा सवाल ही सही जवाब बन जाता है। फ़िर तो पहले सवाल पर यही संदेह जाहिर हो रहा है कि जिन चार या 10 छात्राओं की परीक्षा छूटी है उनके स्थान पर दूसरी लड़कियाँ हिजाब पहनकर आई थीं! क्योंकि जिस विद्यालय की ये छात्राएं हैं उनके प्रवेश पत्र पर लगी फ़ोटो बग़ैर हिजाब की है। यदि ये संदेह जांच में सच साबित हुआ तो यह नकल करने का पुराना किंतु नायाब तरीका सिद्ध होगा।

उन कथित चार या 10 छात्राओं की परीक्षा छुड़वाने वाले अभिभावकों ने बच्चों के करियर की चिंता किए बग़ैर ‘हिजाब’ उतरवाने के बहाने इस मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की है। जबकि केन्द्र व्यवस्थापक को हिजाब से कोई आपत्ति नहीं है।

विदित हो कि माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश (यूपी बोर्ड) की परीक्षा 24 फरवरी को शुरू हुई। नकल विहीन परीक्षा कराने को राज्य सरकार ने हर केन्द्र पर केंद्राध्यक्ष के अलावा एक सहायक और स्टैटिक मजिस्ट्रेट नियुक्त हैं। कैमरों से लैस केंद्रों से बाहर पुलिस और प्रशासनिक अफ़सर चक्रमण करते हैं। परिसर में नकल की सामग्री जांचने को महिला- पुरुष शिक्षक छात्र, छात्राओं की तलाशी शंका होने पर लेते हैं।

अब यूपी बोर्ड की परीक्षा में सख्ती पूर्ववर्ती कल्याण सिंह की सरकार की तरह होने लगी है। केंद्रों पर केंद्राध्यक्ष के अलावा प्रबन्धन से जुड़े व्यक्ति तक को आने की अनुमति नहीं है।

जौनपुर का सर्वोदय इंटर कॉलेज परिसर 75 साल का स्वर्णिम इतिहास समेटे है। वर्ष 1951 में स्थापित इस कॉलेज के वर्तमान प्रिंसिपल दिनेश कुमार गुप्त हैं। यहां की सहायक केंद्राध्यक्ष श्रीमती फिरदौस हैं, वह नवाब हुसैन गर्ल्स इंटर कॉलेज कलापुर में शिक्षक हैं।

सर्वोदय इंटर कॉलेज से वर्ष 2024 के मार्च में अवकाश ग्रहण करने वाले शिक्षाविद् प्रिंसिपल अनिल कुमार उपाध्याय यहीं के प्रबन्धक हैं। इनके ही परिवार के प्रबन्धन में बीटी बालिका इंटर कॉलेज सेल्फ फाइनेंस पर संचालित है, जहां लगभग 1200 छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। इनमें मुस्लिम छात्राओं की संख्या दो तिहाई है, जिनमें से कई छात्राएं तो बेहतरीन खिलाड़ी हैं। इससे जाहिर है कि यहां के मुस्लिम परिवार अग्रणी सोच रखते हुए अपनी बेटियों को भी शिक्षित करने से गुरेज नहीं करते हैं।

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