अभिरंजन कुमार-
एबीपी न्यूज़ की स्टार एंकर चित्रा त्रिपाठी और हिंदी खबर के संस्थापक संपादक अतुल अग्रवाल दोनों ने 16 वर्ष की शादी के बाद अलग होने का फैसला किया है। यद्यपि किसी की निजी ज़िन्दगी में मेरी रुचि शून्य होती है, लेकिन चूंकि चित्रा ने स्वयं ही सोशल मीडिया के ज़रिए इस सेपरेशन का एलान किया है और अब यह सार्वजनिक चर्चा का विषय है, इसलिए इसपर यह टिप्पणी कर रहा हूं।
चित्रा मुझे एक एंकर व रिपोर्टर के रूप में जहां बहुत ऊर्जावान और प्रतिबद्ध लगती हैं, वहीं मीडिया की कुछ पार्टियों में अतुल अग्रवाल से एकाध मुलाकातें हैं। दोनों की आंतरिक परिस्थितियां वही जानते होंगे, कि विवाह के इतने साल बाद और संतानोत्पत्ति के बाद भी उन्हें क्यों अलग होना पड़ा, लेकिन बाहर से देखते हुए मैं उन दोनों के लिए बहुत दुःखी और उदास महसूस कर रहा हूं। संतान होने के बाद रिश्ते टूटने नहीं चाहिए।
जीवन में बहुत कुछ ऐसा होता रहता है, जो बहुत सुखद नहीं होता, लेकिन मनुष्य को सहनशीलता के इम्तिहान में भी खुद को सिद्ध करके दिखाना होता है। अंतिम सांस तक बहुत सारी अनचाही चीजें पीछा करती रहती हैं हमारा। आखिर क्या-क्या छोड़ते जाएंगे हम?
सारे रिश्ते तोड़े जा सकते हैं, बोझ बन जाएं, जीवन में नकारात्मकता और समस्याएं बढ़ाने लगें, तो तोड़ भी देने चाहिए; लेकिन माता-पिता, सहोदर भाई-बहन, संतानोत्पत्ति के बाद पति-पत्नी और अपनी संतानों से रिश्ते नहीं तोड़ने चाहिए। ये रिश्ते यदि ज़्यादा तकलीफें देने लगें, तो आप थोड़ी दूरी बना लें, परहेज करने लगें, कोई ऐसा रास्ता निकालें, जिससे आपकी पीड़ा कुछ कम हो जाए, लेकिन पूरी तरह से इन रिश्तों को तोड़ें मत।
ऐसा मैं क्यों कह रहा हूं? क्योंकि अगर ये रिश्ते भी धड़ल्ले से टूटने लग जाएंगे, तो मनुष्यता ही ख़त्म हो जाएगी दुनिया से। मनुष्य के भीतर से दया, ममता, करुणा, संवेदनशीलता, सहानुभूति, धैर्य, क्षमा, सहयोग, सह-अस्तित्व, सहिष्णुता जैसे कई उदात्त गुणों का लोप होता चला जाएगा; और स्वार्थ, संकीर्णता, नकारात्मकता, असहिष्णुता, अनुदारता, अधैर्य, संवेदनहीनता, क्रोध, क्रूरता जैसे अमानवीय गुण उसपर हावी होते चले जाएंगे।
यदि हम मनुष्य हैं, तो कुछ त्याग हमें खुद के लिए ही नहीं; घर परिवार, समाज, देश और मनुष्यता की रक्षा के लिए भी करने चाहिए। हो सकता है कई लोग मेरे इस विचार से सहमत नहीं होंगे, लेकिन मेरा अभिमत यही है। धन्यवाद।
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