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सियासत

जब मैं मेल टुडे का संपादक था तब मेरे खिलाफ केजरीवाल, कांग्रेस, स्टालिन और ममता बनर्जी की कार्रवाई पर ‘फ्री स्पीच’ के समर्थक खामोश थे!

वरिष्ठ पत्रकार अभिजीत मजूमदार ने एक ट्वीट किया है। ट्वीट में उन्होंने उस दोहरे रवैये की ओर इशारा किया है जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दे पर अक्सर देखने को मिलता है। उन्होंने अपनी पत्रकारिता के दौरान जिन मुश्किलों का सामना किया, उनका ज़िक्र करते हुए यह बताया कि कैसे अलग-अलग सरकारों और राजनीतिक दलों ने उनके खिलाफ कार्रवाई की।

  1. केजरीवाल प्रकरण: उन्होंने कहा कि जब वे Mail Today के एडिटर थे, तब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अखबार के प्रमोटर को पत्र लिखकर उन्हें हटाने की मांग की थी।
  2. कांग्रेस का लीगल नोटिस: कांग्रेस ने भी उनके एक “निर्दोष” लेख पर उन्हें कानूनी नोटिस भेजा था।
  3. तमिलनाडु सरकार की FIR: उन्होंने यह भी बताया कि चेन्नई में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी और तमिलनाडु पुलिस ने चार अधिकारियों को नोएडा भेजा था, क्योंकि उन्होंने उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर की गई टिप्पणी पर लेख लिखा था।
  4. ममता बनर्जी की कार्रवाई: पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार के दौरान आर. जी. कर मेडिकल कॉलेज में हुए रेप-मर्डर केस के विरोध में हो रहे प्रदर्शनों के समय उनका फोन ब्लॉक करवा दिया गया था।

अभिजीत मजूमदार इस बयान में यह कह रहे हैं कि जब उनके खिलाफ ये सब घटनाएं हुईं, तब तथाकथित “फ्री स्पीच” के समर्थकों ने उनके समर्थन में कुछ नहीं कहा। वे व्यंग्यात्मक रूप से कह रहे हैं कि वे कुणाल कामरा के मामले में हो रही प्रतिक्रियाओं को देखकर दुखी नहीं हैं, क्योंकि जब उनके साथ अन्याय हुआ, तब किसी ने आवाज़ नहीं उठाई।

ये बयान मीडिया और राजनीति के बीच के जटिल संबंधों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर जारी दोहरे मानकों पर सवाल खड़े करता है।

मजूमदार का ट्वीट देखें…

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