यह मामला केरल के कोडाकारा, त्रिशूर का है, जहां 2021 के विधानसभा चुनावों से पहले ₹3.5 करोड़ की लूट हुई थी। इस रकम को कर्नाटक से लाया गया था और इसे कथित रूप से बीजेपी के अलप्पुझा जिला कोषाध्यक्ष के. जी. कार्था को सौंपा जाना था।
पुलिस का दावा:
केरल पुलिस ने अपनी चार्जशीट में कहा कि यह रकम बीजेपी के चुनावी फंड का हिस्सा थी। पुलिस के अनुसार, कोझिकोड के आरएसएस कार्यकर्ता ए. के. धर्मराजन इस पैसे को कर्नाटक से लाए थे। जब उनके ड्राइवर ने इसे पहुंचाने की कोशिश की, तो रास्ते में लूट की घटना हो गई। पुलिस जांच में इस लूट में शामिल 23 लोगों के नाम सामने आए, जिनमें अधिकतर वे थे, जो कथित रूप से लूट में शामिल थे।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) का दावा:
ईडी ने इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत केस दर्ज किया। ईडी का कहना है कि यह पैसा चुनावी फंड नहीं, बल्कि एक संपत्ति खरीदने के लिए था। उनका तर्क था कि लूट की रकम का असली मालिक धर्मराजन था, जिसने इसे एक संपत्ति खरीदने के लिए भेजा था।
बीजेपी की प्रतिक्रिया:
बीजेपी ने इस पूरे मामले से खुद को अलग कर लिया। हालांकि, पुलिस ने बीजेपी के संगठन सचिव गणेशन और राज्य सचिव जी. गिरीशान के नाम भी इस मामले से जोड़े। इस लूट कांड को लेकर पार्टी पर दबाव बढ़ा, लेकिन बीजेपी ने आरोपों को खारिज कर दिया।
थिरूर सतीश का बयान:
इस केस से जुड़ा एक और अहम नाम थिरूर सतीश का है, जो बीजेपी का पूर्व पदाधिकारी था। उसने मीडिया को बताया था कि यह पैसा चुनाव प्रचार सामग्री के नाम पर ऑफिस लाया गया था। बीजेपी ने इस बयान को खारिज करते हुए सतीश को वित्तीय अनियमितताओं के कारण पार्टी से निकाल दिया और आरोप लगाया कि उसके पीछे सीपीएम (कम्युनिस्ट पार्टी) का हाथ है।
विजय अक्षित-
RSS के एक पदाधिकारी एक कार में पैसे लेकर जा रहे थे और कुछ अपराधियों ने पैसे लूट लिए, पुलिस ने अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया और उनके पास से 3.5 करोड़ रुपये बरामद किए।
जब पूछताछ की गई और जांच की गई तो पता चला कि यह हवाला का पैसा था जो RSS को मिला था। अब ED का कहना है कि यह संपत्ति खरीदने के लिए पैसा था। मतलब जाँच से पहले ही ED ने उन्हें क्लीनचिट दे दिया।
जरा सोचिए अगर यह पैसा AAP के किसी नेता के पास मिला होता तो? राष्ट्रवाद के नाम पर सबसे बड़ा लुटेरा RSS है जहाँ अदानी अंबानी भी उसके चौखट पर सर झुकाता है।



