योगगुरू और कारोबारी रामदेव का रूह अफ़जा शरबत पर दिया विवादित बयान गहराता जा रहा है। कल जैसे ही रामदेव का वीडियो सामने आया सोशल मीडिया पर रामदेव को उल्टा-सीधा बकने वालों की बाढ़ आ गई। लोगों का कहना है कि पतंजली और रामदेव अपने नकली प्रोडक्ट की वजह से जेल जाते जाते बचे हैं, बावजूद इसके सुधरने को तैयार नहीं हैं।
नीचे पढ़ें कुछ प्रतिक्रियाएं….
प्रशांत टंडन-
गर्मी का सबसे पुराना साथी रूह अफ़ज़ा: 119 साल से सबसे लोकप्रिय शर्बत है हमदर्द का रूह अफ़ज़ा. बचपन से हर गर्मियों में इसे पीते आये हैं और सबसे बड़ी बात कि इसकी क्वालिटी और स्वाद अभी भी पहले जैसी ही है. गर्व की बात है कि भारत का ये ब्रांड दुनिया भर में गया और ख्याति अर्जित की.
कितने ही शर्बत आये, नकल करने की कोशिश की लेकिन एक भी इसके आस पास नहीं फटक पाया. रामदेव लेटेस्ट नकलची हैं और अपना शर्बत बेचने के लिये नफ़रत का सहारा ले रहे हैं. बिजनेस कीजिये लेकिन क्वालिटी में बराबरी करके – दंगाइयों की भाषा बोलकर नहीं.
ज़्यादा परेशानी हो तो एक गिलास रूह अफ़ज़ा पीजिये – कलेजे में ठंडक पहुचेगी…
रविचंद्र जोशी-
रोगन बादाम शीरीं हमदर्द का उत्पादन। बाबा रामदेव के पतंजलि आयुर्वेद के बादाम का तेल के पैकेट पर बारीक अक्षरों में “ब्लैंड” छपा हुआ है यानी कि मिश्रण….
इसका असर भी अच्छा नहीं है।

आसिफ अली सैय्यद-
अपने गिरेबान में तो झांक लेते सेठ। अपने घटिया और मिलावटी प्रोडक्ट को हमेशा राष्ट्रवाद, गोरक्षा और धर्म के नाम पर बेचने वाले सेठ रामदेव अपना (माल) शरबत बेचने के लिए इस हद तक आ सकते हैं ये पता था।
खुद की थाली में बहत्तर छेद हैं महाराज, इंटरनेट पर तुम्हारे मिलावटी प्रोडक्ट्स की खबरों की लाइन लगी पड़ी है। तुम्हारे घी से लेकर शहद तक, सरसों के तेल से लेकर जैम तक और नमक से लेकर सेना की कैंटीन में सप्लाई किए गए मिलावटी आंवला जूस तक की खबरें मौजूद हैं।
तब भी पतंजलि ने इसी तरह अपने आंवला जूस को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उत्पादों के मुकाबले सेहत के लिए बेहतर बताया था। यही वजह थी कि दिसंबर 2016 को पतंजलि के पांच सैंपल जांच में फेल होने पर तुम्हारी राष्ट्रवाद के नाम पर चल रही दुकान पर 11 लाख रुपए का जुर्माना भी ठोंका गया था।
भारत ही नहीं नेपाल में भी नेपाल के स्वास्थ्य मंत्रालय की जांच में पतंजलि की छः दवाएं टेस्ट में फेल हुई थीं जिनके नाम थे : दिव्या गाशर चूर्ण, बाहुची चूर्ण, आमला चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, अदविया चूर्ण और अश्वगंधा शामिल हैं। कोरोनिल दवा का हाल भी दुनिया को पता है, नेपाल और भूटान ने भी बैन कर दी थी।
और ‘पुत्र जीवक बीज वटी’ मामला? ख़ैर! धर्म और राष्ट्रवाद के नाम पर मिलावटी कूड़ा कर्कट बेचने में माहिर सेठ जी, आपसे हमदर्द और रूह अफ़ज़ा का बाल भी टेढ़ा नहीं होने वाला।


नदीम अख्तर-
बिरयानी, मटन कोरमा, चिकन चंगेजी, मुर्ग मुसल्लम, निहारी, नल्ली, कबाब और तमाम चीजें खाना छोड़ दें। इन सबको जिहाद के मकसद से बनाया गया है। इससे जो कमाई होती है, उससे मदरसे और मस्जिदें बनती हैं।
बाबा रामदेव ने ठीक कहा कि रूहअफ़ज़ा शरबत जिहाद है। पतंजलि के प्रॉडक्ट्स शुद्ध नहीं हैं तो क्या हुआ, जांच में तेल में मिलावट और शहद में चीनी मिला हुआ पाया गया तो क्या हुआ? और जांच होगी तो इनके सभी प्रॉडक्ट्स में मिलावट मिलने की आशंका है तो क्या हुआ?
रामदेव यादव, वर्ण व्यवस्था को धता बताते हुए बाबा भी हैं और राष्ट्रवादी भी। इन्होंने जो वादा किया था, उसके मुताबिक देश में आज पेट्रोल 40 रुपया लीटर बिक रहा है और डॉलर की कीमत रुपए के बराबर आ गई है। सो पूरे देश को बाबा रामदेव यादव का साथ देना चाहिए और शरबत जिहाद का बहिष्कार करना चाहिए। ऐसा बाबा सदियों में एक ही बार पैदा होता है।
नीचे राष्ट्रवादी बाबा रामदेव यादव के तमाम प्रोडक्ट्स में मिलावट से संबंधित छपी खबरों का स्क्रीनशॉट है। ये ऐसे ही देश को तंदुरुस्त और अपनी तिजोरी को स्वस्थ बनाते रहते हैं।



राकेश कायस्थ-
ऐसा कोई सगा नहीं, जिसको इसने ठगा नही! प्राय: टॉपटेलस और पूर्णत: शेमलेस स्वयंभू बाबा ने जिंदगी में पहली बार पूरे कपड़े तब पहने थे, जब उसे इस बात का डर लगा था कि रामलीला मैदान का ड्रामा भंग करती पुलिस कहीं लट्ठ ना बजा दे।
तब बाबा ने पूर्ण वस्त्र धारण किये थे। इस बात क्रेडिट देना होगा कि संपूर्ण नारी वेश धरते करते वक्त दुपट्टा ओढ़ना नहीं भूला था। जल्दबाजी में बिंदी नहीं मिली होगी, इसका बेनिफिट ऑफ डाउट दिया जाना चाहिए।
महागठ अन्ना ने उसी मौसम में दिल्ली में गन्ना बोया था। कथित अनशन के दौरान ग्लूकोज मिला पानी पी रहा था और टनाटन बोल रहा था। दुनिया हाथ जोड़े कह रही थी कि दूसरा गाँधी आ गया है, अब लोकपाल भी आ जाएगा। अन्ना से कंपीटिशन करते वक्त स्वयंभू बाबा भी जोश-जोश में अनशन कर बैठा और 24 घंटे में हालत चूहेदानी में फंसे मरियल चूहे जैसे हो गई। तस्दीक आप इस तस्वीर से कर सकते हैं।
ढूंढेगे तो वीडियो भी आसानी से मिल जाएगा। हम सब लोगों ने अपने चैनलों पर बार-बार चलाया था, और सरकार को जी-भरकर कोसा था। मुझे अच्छी तरह याद है, इस आदमी को अस्पताल में भर्ती कराकर ग्लूकोज चढ़ाना पड़ा था। किसी योगमाया या आर्युवेद से इलाज नहीं हुआ था।
कथित आयुर्वेदिक दवाइयों में जानवरों की हड्डियां मिलाने का इल्जाम लगा था, तब ये आदमी मुलायम सिंह यादव से अभयदान लेने पहुंचा था। समाजवादी होते ही हैं, बड़े दिल वाले और भोले-भाले। नेताजी ने फौरन बयान जारी कर दिया था कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के खिलाफ बाबा ने जितनी सार्थक लड़ाई लड़ी है, उतनी तो हम भी नहीं लड़ पाये हैं।
इस आदमी ने खुद को ब्राहणवाद पीड़ित साबित करने के लिए अपने उपर एक फिल्म बनवाई थी, जिसमें ये दिखाया गया था कि पंडे-पुजारी किस तरह बालक रामदेव पर जुल्म ढा रहे हैं। मतलब एक पैर समाजवादी कैंप में दूसरा यादव टोली और बाकी हाथ-पैर-सिर सबकुछ बीजेपी में।
कांग्रेस के बड़बोले नेता दिग्विजय सिंह ने इसे ठीक पहचाना था। उन्होंने कहा था “ऐसा कोई सगा नहीं, जिसको ठगा नहीं। यह आदमी शत-प्रतिशत ठग है, इसके अलावा कुछ और नहीं है।“ उस दौरान कांग्रेस का मौसम खराब था और इसलिए पब्लिक ओपिनियन उल्टे दिग्विजय सिंह के खिलाफ हो गई थी।
हर प्रोडक्ट में धोखा, अपनी जान बचाने के लिए एलोपैथी की शरण में जाना और कोविड के दौरान लोगो को भरमाने और अपना कथित चमत्कारी प्रोडक्ट कोरोनिल बेचने के लिए ये दावा करना कि एलोपैथी की वजह से कोरोना के दौरान हज़ारों लोग मर गये। कारनामे बहुत से हैं। जहां पिटने-पिटाने का डर वहां इस आदमी को कान पकड़कर माफी मांगने से भी कोई गुरेज नहीं है।
सांप्रादायिकता की बहती गंगा में हाथ धोने ये आदमी देर से उतरा है।
मुंतशिर से पुन: सुकुल अवतार लेना वाला चोर गीतकार, हरेक दरबार में चारण की तरह बख्शीश की उम्मीद में जाने, छंद सुनाने और बारी-बारी से भगाये जानेवाला अविश्वसनीय विश्वास, नरेंद्र मोदी पर दिल्ली की विधानसभा में ऑन रिकॉर्ड एक लड़की के यौन शोषण का आरोप लगाने वाला और अब मंत्री बना मिश्रा, आपको बीसियों नाम ऐसे मिल जाएंगे जो रातो-रात पाला बदलकर प्रोग्रेसिव से दंगाई बनाओ इनाम पाओ’ परियोजना के लाभार्थी बने हैं।
रुह अफजा सवा सौ साल पुराना प्रोडक्ट है और समाज के लिए किया गया हमदर्द का योगदान असंदिग्ध है। इसलिए ये कहना सही नहीं होगा कि सलवारी बाबा की जहरीली बयानबाजी से हुई निगेटिव पब्लिसिटी उसे किसी तरह का लाभ पहुंचाएगी। सलवारी बाबा का नया पैतरा सिर्फ एक बात पर मुहर लगाती है। नफरत फैलाओ प्रोजेक्ट को सरकार उसी तरह चला रही है, जिस तरह कभी पोलियो ड्रॉप पिलाने का अभियान चलाया गया था। वक्त-वक्त की बात है।
बाबा आश्वस्त है कि जब हिंदू-मुसलमान करके जब एक निकम्मी सरकार तीसरी बार सत्ता में आ सकती है, तो फिर कोई धंधेबाज अपने शर्बत की हजार-दो हजार बोतलें ज्यादा क्यों नहीं बेच सकता।
लेकिन हलाल सार्टिफिकेट लेकर अपना माल दुबई तक बेचने वाले इस आदमी का दांव उल्टा भी पड़ सकता है। परम नीचता देखकर हो सकता है बहुत से बंधे-बंधाये ग्राहक भी बिदक जायें। फायदा हो रहा है या नुकसान, इसका अंदाजा अगले तीन-चार दिन में आनेवाले बयानों से मिल जाएगा।


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Shahzad
April 12, 2025 at 3:29 pm
ये फ़र्ज़ी बाबा को अब कुछ नही सुझा तो शर्बत रूह अफज़ा को भी मुसलमान बना दिया इसके सभी प्रोडक्ट तो किसी ना किसी वजह से फेल हो रहे हैं इसलिए बेचारा अपना शर्बत बेचने के लिए उल्टे सीधे हथकण्डे अपना रहा है
Abdul sattar
April 12, 2025 at 7:14 pm
बाबा के ख़िलाफ़ सारे के सारे मुल्ले एक हो गए है जिनके साथ कुछ ग़द्दार हिंदू भी मिल गए है ।