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आज के अखबार : हेडलाइन मैनेजमेंट ऐसा कि हेरल्ड मामला छाया है, वक्फ और बंगाल का मामला पिट गया

संजय कुमार सिंह

आज मेरे आठ में से छह अखबारों में नेशनल हेरल्ड मामले में चार्जशीट की खबर लीड है। इंडियन एक्सप्रेस और द हिन्दू में यह खबर लीड नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस में यह पहले पन्ने पर दो कॉलम की खबर है लेकिन द हिन्दू में यह सेकेंड लीड है। द टेलीग्राफ में यह तीन कॉलम की लीड है तो अमर उजाला में छह कॉलम से ज्यादा की। कहने की जरूरत नहीं है कि चार्ज शीट दाखिल हुई है तो खबर होनी ही थी। लेकिन यही हेडलाइन मैनेजमेंट है। आप जानते हैं कि वक्फ कानून के खिलाफ पश्चिम बंगाल समेत देश के कुछ अन्य राज्यों में हिंसा हुई है और पश्चिम बंगाल के मामले में इसे राज्य सरकार की कमजोरी (या प्रोत्साहन) के रूप में प्रचारित किया जा रहा है। यही नहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्य मंत्री ने कहा कि वक्फ कानून बंगाल में लागू नहीं होगा तो भाजपा नेता ने कहा कि क्या बंगाल भारत में नहीं है। इस तरह एक तो जबरन, बिना मांग, जल्दबाजी में पास कराये गये वक्फ कानून का विरोध हो रहा है और उसका दोष पश्चिम बंगाल सरकार पर मढ़ने की कोशिश चल रही है। इसकी आड़ में राज्य सरकार को बदनाम किया गया और आग में घी डालने का काम भी किया गया। आज जब सुप्रीम कोर्ट में वक्फ कानून पर विचार होना है तो खबर ही नहीं है। यह भी नहीं कि कई भाजपा शासित राज्यों ने इस कानून के पक्ष में सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है और अगर नेशनल हेरल्ड मामले में चार्जशीट बड़ी खबर है तो केंद्र सरकार के किसी कानून के समर्थन में राज्य सरकारों की याचिका बहुत ही दुर्लभ खबरों में मानी जायेगी।

आज हेडलाइन मैनेजमेंट का ही असर है कि कांग्रेस के खिलाफ खबर तो प्रमुखता से है, भाजपा के खिलाफ खबर दिख नहीं रही है। यही नहीं, हेरल्ड मामले के साथ-साथ आज रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ भी खबर है और यह 2007-08 का बताया जा रहा है। इतने समय के दौरान हर चुनाव से पहले वाड्रा से पूछताछ और इस मामले में सक्रियता कौन नहीं जानता है। फिर भी यह खबर है तो रेखांकित करने की जरूरत है। जहां तक नेशनल हेरल्ड का मामला है, एनडीटीवी और दूसरे कई मामलों में जो सब हो चुका उससे ज्यादा गड़बड़ नहीं हो सकता है। इसके अलावा हिन्डनबर्ग ने जिस मामले की रिपोर्ट की थी उसकी जांच नहीं करवाई गई, सेबी प्रमुख का मामला खो गया तो इस मामले में अब चार्जशीट दायर करने की राजनीति समझना मुश्किल नहीं है।

ऐसे में इंडियन एक्सप्रेस की आज की लीड सामान्य से ज्यादा बारिश की मौसम विज्ञान की भविष्यवाणी है। सेकेंड लीड अंतरराष्ट्रीय व्यापार के तनाव और अमेरिका से वार्ता जैसी खबरें हैं जबकि द हिन्दू की लीड खुदरा मुद्रास्फीति कम होकर 2019 के बाद सबसे कम 3.34 प्रतिशत रह जाने की खबर है। इसके अलावा, स्तन दबाना, नाड़ा खोलने की कोशिश को बलात्कार की कोशिश नहीं मानने की इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट की आलोचना भी आज बड़ी खबर है। यह खबर कई अखबारों में है। नवोदय टाइम्स में, उच्च न्यायालय ने जताई आपत्ति और दी नसीहत के साथ शीर्षक है, न्यायाधीशों को यौन हिंसा मामलों में नहीं करनी चाहिये अनुचित टिप्पणी। मेरा मानना है कि आज हेरल्ड वाली खबर नहीं होती तो इन्हीं खबरों में से किसी को प्रमुखता मिलती और लीड बनती। आप जानते हैं कि दिल्ली में भाजपा के चुनाव जीतने के बाद और सरकार बनने (मुख्यमंत्री का चयन होने) से पहले ही यमुना की सफाई शुरू होने का प्रचार होने लगा था। आज द हिन्दू में एक तस्वीर छपी है जिसका कैप्शन है, “झाग से भरा : नई दिल्ली में मंगलवार को सफेद झाग से ढंकी यमुना में तट पर खड़ी एक नाव।”

हेडलाइन मैनेजमेंट में भाजपा के खिलाफ खबरों को छोड़ दिया जाता है। अपने रिपोर्टर से सरकार (भाजपा) विरोधी खबरें करवाना तो न जाने कब से बंद है। बंगाल में हिंसा की खबरों का फॉलोअप आज नहीं होने का एक कारण यह भी हो सकता है कि आज टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के अनुसार, मुर्शिदाबाद में पिता पुत्र की हत्या के आरोप में दो भाइयों को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह खबर हिन्दुस्तान टाइम्स में भी है। इस खबर से बंगाल सरकार पर लगने वाले आरोपों का सच उजागर हो जायेगा। संभव है इसीलिए आज यह खबर सरकार का प्रचार करने वाले अखबारों में पहले पन्ने पर प्रमुखता से न हो। इंडियन एक्सप्रेस की एक खबर के अनुसार हिंसा से पहले सोशल मीडिया पर चेतावनी संकेत देखे गये थे और पुलिस कार्रवाई कर रही है। अभी तक 1093 सोशल मीडिया अकाउंट बंद किये गये हैं और 221 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पश्चिम बंगाल में पुलिस की इस सक्रियता को सोनिया गांधी, राहुल गांधी और रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ कार्रवाई से जोड़कर देखिये यह भाजपा की हताशा लगती है। संभव है, मैं गलत होऊं लेकिन सरकार पर एजेंसियों के दुरुपयोग और बदले की नीयत से कार्रवाई करने का आरोप है ही। ऐसे में वक्फ कानून के बाद बंगाल में हिंसा की खबरों को प्रचार देने के बाद आज दूसरी खबर पकड़ ली गई।

दि एशियन एज की खबर के अनुसार बंगाल के दंगे में स्थानीय नेताओं की भूमिका की जांच के लिए सरकार बांग्लादेशी समूहों के संपर्कों की भी जांच करा रही है। नवोदय टाइम्स में इससे संबंधित खबर का शीर्षक है, मु्र्शिदाबाद हिंसा में बांग्लादेशी कट्टरपंथी शामिल रिपोर्ट। इस खबर में कहा गया है कि  इन्हें एकराजनीतिक दल के  स्थानीय नेताओं से मदद मिली थी। सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय गृहमंत्रालय मुर्शिदाबाद की स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है। बीएसएफ को भी कड़ी निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है। जाहिर है, मामला साधारण नहीं है और जब केंद्रीय गृहमंत्रालय भी लगा हुआ है, सीमा सुरक्षा बल को निर्देश दिये गये हैं तो अकेले राज्य पुलिस को दोषी ठहराना उचित नहीं है। खासकर तब जब राज्य पुलिस की चूक या ढिलाई का कोई मामला नहीं है। फिर भी मामले को स्पष्ट नहीं किया गया है और आज दूसरा विषय आ गया। इसमें बिहार के नेता तेजस्वी यादव ने दिल्ली मं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की – खबर महत्वपूर्ण नहीं है। यह दि एशियन एज में प्रमुखता से छपी है। आज दिल्ली के किसी और अखबार में यह खबर इतनी बड़ी छपी दिखी?  

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