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एनयूजेआई में भयंकर मार, राष्ट्रीय सचिव निर्वाचित होने के बाद वरिष्ठ पत्रकार गोलेश स्वामी ने क्यों दिया इस्तीफा, जानें

लखनऊ। वरिष्ठ पत्रकार गोलेश स्वामी को नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स इंडिया (एनयूजेआई) का राष्ट्रीय सचिव निर्विरोध निर्वाचित किया गया है। यह घोषणा हैदराबाद में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान की गई। हालांकि ताजा सूचना है कि उन्होंने अपने पद से इस्तीफा भी दे दिया है।

अधिवेशन के मुख्य अतिथि हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय ने पत्रकारों को समाज का हितैषी बताते हुए मीडिया की भूमिका को सराहा। उन्होंने पत्रकारों को लोकतंत्र का सशक्त स्तंभ बताया और संगठनात्मक एकता की सराहना की।

निर्वाचन की औपचारिक घोषणा एनयूजेआई के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व निर्वाचन अधिकारी उपाला लक्ष्मण द्वारा की गई। उन्होंने स्वामी जी के अनुभव और योगदान को संगठन के लिए अत्यंत उपयोगी बताया।

गोलेश स्वामी का पत्रकारिता में एक लंबा और समृद्ध अनुभव रहा है। उन्होंने अमर उजाला और हिंदुस्तान जैसे प्रमुख हिंदी समाचार पत्रों में वरिष्ठ पदों पर कार्य किया है। लखनऊ पत्रकारिता जगत में वे एक सम्मानित और प्रभावशाली नाम हैं। उनकी लेखनी में सादगी, निष्पक्षता और सामाजिक सरोकारों की गहरी छाप मिलती है। वर्षों से वे पत्रकारों की समस्याओं और अधिकारों के लिए सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।

लखनऊ के लिए यह गर्व की बात है कि पहली बार किसी स्थानीय पत्रकार को एनयूजेआई का राष्ट्रीय सचिव चुना गया है। यह न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि समूचे उत्तर भारत के पत्रकार समुदाय के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।

बहरहाल, यह सारी प्रक्रिया निपट चुकने के बाद वरिष्ठ पत्रकार गोलेश स्वामी ने राष्ट्रीय सचिव के नए-नए पद से इस्तीफा भी दे दिया। इसके पीछे की वजह व्यक्तिगत निर्णय बताया जा रहा है।


इस बारे में गोलेश स्वामी के करीबियों का कहना है कि—

शुरुआत में वे चुनाव लड़ने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थे, लेकिन कुछ मित्रों के आग्रह पर उन्होंने यह शर्त रखी कि अगर निर्विरोध चयन संभव हो, तभी वे नॉमिनेशन देंगे।

मित्रों के सहयोग और उनके प्रति सम्मान के चलते वे निर्विरोध रूप से राष्ट्रीय सचिव निर्वाचित हुए।

हैदराबाद में आयोजित एनयूजेआई के राष्ट्रीय अधिवेशन में मुख्य निर्वाचन अधिकारी और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष उपाला लक्ष्मण ने पूरी नई कार्यकारिणी की औपचारिक घोषणा की, जिसमें गोलेश स्वामी का नाम भी शामिल था।

इसके तुरंत बाद रास बिहारी, वीरेंद्र सक्सेना, प्रमोद गोस्वामी, अजय कुमार और सुरेंद्र दुबे जैसे कुछ लोगों ने खुद को असली संगठन बताना शुरू कर दिया और स्वामी से यह कहकर संपर्क किया कि यदि वे उनके साथ जुड़ते हैं तो उन्हें कोई “अच्छा पद” दिया जाएगा।

वहीं दूसरी ओर उपाला लक्ष्मण, नए राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवाजी सरकार और महासचिव संजय राय ने स्पष्ट किया कि वैध और असली संगठन उन्हीं के नेतृत्व में कार्यरत है।

स्वामी के करीबियों के अनुसार, उन्हें संगठन में चल रहे इस विवाद की गहराई की जानकारी पहले से नहीं थी, क्योंकि वे हमेशा एक निर्विवाद और उत्कृष्ट पत्रकार की छवि में रहे हैं।

कई वरिष्ठ पत्रकारों और शुभचिंतकों ने उनसे आग्रह किया कि वे इस्तीफा न दें, क्योंकि वे उनके साथ हैं, लेकिन स्वामी ने स्पष्ट कर दिया कि वे किसी पद के लिए अपनों से संघर्ष नहीं करेंगे। उनके अनुसार पत्रकारिता की दुनिया में संगठन कई हैं, और उनमें भी आपसी फाड़-फूट और खींचतान लगातार बनी रहती है, जिससे वे हमेशा दूरी बनाकर रखते आए हैं।

वे नेता बनने की प्रवृत्ति से दूर रहकर केवल जेन्युन मदद करना पसंद करते हैं। अपनी साफ-सुथरी और निष्पक्ष छवि को बनाए रखने के लिए उन्होंने बिना किसी विलंब के तत्काल पद से इस्तीफा दे दिया।

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