दुनिया का सबसे पहला विज्ञापन आज से करीब हजार साल पहले चीन में मिला था। उस दौर में, एक दुकान ने तांबे की प्लेट पर छपवाकर बताया था कि वो “जिनान लियू की बेहतरीन सुइयां” बेचते हैं। वक्त के साथ-साथ विज्ञापन के ढेरों तरीके आए—कभी लोग सड़कों पर खड़े होकर चिल्ला-चिल्लाकर प्रचार करते थे (जिन्हें टाउन क्रायर्स कहा जाता था), तो कभी लोग अपने शरीर पर बोर्ड पहनकर इधर-उधर घूमते थे, जिन्हें ‘सैंडविच मैन’ कहा जाता था।
अब ज़रा सोचिए, अगर उन लोगों को कोई कहता कि एक दिन इंसान अंतरिक्ष में भी विज्ञापन करेगा—तो शायद वे हंस-हंस के लोटपोट हो जाते।
लेकिन अब ये हकीकत बन चुकी है। आजकल ब्रांड्स अपने विज्ञापन आसमान पार करके सीधे अंतरिक्ष तक पहुंचा रहे हैं। और ये कोई मजाक नहीं है—वास्तव में कई कंपनियां ऐसा कर भी चुकी हैं।
1990 में जापान की टोक्यो ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम (TBS) नाम की कंपनी ने रूस के एक रॉकेट पर अपना लोगो लगवाया था। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने एक पत्रकार को 10 मिलियन डॉलर खर्च करके अंतरिक्ष भी भेजा! सोचिए, कंपनी की ब्रांड वैल्यू कितनी बढ़ी होगी!
इसके बाद पिज्जा हट ने भी बाज़ी मारी। 2001 में उन्होंने अंतरिक्ष में एक छह इंच की सलामी पिज्जा भेजी। कोलंबिया स्पोर्ट्सवियर और टेस्ला जैसी कंपनियों ने भी अपने प्रोडक्ट्स और लोगो अंतरिक्ष में भेजे हैं। 2020 में तो ब्यूटी ब्रांड एस्टी लॉडर ने अपने नाइट सीरम की अंतरिक्ष में फोटोशूट भी करवा डाली!
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स की मैने तो, अब तक ये सब ऐसे विज्ञापन रहे हैं जो दिखने में तो अनोखे हैं लेकिन किसी को नुकसान नहीं पहुंचाते। लेकिन अब कुछ आइडियाज ऐसे भी सामने आए हैं जो लोगों को परेशान कर सकते हैं।
जैसे जापान की एक कंपनी ALE आर्टिफिशियल उल्का-वर्षा (fake shooting stars) बनाने की कोशिश कर रही है। सोचिए, आपके ऊपर अचानक अंतरिक्ष से रौशनी की बारिश हो रही हो—मज़ा तो आएगा, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए ये परेशानी बन सकती है। इसी तरह एक और कंपनी ‘स्पेस बिलबोर्ड’ बनाना चाहती थी जो इतना बड़ा होता कि धरती से चाँद जितना दिखता। लेकिन वो आइडिया फ्लॉप हो गया।
वैज्ञानिक और खगोलशास्त्री कह रहे हैं कि अगर ऐसे विज्ञापन अंतरिक्ष में भेजे गए तो ये आसमान को गंदा कर देंगे, रिसर्च में दिक्कत आएगी और अंतरिक्ष का कचरा भी बढ़ेगा। कई लोगों का ये भी कहना है कि साफ-सुथरा रात का आसमान पूरी दुनिया की सांझी धरोहर है, जिसे किसी कंपनी के विज्ञापन से ढंक देना सही नहीं होगा।
तो फिलहाल बहस जारी है—कुछ लोग इसे तकनीक की जीत मानते हैं, तो कुछ इसे जरूरत से ज़्यादा बिज़नेस कह रहे हैं। एक बात तो तय है—अंतरिक्ष में अब सिर्फ रॉकेट नहीं, ब्रांड भी उड़ रहे हैं!


