
नए भारत में पत्रकारिता भी क्या चीज़ है! एक ज़माना था जब लोग हक़ीकत जानने के लिए अख़बार पढ़ते थे, अब थंबनेल देखकर इतिहास रच देते हैं।
पत्रकार सुशांत सिन्हा साहब बड़े गंभीर मुद्रा में पूर्व बीएसएफ अफ़सर एनएन दुबे जी से आतंकवाद पर चर्चा कर रहे थे। जैश-ए-मोहम्मद, हरकत-उल-अंसार, गाजी बाबा – सबका नाम लिया गया, मानो चैनल नहीं, कोई रॉ डॉसियर चल रहा हो।
लेकिन असली आतंकी हमला तो उनके वीडियो के थंबनेल ने किया! जी हां, मसूद अजहर और ओसामा बिन लादेन के बीच जिस शख्स की तस्वीर चमक रही थी, वो कोई और नहीं, पंजाब के एडीजीपी फैय्याज फारूकी साहब थे – जिनका न आतंकवाद से नाता है, न ही गाजी बाबा से रिश्ता।
सिर्फ नाम नहीं, फारूकी साहब की तस्वीर के माथे पर गोली का निशान भी लगा दिया – मतलब अब चैनल का दावा है कि उन्हें ‘वीडियो में ही सही’, पर मार गिराया गया!
अब ज़रा सोचिए, थंबनेल देखकर फारूकी साहब को कैसा लगा होगा? “अरे भई, मैं तो ड्यूटी पर था, कब आतंकवादी बन गया और कब मारा भी गया, ये तो सुशांत जी से ही पूछना पड़ेगा।”
चैनल ने वीडियो हटा लिया, पर माफ़ीनामा अभी कहीं ‘ड्राफ्ट’ में अटका है। शायद सुशांत जी सोच रहे हों – “गलती मान ली तो TRP पर गोली लगेगी!”
सवाल ये नहीं कि गलती हुई, सवाल ये है कि जब ‘गलती’ को ‘गौरव’ समझा जाए तो असली पत्रकारिता के माथे पर कौन सा निशान बनता है?

भारी पत्रकार सुशांत सिन्हा का ये ज्ञान भी पढ़ते जाइये… नीचे पत्रकार रणविजय सिंह ने जवाब दिया है…

रणविजय सिंह-
सुशांत जी, आपसे शानदार पत्रकार और कोई नहीं.
मैं आपको कुछ डेटा दे रहा हूं, पिछले 10 महीने का. इसमें इंटेलिजेंस फेलियर/आतंकियों के हमले और मुठभेड़ में भारत के 90 लोग मारे गए.
सिर्फ 10 महीने में 90 भारतीयों की मौत ये रही लिस्ट-
- 9 जून: श्रद्धालुओं की बस पर हमला, 10 की मौत
- 11 जून: 1 जवान की मौत
- 6 जुलाई: 2 जवान की मौत
- 8 जुलाई: 5 जवान की मौत
- 15 जुलाई: 4 जवान की मौत
- 23 जुलाई: 1 जवान की मौत
- 24 जुलाई: 1 जवान की मौत
- 27 जुलाई: 1 जवान की मौत
- 29 जुलाई: 4 नागरिक की मौत
- 10 अगस्त: 2 जवान और 1 नागरिक की मौत
- 14 अगस्त: 1 जवान की मौत
- 19 अगस्त: 1 जवान की मौत
- 13 सितंबर: 2 जवान की मौत
- 28 सितंबर: 1 जवान की मौत
- 9 अक्टूबर: 1 जवान की मौत
- 18 अक्टूबर: 1 नागरिक की मौत
- 20 अक्टूबर: 7 नागरिक की मौत
- 24 अक्टूबर: 2 जवान की मौत, 2 नागरिक की मौत
- 3 नवंबर: 1 नागरिक की मौत
- 7 नवंबर: 2 जवान की मौत
- 10 नवंबर: 1 जवान की मौत
- 3 फरवरी: 1 नागरिक की मौत
- 11 फरवरी: 2 जवान की मौत
- 27 मार्च: 4 जवान की मौत
- 22 अप्रैल: 28 लोगों की मौत
- 23 अप्रैल: 1 जवान की मौत
आप पाठशाला में इसे चलाएं, लोगों को सच्चाई बताएं. एक आप ही हैं जो भारत के लोगों की आवाज उठा सकते हैं.
आपकी पत्रकारिता का कायल, आपका छोटा भाई.


