

ग्रेटर नोएडा वेस्ट (टेक ज़ोन-4), 12 मई 2025 : सरकारी उपक्रम NBCC India Limited द्वारा टेक ज़ोन-4 क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्य ने एक गंभीर पर्यावरणीय संकट को जन्म दे दिया है। इलाके में रहने वाले नागरिकों का आरोप है कि हरे-भरे पेड़ों की सुनियोजित और बेरहमी से कटाई की जा रही है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, सबसे पहले पेड़ों की जड़ों में पेट्रोल या तेजाब डाला जाता है, जिससे कुछ ही दिनों में पेड़ मुरझा जाते हैं। फिर “सूख चुके पेड़ों” के बहाने रात के अंधेरे में इन्हें काट दिया जाता है। यह प्रक्रिया न सिर्फ अवैध है, बल्कि पर्यावरण के साथ एक खुला धोखा भी है।
नीचे दिए गए तथ्यों और प्रमाणों से स्थिति की गंभीरता को समझा जा सकता है:
पहली तस्वीर में स्पष्ट रूप से एक हरा-भरा पेड़ रातोंरात काटकर फेंका गया दिखाई दे रहा है। पेड़ का काफ़ी हिस्सा बाहर ढोया जा चुका है।
दूसरी तस्वीर में आंशिक रूप से मुरझाए पेड़ दिख रहे हैं, जिनकी जड़ों के आसपास कंक्रीट और रॉड डाले गए हैं, जिससे उनके जीवित रहने की संभावना और भी घट जाती है। पूरे क्षेत्र में धूल, शोर और भारी वाहनों की आवाजाही ने स्थानीय लोगों का जीवन दूभर कर दिया है।
एनबीसीसी का रवैया और सरकारी एजेंसियों की चुप्पी
यह मामला सिर्फ पेड़ों की कटाई का नहीं है, बल्कि प्राकृतिक विरासत और नागरिकों के मूलभूत अधिकारों के उल्लंघन का है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और पर्यावरण विभाग की निष्क्रियता ने इस संवेदनशील मुद्दे को और भी भयावह बना दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि एनबीसीसी को इस क्षेत्र को “ग्रीन जोन” में बदलने का वादा कर प्रोजेक्ट मंजूरी दी गई थी, लेकिन जमीन पर तस्वीर एकदम उलट है। क्षेत्र में अब हरियाली की जगह सिर्फ गड्ढे, धूल और सीमेंट के ढेर दिखते हैं।
ग्रेटर नोएडा का भविष्य खतरे में
अगर यह बेरोकटोक विनाश यूँ ही जारी रहा, तो ग्रेटर नोएडा वेस्ट जल्द ही कंक्रीट का जंगल बन जाएगा। पेड़ों की जगह बहुमंज़िला इमारतें, साफ हवा की जगह प्रदूषण और जैव विविधता की जगह मौन विनाश दिखेगा।
मांग:
NGT और पर्यावरण मंत्रालय तुरंत हस्तक्षेप करें। NBCC के खिलाफ जांच और दंडात्मक कार्रवाई हो। पेड़ों को काटने से पहले स्थानीय निकाय की सार्वजनिक स्वीकृति अनिवार्य बनाई जाए। किए गए नुकसान की भरपाई के लिए पौधारोपण की कानूनी बाध्यता लागू की जाए।
हर पेड़ केवल लकड़ी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए साँसें हैं। ग्रेटर नोएडा के लोगों की यह पुकार है – हमें पेड़ चाहिए, पत्थर नहीं।
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