सुधीर चौधरी ने दूरदर्शन पर अपना काम शुरू कर दिया है। उनके कार्यक्रम का नाम “डिकोड” (Decode) तो ऐसा रखा गया जैसे लगा कि यही भारतीय पत्रकारिता में मील का पत्थर साबित होगा, लेकिन शुरूआत में ही पूत के पांव दिखने लगे और झूठ की बुनियाद पर एपिसोड संचालित होने लगे। इसे लेकर लोगों में नाराजगी है। नीचे पढ़ें…
गोविंद प्रताप सिंह-
DD News पर सुधीर चौधरी अपना पहला शो Decode लेकर आए। इसमें सुधीर ने इजराइल का वीडियो भारत के एयर डिफेंस सिस्टम का बताकर चलाया।
अब ये गलती थी या शो को चर्चित कराने का तरीका- ये सुधीर और DD News वाले जानें! क्योंकि दोनों को फर्क नहीं पड़ता- बाकी 15 करोड़ तो Safe हैं हीं।
ज्ञानेंद्र अवस्थी-
सुधीर चौधरी: पत्रकारिता के पतन का चेहरा
भारतीय पत्रकारिता का चौथा स्तंभ आज सनसनी, टीआरपी और नैतिक पतन के दलदल में फँसा है, और सुधीर चौधरी इसका सबसे विवादास्पद प्रतीक हैं। उमा खुराना फर्जी स्टिंग से नवीन जिंदल ब्लैकमेलिंग मामले और तिहाड़ से डीडी न्यूज़ तक का उनका सफर पत्रकारिता की साख को दागदार करने की शर्मनाक कहानी है।
उमा खुराना स्टिंग: एक निर्दोष की बर्बादी
2007 में, लाइव इंडिया चैनल ने उमा खुराना पर फर्जी स्टिंग प्रसारित किया, जिसमें उन पर छात्राओं को देह व्यापार के लिए मजबूर करने का झूठा आरोप लगा। सुधीर चौधरी, चैनल के सीईओ, ने इस स्टिंग को मंजूरी दी। परिणामस्वरूप, उमा की जिंदगी तहस-नहस हो गई—हिंसक प्रदर्शन, गिरफ्तारी, नौकरी छिनना, और सामाजिक अपमान। जांच में स्टिंग फर्जी साबित हुआ, लेकिन तब तक उमा की प्रतिष्ठा और मानसिक स्वास्थ्य को अपूरणीय क्षति हो चुकी थी। चौधरी की लापरवाही या टीआरपी की भूख ने एक निर्दोष को बर्बाद किया। उनकी इस हरकत की भर्त्सना पत्रकारिता की नैतिकता के लिए जरूरी है।
जिंदल ब्लैकमेलिंग: पत्रकारिता या उगाही?
2012 में, नवीन जिंदल ने सुधीर चौधरी और समीर अहलूवालिया पर 100 करोड़ रुपये की उगाही का आरोप लगाया। सीसीटीवी फुटेज में जी न्यूज़ के इन पत्रकारों की कोयला घोटाले की खबर दबाने के लिए सौदेबाजी दर्ज थी। दोनों को तिहाड़ जेल में 14 दिन बिताने पड़े। मामला समझौते से खत्म हुआ, लेकिन यह पत्रकारिता की आड़ में उगाही का घिनौना चेहरा था। चौधरी की इस शर्मनाक हरकत ने पत्रकारिता की साख को और गिराया।
तिहाड़ से डीडी न्यूज़: जवाबदेही का मखौल
इन विवादों के बावजूद, चौधरी 2025 में डीडी न्यूज़ के एडिटर-इन-चीफ बन गए, कथित तौर पर 12 करोड़ रुपये वार्षिक वेतन के साथ। एक व्यक्ति, जिसने उमा खुराना को बर्बाद किया और ब्लैकमेलिंग के आरोप झेले, उसे सार्वजनिक प्रसारण की जिम्मेदारी देना जवाबदेही की कमी का सबूत है। उनकी सनसनीखेज पत्रकारिता और एकतरफा शो Decode समाज को बाँटते हैं, सत्य को नहीं उजागर करते। यह पत्रकारिता नहीं, प्रचार है।
पत्रकारिता के लिए सबक
सुधीर चौधरी का करियर पत्रकारिता के लिए चेतावनी है। स्टिंग ऑपरेशनों के लिए कड़े नियम, नैतिकता प्रशिक्षण, पारदर्शी नियुक्तियाँ, और जागरूक दर्शक ही इसे बचा सकते हैं।
संदर्भ: टाइम्स ऑफ इंडिया, 22 अक्टूबर 2008, न्यूज़18, 5 नवंबर 2007, द हिंदू, 4 दिसंबर 2007, X पोस्ट्स
ये भी पढ़ें…



Rajendra
May 22, 2025 at 12:11 am
दलाल पत्रकारिता का गुरु जो 100 करोड़ की दलाली लेते पकड़ा गया था और आज देश को ज्ञान दे रहा हैं मुरखह होंगे जो इसके किसी न्यूज़ को सही मानते होंगे