सर्वेश कुमार तिवारी-
बलिया में एक बारात में गए नेताजी नचनिया के साथ अश्लील हरकत करने लगे। उनकी अश्लील हरकत कैमरे में कैद हुई और बवाल हो गया। देश भर में आलोचना हुई, नेताजी ने निर्लज्जता से स्वयं को निर्दोष भी बताया, और अंततः पार्टी से निकाले भी गए।
मैं सोच रहा हूँ, इस घटना में ऐसा क्या है जो पहली बार हुआ है? आप पूर्वांचल के लगभग हर बारात में कमोबेस ऐसा देख सकते हैं। बारात क्या, सरस्वती पूजा के विसर्जन में नाचने वाली लड़कियों के साथ स्टेज पर ऐसी अश्लील हरकतें करते लोगों को यूँ ही देख सकते हैं। यह आम हो चुका है।
आप यदि वीडियो देखें हों तो उसमें नचनिया का चेहरा देखिये, उसे कोई परेशानी नहीं है। नेताजी से अधिक उसकी हरकतें अश्लील हैं। पर उसे पैसा कमाना है, उसने यही धंधा चुना है। इस बारात में उसे नेताजी मिले थे, पिछले सट्टे में उसे कोई और मिला होगा, अगली में कोई और मिलेगा। हर जगह यही होगा… यह खुलेआम चल रहा है, और सभी इसे एक्सेप्ट कर चुके हैं।
पहले यह होता था कि ऑर्केस्ट्रा में नाचने के लिए बंगाल से लड़कियां आती थीं। कुछ बंगलादेशी रिफ्यूजी लड़कियां, कुछ आसाम साइड के गरीब परिवारों की… फिर रांची साइड से गरीब तबके की लड़कियां भी… शुरू के दो चार साल तक हिन्दी गाने बजे, बात केवल नाचने तक रही, पर धीरे-धीरे असली रङ्ग खुलने लगा। अश्लील गीतों की फरमाइश होने लगी। उसपर पैसे मिलने लगे, तो ऑर्केस्ट्रा वाले अपने मन से ही गंदे गीत बजाने और नाचने लगे। इसका अगला पड़ाव वही था, जहां बलिया वाले नेताजी खड़े दिखे हैं।
अब बंगाल, आसाम की जगह लोकल लड़कियां उतर चुकी हैं इस धंधे में… माही मनीषा, दिसा डांसर फलां राज, ढिमका राघवानी, और जाने कितनी ही… बंगाल की लड़कियां तो तनिक विरोध भी करती थीं, पर ये तो जैसे आई ही हैं इसी के लिए… जितनी गंदगी आप सोच सकते हैं, वह उपलब्ध है। और वे अकेले नहीं निकलती हैं, उनके साथ उनके डैड, ब्रदर या मम्मी होती हैं। डैड भी बेटी का वह अश्लील डांस इंज्वाय करते हैं।
नेताजी के वीडियो पर भोजपुरिया इलाके के जितने लोगों ने विरोध जताया है, उनमें से पाँच भी ऐसे नहीं होंगे जिनके गाँव में ऑर्केस्ट्रा न आता हो, ऐसी गंदगी न परोसी जाती हो और लोग उछल-उछल कर मजे न लेते हों… दरअसल एक्सपोज बब्बन सिंह नहीं हुए हैं, बल्कि हम सभी हुए हैं। पिछले बीस सालों में यह पूरा क्षेत्र ऐसा ही हो गया है।
आप जिस जिले में हैं, सर्च कीजिये, उसी जिले की एक दर्जन लड़कियां इंस्टाग्राम के माध्यम से इस धंधे में उतरने के लिए तैयार खड़ी हैं। हर शहर में खुल रहे डांस स्कूल के बच्चों के लिए कैरियर है कहाँ? फ़िल्म इंडस्ट्री में तो कुल दस या पन्द्रह ही अभिनेत्रियां हैं। सारी भाषाओं की इंडस्ट्री को जोड़ लीजिये तो अधिकतम सौ होंगी! कोरियोग्राफर और टीवी के रियलिटी शो के जज वगैरह को भी मिला लीजिये तो अधिकतम पांच सौ। उसके बाद? भाई साहब! उसके बाद का कैरियर सीधे यही मंच है… मॉम डैड बेटी को दीपिका पादुकोण बनाने के सपने के साथ शुरुआत करते हैं, पर पहुँचते हैं उसी लड़की की जगह जो बब्बन सिंह की गोद में बैठी है।
बब्बन सिंह को कोस कर कुछ नहीं होने वाला। अपने गाँव में घुस रहे ऑर्केस्ट्रा को रोकिये, अश्लील गायकों को रोकिये, पैसे के लिए नङ्गे नाच रहे इंस्टा कलाकारों को रोकिये। रोक पाएंगे? शायद नहीं… सम्भव हो तो अपने आप को रोकिये, यह भी बहुत है।
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