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उत्तर प्रदेश

पत्रकार के परिजनों पर पुलिस की सख्ती, पढ़ाई कर रहे छात्रों को बना दिया अपराधी! सीएम समेत आला अफसरों से की शिकायत

शाहजहांपुर। थाना जैतीपुर क्षेत्र में पत्रकार के परिजनों के साथ कथित पुलिसिया ज्यादती का मामला सामने आया है। आरोप है कि अमर उजाला में कार्यरत एक पत्रकार के दो मेधावी परिजनों — एक यूपीएससी परीक्षार्थी और दूसरा बीएससी छात्र — पर पिछले चार महीने में शांतिभंग की आशंका में तीन बार कार्रवाई की गई और अब उन पर गुंडा एक्ट भी लगा दिया गया है। पीड़ित छात्रों और उनके परिजनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।

थाना जैतीपुर क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें यूपीएससी की तैयारी कर रहे छात्र और बीएससी के परीक्षार्थी पर पुलिस द्वारा बार-बार कार्रवाई करने और झूठे मुकदमे दर्ज करने का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित परीक्षार्थियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत आला अधिकारियों को पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जैतीपुर कस्बा निवासी छात्र प्रिंस तोमर यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहा है जबकि उसका भाई शिवम सिंह तोमर बीएससी में अध्ययनरत है। दोनों छात्र पढ़ाई में मेधावी हैं और उनका किसी से कोई पुराना विवाद या आपराधिक रिकार्ड नहीं है। इसके बावजूद पिछले चार महीनों में थाना जैतीपुर पुलिस ने दोनों भाइयों के खिलाफ तीन बार शांतिभंग की आशंका में कार्रवाई की और अब गुंडा एक्ट के तहत मुकदमा भी दर्ज कर दिया है।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि उनके पड़ोसी, जो थाना प्रभारी के नजदीकी हैं, की शह पर यह सब किया जा रहा है। छात्रों का कहना है कि पड़ोसियों को उनकी मेहनत रास नहीं आ रही है, इसलिए पुलिस के माध्यम से उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। इस अन्यायपूर्ण कार्रवाई से छात्र और उनके परिजन मानसिक तनाव में हैं और बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।

पीड़ितों में से एक छात्र के पिता राजेश कुमार सिंह तोमर, जो अमर उजाला में सब एडिटर हैं, ने बताया कि थानाध्यक्ष की मिलीभगत से एक पक्षीय कार्रवाई की जा रही है और पूरे परिवार को झूठे मुकदमों में फंसाया जा रहा है। इसके विरोध में नरेंद्र पाल सिंह ने भी पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

छात्रों का कहना है कि अगर उन्हें जल्द न्याय नहीं मिला तो वे शासन स्तर पर जाकर आवाज उठाएंगे और न्यायिक सहायता लेंगे। इस घटना से क्षेत्र में पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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