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बिहार

बेलछी कांड: वरिष्ठ पत्रकार अरुण रंजन और इंदिरा को रातोंरात चर्चा में ला दिया था!

वेद रत्न शुक्ल-

रिष्ठ पत्रकार अरुण रंजन नहीं रहे। 1977 में बेलछी कांड पर दिनमान में छपी उनकी रिपोर्ट ने तहलका मचा दिया था। इसी के बाद इंदिरा गांधी हाथी पर सवार होकर बेलछी पहुंची थीं। श्री अरुण रंजन नवभारत टाइम्स पटना के संपादक भी रहे।

जेपी आंदोलन से जुड़े अरुण रंजन एक तेज तर्रार पत्रकार और संपादक के रूप में जाने जाते थे। उनके घर लगने वाली बैठकी पर सरकार की नजर रहती थी। खुफिया विभाग के लोग कवि बनकर बैठकी में शामिल रहते थे। 1995 में वह दिल्ली शिफ्ट हो गये। इसी बीच उनके किशोर बेटे की रहस्यमयी बीमारी से मौत हो गई। तब से अरुण रंजन पुराने फॉर्म में नहीं लौटे।

2004 में वह दैनिक जागरण के जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मॉस कम्यूनिकेशन में बतौर प्रोफेसर जुड़ गये। इधर काफी समय से बीमार और बिस्तर पर थे। मंगलवार भोर में उन्होंने अंतिम सांस ली।

क्या था बेलछी कांड?

हाथी पर सवार होकर घटनास्थल पर पहुंची थीं इंदिरा

बेलछी कांड बिहार में 27 मई 1977 को हुआ एक सामूहिक हत्याकांड था। इसमें 11 लोगों की हत्या कर दी गई थी। घटना बिहार के पटना जिले के बेलछी गांव में हुई थी, और प्रकरण में दलितों और अन्य पिछड़ी जातियों के लोग शामिल थे।

घटना का विवरण-

  • इस घटना में 8 दलित (पासवान जाति के) और तीन सुनार जाति के लोगों की हत्या की गई थी।
  • हत्याकांड को महावीर महतो के नेतृत्व में कुर्मी जाति के लोगों की भीड़ ने अंजाम दिया था।
  • घटना जातिगत हिंसा का एक भयानक उदाहरण थी, जिसमें दलितों व अन्य पिछड़ी जातियों को टार्गेट किया गया था।
  • इंदिरा गांधी ने 13 अगस्त 1977 को बेलछी का दोरा किया था, जिससे यह घटना राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आई थी।

मूल खबर…

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