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सुख-दुख

अजित राय को डॉक्टर ने तुरंत पेसमेकर लगवाने की सलाह दी थी, नहीं माने, घर पर नींद में ही वो दुनिया से कूच कर गए!

इरशाद दिल्लीवाला-

अजीत राय नहीं रहे… दिल में जैसे कुछ टूट गया हो। रोने को जी चाह रहा है। मेरे सर्वाधिक पसंदीदा फिल्म समीक्षक, कला के पारखी, अर्तराष्ट्रीय सिनेमा पर सर्वाधिक पकड़ रखने वाला हिन्दी पट्टी का लेखक। अंतरराष्ट्रीय सिनेमा पर हिंदी पट्टी की सबसे बारीक़ आवाज़। ढेरों उपमाएं उनके नाम की जा सकती है।

मेरी पिछले दिनों उनसे बात हुई थी, इस बार दिल्ली आने पर मुलाकात का वादा था, जो अब सिर्फ एक वादा ही रह जाएगा। उनको पढ़कर कितना सीखा, अपनी समीक्षाओं में वह किसी भी राष्ट्रीय अर्तराष्ट्रीय फिल्म की वह ऐसी तस्वीर उतारते कि आप फिल्म देखने के लिये बेचैन हो जाएं।

बहुत कम उम्र में उनका जाना हिन्दी सिनेमा, हमारे साहित्य और कला का बहुत बड़ा नुकसान है। अब वो नज़रिया, वो महसूस करने वाली आंखें, हमेशा के लिए बंद हो गईं।

मेरे लिये निजी तौर पर भी यह एक बड़ी क्षति है, अब वो नज़रिया हमें देखने को नहीं मिलेगा। अक्षय कुमार ने उनकी हालिया किताब का विमोचन किया था, वह देश दुनिया के सारे बड़े फिल्म फेस्टिवल्स को कवर करते थे और सबके लिये उसे आसानी से सोशल मीडिया पर उपलब्ध कराते रहे है।

Cannes हो या Berlin, वो हर जगह मौजूद रहते और हिंदी पाठकों को एक पुल मुहैया कराते। पत्रकारों की उस भीड़ में वो एक शख़्सियत थे — अलहदा, बेबाक़, और हमेशा सच्चे।

इन फेस्टिवल्स के लिये भारत से बुलाए जाने वाले पत्रकारों में उनका नाम शीर्ष पर आता था। अब हमेशा के लिये वो लेखनी थम गई और आंख से आंसू जारी है।


संगम पांडेय-

इसी रविवार को अजित राय का यह वाट्सेप मैसेज आया था- ‘अचानक मुझे सोमवार 14 जुलाई को लंदन के एक अस्पताल में हार्ट की जाँच के लिए भर्ती होना पड़ा। बुधवार 16 जुलाई की शाम डिस्चार्ज होकर घर आ गया। आराम कर रहा हूँ। बाकी सब ठीक है। अगले हफ्ते वापस लौटने की सोच रहा हूँ।’

उसके बाद आज यह खबर मिली कि नींद में ही वो दुनिया से कूच कर गए। पता चला है कि उन्हें डॉक्टर ने तुरंत पेसमेकर लगवाने की सलाह दी थी। और न सिर्फ सलाह दी थी बल्कि जोर दिया था कि वो इसे तुरंत लगवा लें। लेकिन उन्होंने इसे भारत में आकर लगवाने का निर्णय किया, और इसलिए अपनी वापसी को तय से पहले खिसकाया।

कथाकार तेजेन्द्र शर्मा का नाम वहाँ अजित राय के ‘प्रथम परिजन’ के रूप में दर्ज होने से प्राथमिक पूछताछ के बाद वो और पुलिस के लोग मोर्चरी-कर्मियों का इंतजार कर रहे थे जिन्हें दिवंगत की देह को लेकर जाना है। पुलिस की पूरी जाँच शायद पोस्टमार्टम के बाद ही खत्म होगी।

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