कानपुर: शहर में जमीन-जायदाद कब्जाने और रंगदारी वसूलने के खेल में नया खुलासा हुआ है। अखिलेश दुबे पर उनकी पड़ोसी महिला प्रज्ञा त्रिवेदी ने गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस कमिश्नर को शिकायती पत्र सौंपा है।
दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर के अनुसार, प्रज्ञा का आरोप है कि 2009 में बारादेवी चौराहे पर खोले गए होटल कंटिनेंटल को हड़पने के लिए दुबे सिंडिकेट ने पहले पुरुष साझेदार को फर्जी मामले में फंसाकर उगाही की, फिर महिला साझेदारों को चरित्र-हत्या की साजिश में निशाना बनाया।

उन्होंने दावा किया कि उनके खिलाफ अश्लील कहानियां गढ़कर किताबें छपवाई गईं और उन्हें बैंक व मोहल्लों में मुफ्त बांटकर बदनाम किया गया। यहां तक कि विवाह के समय उन्हें अगवा करने की भी साजिश रची गई थी।
प्रज्ञा के मुताबिक, दबंगई और बदनामी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इंसाफ की लड़ाई लड़ी। अब उन्होंने एसआईटी जांच की मांग की है।
पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने एक वीडियो क्लिप साझा करते हुए ट्वीट किया है। इस वीडियो क्लिप में दुबे के साथ कानपुर प्रेस क्लब का पूर्व अध्यक्ष अवनीश दीक्षित और पूर्व विधायक व अब भाजपा नेता बन चुका अजय कपूर भी दिख रहा है। वीडियो में बताया गया है कि कैसे दुबे ने 1500 करोड़ की सरकारी संपत्ति कब्जा ली। नीचे पढ़िए और वीडियो देखिए…
उप्र में भाजपाई भ्रष्टाचार का त्रिकोण :
- फ़र्ज़ी एनकाउंटर वाली भ्रष्ट भाजपा सरकार
- काली कमाई वाले भाजपा संरक्षित भ्रष्ट अधिकारी
- उपर्युक्त दोनों की करतूतों को छिपाने वाला भ्रष्ट भाजपाई वकील
हज़ारों करोड़ कमानेवाले भ्रष्टाचारी को न ड्रोन देख पाया, न दूरबीन में वो नज़र आया,
मामला भी तब खुला जब आपस में ही रंगदारी का गोरखधंधा सामने आया। अब देखते हैं कि इस भाजपाई भू-माफ़िया के अवैध क़ब्ज़ों पर बुलडोज़र अपने आप चलता है
या हमारी इस पोस्ट के प्रकाशित होने के बाद या फिर कोई सबसे बड़ा रंगदार, इन सबसे वसूलकर मामला रफ़ा-दफ़ा कर देगा।
उप्र के ‘माफ़िया मुक्त’ होने का दावा करने वाले अब कहाँ हैं?
सच तो ये है कि उप्र ‘माफ़िया मुक्त’ नहीं हुआ है, बल्कि उप्र का माफ़िया किसी एक में समाकर ‘महामाफ़िया’ बन गया है।
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