यशवंत सिंह-
इन दिनों मैं ग़ाज़ीपुर में हूँ और ग़ाज़ीपुर पूरे प्रदेश देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। सब पुलिस को हत्यारी साबित करने में जुटे हुए हैं। लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी है जो अब तक सामने नहीं आया है। मैंने कई लोगों से बात की। नेताओं से लेकर अफसरों तक। कुछ नए सवाल भी हैं। कुछ अनुत्तरित सवाल हैं जिसकी तहक़ीक़ात जारी है।
ये सिर्फ़ सवाल हैं जिनके जवाब क्या हैं, मुझे भी नहीं मालूम।
- क्या सियाराम उपाध्याय उर्फ़ जोखू पुलिस विरोधी एक बड़ी साजिश के शिकार हो गए?
- माफिया मुख़्तार अंसारी के ख़िलाफ़ दर्जनों ठोस एक्शन लेकर ग़ाज़ीपुर पुलिस का नेतृत्व कइयों के निशाने पर पहले से था। क्या साजिशकर्ताओं द्वारा स्कोर अबकी सेटल कर लिया गया?
- पुलिस का मकसद थाने से भीड़ / धरना हटाना था, किसी का निजी नुकसान करना नहीं। तीस सेकंड की डंडाबाजी में भीड़ तितर बितर हो गई। टारगेट अचीव्ड! फिर वो कौन लोग हैं जिन्होंने धरने में घुसकर एक सुनियोजित साजिश के तहत न सिर्फ़ एक व्यक्ति को अतिशय नुक़सान पहुंचाया बल्कि इस प्रकरण का मुँह पुलिस की तरफ़ घुमा दिया?
- बुरी तरह घायल सियाराम उपाध्याय का सात आठ घंटे तक इलाज किन लोगों ने नहीं होने दिया, उन्हें घर में क्यों क़ैद रखे रहे?
- पुलिस द्वारा मुख्तार अंसारी खानदान पर लगातार दर्जन भर तगड़े एक्शन से वो कौन लोग ऐक्टिव किए गए थे जिनको पुलिस को उसके ही जाल में घेर कर उलझाना था और इसके लिए ‘सुपारी’ दी गई और वे सत्ताधारी दल के साथ अब भी खूब सक्रिय हैं?
- सत्ताधारी दल के उन सदस्यों की संख्या कितनी है जिन्हें माफिया मुख्तार अंसारी खानदान से लगातार आर्थिक मदद मिलती रही है और मिल रही है? इन लोगों की इस प्रकरण में शुरू से अब तक अति सक्रियता पुलिस के कान खड़े किए हुए है। इनकी कुंडली क्या बाहर आ पाएगी?
- सीएम योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी जांच का आदेश कर दिया है। जो सच है वो सामने आयेगा लेकिन अभी गाजीपुर की हवा में दर्जनों अनुत्तरित सवाल तैर रहे हैं जिनका जवाब मिलना बाकी है। सवाल है, माफियाओं से आर्थिक लाभ लेने वाले कार्यकर्ताओं की लिस्ट भी क्या एसआईटी जाँच के दायरे में आएगी?
- गाजीपुर की पुलिस प्रशासन की अफसरशाही में दलित पिछड़ी जाति के अफसरों की शीर्ष पदों पर तैनाती है और इन अफसरों की जनपक्षधर अति सक्रियता कइयों के पेट में दर्द किए हुए है। साजिश दर साजिश हो रही है। सवर्ण जातियों के मठाधीश किसी भी तरह इन अफसरों को बदनाम कर इनसे मुक्ति चाहते हैं ताकि वे अपनी मनमानी चला सकें। क्या सरकार पर दबाव बनाकर मनमाफिक एक्शन सस्पेंशन ट्रांसफर पोस्टिंग कराने की साजिश इस घटना के मूल में तो नहीं है?

सवाल दर सवाल हैं। जवाब बस कुछ लोगों को पता है और जिन्हें पता है वो बोल नहीं सकते। जो बोल लिख रहे हैं वो एक बड़े नैरेटिव प्रोपेगंडा एजेंडा के पार्ट हैं। आज के दौर में मुकम्मल सच कभी सामने नहीं आता। जो आता है वो एक पूर्व प्लानिंग का हिस्सा होता है।
उम्मीद है मीडिया और ग़ाज़ीपुर वासी इन सवालों पर शांत व खोजी दिमाग़ से विचार करेंगे, त्वरित रिएक्शन से बचेंगे!
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