गाज़ीपुर से लेकर नोएडा तक, थानों के अंदर पुलिस की लाठियों ने ज़िंदगियाँ छीन लीं। गाज़ीपुर के नोनहरा थाने में सीताराम उपाध्याय उर्फ जोखू उपाध्याय पुलिसिया लाठीचार्ज की भेंट चढ़ गए, वहीं नोएडा के सूरजपुर थाने में कस्टडी में नेता सिंह की मौत ने शासन और प्रशासन की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। “सबका साथ-सबका विकास” का नारा अब “सबका दमन-सबका अपमान” में क्यों बदलता जा रहा है?
आशुतोष उपाध्याय-
गाजीपुर के सीताराम उपाध्याय उर्फ जोखू उपाध्याय को पुलिस ने लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी। यही आज का संविधान है। क्योंकि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण होना अब हत्या, लाठी खाना, गाली सुनना और अपमान झेलना बन गया है। हम कई बार कह चुके हैं कि आने वाले 10 सालों में ब्राह्मणों की दुर्दशा होना तय है।
15 तारीख को सीताराम उपाध्याय के घर पहुंचकर हर संभव न्यायिक मदद के साथ आदर्श ब्राह्मण फाउंडेशन संगठन के अध्यक्ष और पदाधिकारी मौजूद रहेंगे।
कृष्ण कुमार मिश्रा-
गाजीपुर जनपद के नोनहरा थाना क्षेत्र में पुलिस ने रात के अंधेरे में लाइट बुझाकर बर्बर लाठीचार्ज किया। इसमें घायल सीताराम उपाध्याय उर्फ जोखू उपाध्याय की मौत हो गई। यह केवल एक व्यक्ति का निधन नहीं है, बल्कि सरकार की निर्दयता और भाजपा नेताओं की चुप्पी का घिनौना नतीजा है।

क्या यही भाजपा का “सुशासन” है? “सबका साथ-सबका विकास” और “बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ” के नारे किनारे लगाकर भाजपा नेता आखिर मौन क्यों हैं? इतनी बड़ी घटना के बावजूद किसी भी भाजपा जनप्रतिनिधि का सामने न आना इस बात का संकेत है कि पार्टी में कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं मिलता।
जिले के दिग्गज भाजपा नेता कैमरे के सामने चमकने के लिए तो हमेशा हाज़िर रहते हैं, लेकिन जब अपने कार्यकर्ताओं पर संकट आता है, तो गायब हो जाते हैं। रात के अंधेरे में नोनहरा थाना स्टाफ द्वारा भाजपा कार्यकर्ताओं पर लाइट बंद कर लाठीचार्ज किया गया—आखिर इतनी बड़ी घटना किसके इशारे पर हुई?
जहां जनता की आवाज़ दबाने के लिए अंधेरे में लाठियां बरसाई जाती हैं और मासूमों की जान ले ली जाती है, वहां सत्ता के नुमाइंदे मूकदर्शक बने रहते हैं।
आज जोखू उपाध्याय की शहादत ने भाजपा सरकार और स्थानीय नेताओं का असली चेहरा उजागर कर दिया है। इस बर्बर लाठीचार्ज में उनकी मौत बेहद दुखद है। थानेदार सहित पूरी टीम पर हत्या का मुकदमा दर्ज होना चाहिए।
अभिषेक उपाध्याय-
थाने के अंदर लाइट बंद कर पीटा। खूब पीटा। यहां तक कि भाजपा के नेताओं को भी जमकर पीटा।
सीताराम उपाध्याय की मौत हुई। बर्बर लाठीचार्ज हुआ। गाजीपुर ने नई लकीर खींच दी। यह योगी आदित्यनाथ के राज की एक और तस्वीर है।
मुझे डर है कि कहीं कुछ दिनों में अख़बार वाले ऐसी खबरों को “इसमें नया क्या है” कहते हुए छापना ही बंद न कर दें। “बटेंगे तो कटेंगे”—यही तो आज का फ़लसफ़ा है!
गौतमबुद्ध के नाम पर बसाई गई नगरी नोएडा की तस्वीर-
यहां पुलिस कस्टडी में युवक की पीट-पीटकर हत्या का गंभीर आरोप लगा है। दो पक्षों के विवाद में पुलिस कमल सिंह और नेता सिंह को सूरजपुर कोतवाली लेकर आई।


कमल सिंह का आरोप है कि लॉकअप में उनके भाई नेता सिंह को इतनी बर्बरता से पीटा गया कि उसकी मौत हो गई।
इस बीच, कोतवाली प्रभारी और डीसीपी ने मारपीट के आरोपों को निराधार बताया और कहा कि मौत का असली कारण जानने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
कभी सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी, तो कभी कस्टडी में मौत के गंभीर आरोप—आखिर नोएडा को हो क्या गया है?
पुलिस के लाठी चार्ज में मौत!!
ग़ाजीपुर के नोनहरा थाने में रात के अंधेरे में हुए पुलिस लाठीचार्ज की भयावह तस्वीरें सामने आई हैं। लोग बता रहे हैं कि सीताराम उपाध्याय उर्फ जोखू की बुरी तरह पिटाई से मौत हो गई।
गाजीपुर पुलिस इन तस्वीरों की सच्चाई बताए। या फिर कह दे कि ये तस्वीरें AI से बनाई गई हैं, या किसी और देश की हैं! कम से कम कुछ तो साफ करे।
चाहे तो लाठीचार्ज करने वाले पुलिसवालों को गांधी के सविनय अवज्ञा आंदोलन का सिपाही ही बता दे!
ABVP के बाद अब भाजपा कार्यकर्ताओं पर भी पुलिस की लाठी-
पूजा संपन्न होने से पहले ही गाजीपुर में “सरकारी प्रसाद” के तौर पर पुलिस का लाठीचार्ज मिला। इस लाठीचार्ज में घायल लोगों के लिए जल्द ही उसी थाने में “बंटेंगे तो कटेंगे” का महामृत्युंजय जाप करके उनके स्वस्थ होने की कामना की जाएगी।




