नई दिल्ली। देश में डेटा प्राइवेसी कानून को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट, 2023 के तहत नियमों को 28 सितंबर तक अधिसूचित करने की तैयारी में है। यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को AI Impact Summit 2026 में दी।
वैष्णव ने कहा कि “DPDP नियम तैयार हैं और अगले कुछ दिनों में जारी कर दिए जाएंगे। इन्हें सितंबर माह खत्म होने से पहले अधिसूचित किया जाएगा।” यह घोषणा ऐसे समय पर हुई है जब संसद के शीतकालीन सत्र से पहले सरकार ने नियमों को अधिसूचित करने का वादा किया था।
DPDP एक्ट का महत्व
अगस्त 2023 में पारित यह कानून देश का पहला व्यापक डेटा प्राइवेसी फ्रेमवर्क है।
इसकी नींव 2017 में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के.एस. पुट्टस्वामी केस में रखी गई थी, जिसमें निजता को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार माना गया था।
कानून के तहत डिजिटल डेटा के संग्रह, प्रोसेसिंग, स्टोरेज और ट्रांसफर को नियंत्रित किया जाएगा।
GDPR से अलग ढांचा
यूरोपियन यूनियन के GDPR की तुलना में DPDP एक्ट केवल डिजिटल डेटा पर लागू होगा।
अधिकतम ₹250 करोड़ का जुर्माना निर्धारित है (GDPR में यह कंपनियों के वैश्विक कारोबार का 4% तक हो सकता है)।
इसमें “पर्सनल” और “सेंसिटिव” डेटा में अंतर नहीं किया गया है।
डेटा फिड्युशियरी (डेटा प्रोसेस करने वाले संस्थान) और डेटा प्रिंसिपल (जिनका डेटा प्रोसेस हो रहा है) जैसे नए कॉन्सेप्ट जोड़े गए हैं।
ड्राफ्ट नियमों पर मिली हजारों राय
3 जनवरी 2025 को जारी ड्राफ्ट DPDP नियमों पर सरकार को 18 फरवरी तक 6,900 से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। इनमें सहमति (consent) तंत्र, डेटा ब्रीच की रिपोर्टिंग और प्रवर्तन की प्रक्रिया जैसे मुद्दे शामिल थे।
सूत्रों के मुताबिक, अधिसूचना जारी होने के साथ ही उद्योग और नियामक एजेंसियों को इसके अनुपालन की दिशा में तैयारियां तेज करनी होंगी।
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