
बेबाक आईपीएस अधिकारी और एक्टिविस्ट अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी नूतन ठाकुर पर थाना तालकटोरा, लखनऊ में एक अन्य एफआईआर दर्ज किया गया है. इस एफआईआर का नंबर 204/2025 है.
19 पृष्ठों का यह एफआईआर 30 सितंबर 2025 को रात 12: 30 पर थाना तालकटोरा लखनऊ में श्री संजय शर्मा, तालकटोरा की शिकायत पर दर्ज किया गया.
एफआईआर 5 संलग्नक में बंटा है. संलग्नक संख्या 1, 2 और 3 में एसीपी कानून व्यवस्था पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ द्वारा जॉइंट कमिश्नर कानून व्यवस्था लखनऊ को प्रेषित तीन पत्र और जांच आख्या हैं. संलग्नक संख्या चार में शिकायतकर्ता की शिकायत है और संलग्नक संख्या 5 में शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत शपथ पत्र है.
शिकायत में मुख्य बात यह लिखी है कि 2015 में लोकायुक्त ने अमिताभ ठाकुर और उनके परिवार वालों के खिलाफ जो जांच की थी उसमें उन्होंने कई बिंदुओं पर कार्रवाई के निर्देश दिए थे, किंतु इसमें केवल आय से अधिक संपत्ति के मामले में ही जांच हुई और आय से अधिक संपत्ति का आरोप गलत पाए जाने पर कोर्ट ने अंतिम रिपोर्ट स्वीकार किया, लेकिन इसके विपरीत अन्य मामलों में जांच नहीं हुई
शिकायत तथा इस पर एसीपी कानून व्यवस्था की टिप्पणी के अनुसार लोकायुक्त की जांच में तमाम अन्य बिंदु भी लिखे थे, जैसे अनधिकृत रूप से सहकारी समिति की भूमि को आवंटित किया जाना, अन्य व्यक्तियों की जमीन पर कब्जा किया जाना, पीआईएल दाखिल करके पैसे कमाना , परिवार वालों द्वारा लखनऊ और बाराबंकी में भूखंड खरीदा जाना, सरकार में रहते जन आंदोलन में भाग लेना, राज्य सरकार की कार्रवाइयों की आलोचना करना, एनजीओ के माध्यम से काला धन को सफेद करने की संभावना आदि.
एफआईआर में कहा गया है कि चूंकि अमिताभ ठाकुर के खिलाफ दर्ज आय से अधिक संपत्ति के मामले में इन बिंदुओं पर विवेचना नहीं हुई थी, अतः इनके संबंध में अलग से एफआईआर दर्ज करके विवेचना किया जाना आवश्यक है.
इस संबंध में हम अमिताभ ठाकुर और नूतन ठाकुर का यह स्पष्ट मानना है कि पिछले दिनों दर्ज मुकदमा और यह मुकदमा हमारे द्वारा सरकार में बैठे कतिपय उच्च पदस्थ लोगों के भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को सामने रखने के कारण हमें परेशान और प्रताड़ित किए जाने के लिए लिखवाया जा रहे हैं. एफआईआर को देखने के बाद हमें पूर्ण विश्वास है कि हम तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर इस मामले में स्वयं को निर्दोष स्थापित कर पाए.


