नई दिल्ली। नेशनल ब्रॉडकास्टिंग डिजिटल स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी (NBDSA) ने टाइम्स नाउ नवभारत को एक बार फिर सख्त चेतावनी दी है। अथॉरिटी ने चैनल को “लव जिहाद” से जुड़ी एक खबर में अदालत के फैसले से अलग और भ्रामक बातें दिखाने के लिए दोषी पाया है।
मामला उत्तर प्रदेश की एक अदालत के उस फैसले से जुड़ा था, जिसमें एक मुस्लिम युवक को हिंदू महिला को धर्म परिवर्तन के बाद जबरन शादी के लिए मजबूर करने पर सज़ा सुनाई गई थी। चैनल ने इस फैसले पर रिपोर्टिंग के दौरान टिकर में ऐसे तत्व जोड़ दिए जो अदालत के आदेश का हिस्सा ही नहीं थे।
“कोर्ट की खबर में अपनी कहानी घुसाई”
NBDSA ने अपने आदेश में कहा कि किसी कोर्ट के फैसले पर रिपोर्टिंग करना आपत्तिजनक नहीं है, लेकिन उसमें अपने मन से तथ्य जोड़ना और उसे “लव जिहाद” के एजेंडे से जोड़ देना पत्रकारिता की मर्यादा के खिलाफ है। अथॉरिटी ने साफ कहा कि टाइम्स नाउ नवभारत ने टिकर में वे बातें चलाईं जो न तो कोर्ट ने कही थीं, न ही रिकॉर्ड में थीं। इसलिए यह खबर न केवल तथ्यों से भटकी बल्कि “एडिटोरियल मिसकंडक्ट” की श्रेणी में आई।
टिकर हटाने और सतर्क रहने का निर्देश
NBDSA ने चैनल को आदेश दिया है कि वह प्रसारण से ऐसे टिकर हटाए और भविष्य में रिपोर्टिंग करते समय तथ्यों की सटीकता और निष्पक्षता का पालन करे।

साथ ही चैनल को यह भी निर्देश दिया गया है कि वह खबर चलाते समय दूसरे पक्ष का दृष्टिकोण भी शामिल करे।
किसने की थी शिकायत
यह शिकायत इंद्रजीत घोरपड़े द्वारा अक्टूबर 2024 में दर्ज कराई गई थी। घोरपड़े ने आरोप लगाया था कि चैनल ने कोर्ट के फैसले को तोड़-मरोड़कर “लव जिहाद” के नाम पर भड़काऊ टिकर चलाए, जिससे समुदाय विशेष को गलत रूप में प्रस्तुत किया गया।
NBDSA की चेयरपर्सन जस्टिस (रिटा.) ए.के. सिकरी की अध्यक्षता में हुई सुनवाई
अथॉरिटी ने कहा — “अदालत का निर्णय जैसा है वैसा दिखाना पत्रकारिता है, लेकिन उस पर अपनी राय थोपना या नया नैरेटिव जोड़ना जनहित में नहीं है। मीडिया को सावधान रहना चाहिए कि तथ्यों से परे न जाए।”
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