चेन्नई। बुधवार को चेन्नई के पत्रकारों ने राज्य सरकार द्वारा संचालित केबल नेटवर्क से प्रमुख तमिल न्यूज चैनल ‘पुथिया थलैमुरई टीवी’ को हटाए जाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। पत्रकारों ने इस कदम को “ब्लैकआउट” और “सेंसरशिप” करार दिया।
जानकारी के मुताबिक, 3 अक्टूबर से चैनल राज्य के सरकारी केबल नेटवर्क पर नहीं दिखाया जा रहा है। आरोप है कि चैनल को इसलिए ब्लॉक किया गया क्योंकि उसने अभिनेता-राजनेता और टीवीके प्रमुख विजय के राज्यव्यापी राजनीतिक दौरे और करूर रैली हादसे (जिसमें भगदड़ में 41 लोगों की मौत हुई) की व्यापक कवरेज की थी।
पुथिया थलैमुरई टीवी के एडिटर-इन-चीफ एम. समस ने कहा, “हमें जनता की ओर से शिकायतें मिल रही हैं कि वे चैनल नहीं देख पा रहे हैं। लाखों घरों में यह चैनल बंद है।”
यह मामला अब राजनीतिक रंग ले चुका है। एआईएडीएमके प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ई.के. पलानीस्वामी ने कहा, “लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को रोकना निंदनीय है। मीडिया जनता तक सच्चाई पहुंचाता है।”
वहीं, बीजेपी तमिलनाडु अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने भी डीएमके सरकार पर “आलोचना बर्दाश्त न करने” का आरोप लगाते हुए कहा, “सरकार ने करूर हादसे में अपनी गलतियां उजागर करने के कारण चैनल को ब्लॉक किया है, यह बेहद शर्मनाक है।”
मीडिया जगत के लोगों ने याद दिलाया कि यह पहली बार नहीं है। 2018 में एआईएडीएमके शासनकाल में भी एक तमिल चैनल को इसलिए ब्लॉक कर दिया गया था क्योंकि उसने उपचुनाव में टीटीवी दिनाकरन की जीत का एग्जिट पोल दिखाया था।
चेन्नई प्रेस क्लब के महासचिव एम. हसीफ ने कहा, “राज्य केबल संचालन बोर्ड में मीडिया जगत के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे और इस तरह के ब्लैकआउट दोबारा न हों।”
वहीं, सरकारी अधिकारियों ने ब्लैकआउट के आरोपों से इनकार किया है। एक अधिकारी ने कहा, “यह तकनीकी समस्या है। मानक परिभाषा (SD) वाले सेट-टॉप बॉक्स में दिक्कत आई है। नॉर्वे से विशेषज्ञ बुलाए गए हैं और जल्द ही समस्या का समाधान कर लिया जाएगा।”


