कुछ समय पहले मध्य प्रदेश सरकार ने एक -हैप्पीनेस मंत्रालय खोला था। इसका काम था लोगों को खुश रखना। अच्छा ही हुआ इस मंत्रालय के अधिकारियों ने कोई काम नहीं किया, वरना पूरी संभावना थी कि हर चौराहे पर अधिकारी हैप्पीनेस मीटर लेकर खड़े होते और उदास दिखते चेहरों का चालान काटते…

संजय वर्मा-
चीन की सरकार ने एक नया अभियान शुरू किया है। अब सोशल मीडिया पर उदासी बढ़ाने वाली पोस्ट के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, खास तौर पर कोई ऐसी बात जो जीने के मौजूदा तरीके को ले कर निराशा जताए अब उसे अपराध माना जायेगा। चीनी लोगों को उदास रहने, दुखी रहने का या उसे अभिव्यक्त करने का अधिकार नहीं रहेगा।
यह सब शुरू हुआ लाइंग फ्लैट( tang ping) नाम के मुहावरे से जो luo huahong नाम के एक व्यक्ति ने दिया। इन महाशय का कहना था जीवन का मकसद चूहा दौड़ में लगातार दौड़ना नहीं है। समाज आपको कैरियर, शादी, तरक्की की दौड़ में सारी जिंदगी उलझाए रखता है।
आपको पता ही नहीं चलता कि जीवन खत्म हो जाता है और आप जीवन का मजा नहीं ले पाते। इसलिए अपनी आवश्यकताओं को कम कीजिए, बेवजह प्रतियोगिता में मत पड़िए, आराम कीजिए, पढ़िए, घूमिए, धूप सेंकिए और जीवन का आनंद लीजिए। इन्होंने डायोजिन नाम के संत का उदाहरण दिया, जिनका एक मशहूर किस्सा सिकंदर महान के साथ जुड़ा हुआ है।
जब सिकंदर डायोजिन से मिलने गया तो उसने पूछा मैं आपके लिए क्या कर सकता हूं? डायोजिन धूप में नंगा में लेटा हुआ था। उसने सिकंदर से कहा बस थोड़ी धूप छोड़ दीजिए।
चीन के युवा शायद उपभोक्तावाद की दौड़ से थकने लगे हैं, और चाहते हैं कि डायोजिन की तरह बस धूप में लेटें थोड़ा आराम करें। इसलिए ‘लाइंग फ्लैट’ चीन के युवाओं में लोकप्रिय होने लगा है। सरकार इससे घबरा गई है। सरकार का मौजूदा विकास का मॉडल असल में उपभोक्तावाद पर टिका हुआ है। यदि लोग अपनी ज़रूरतें कम कर लेंगे तो विकास का वर्तमान मॉडल भरभरा कर गिर जाएगा। उद्योगपति सड़क पर आ जाएंगे फिर सरकार को चंदा कौन देगा?
इसलिए चीनी सरकार इसे इस अभियान से कंट्रोल करने की कोशिश कर रही है। कोई भी ऐसी बात जिससे जिंदगी जीने के मौजूदा तरीके को लेकर निराशा जताई जाए उस पर कार्यवाही की जाएगी।
दिलचस्प बात है न। चीनी बेचारे अब निराश भी नहीं हो सकते।
मुझे इस खबर से याद आया कि कुछ समय पहले मध्य प्रदेश सरकार ने एक -हैप्पीनेस मंत्रालय खोला था। इसका काम था लोगों को खुश रखना। अच्छा ही हुआ इस मंत्रालय के अधिकारियों ने कोई काम नहीं किया, वरना पूरी संभावना थी कि हर चौराहे पर अधिकारी हैप्पीनेस मीटर लेकर खड़े होते और उदास दिखते चेहरों का चालान काटते। मेरा तो रोज ही एक चालान कटता।
दुनिया भर की सरकारें लोगों को कंट्रोल करना चाहती हैं। वे चाहती हैं आप वही करें जो सरकार चाहती हो। इस पर अब एआई नाम का एक नया हथियार सरकारों के पास आ गया है। बहुत जल्दी आप क्या सोचें यह भी सरकार ही तय करेगी। अजीब बात है कि जॉर्ज ऑरवेल ने 75 साल पहले ही इसका अंदाजा लगाकर उपन्यास 1984 लिख दिया था।


