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ड्रग्स का रास्ता… कंधार से मुंद्रा पोर्ट तक!

ज्ञानेंद्र अवस्थी-

क्या आतंकवाद और कारोबारी नेटवर्क एक-दूसरे के सहारे फल-फूल रहे हैं? अमेरिका ने हाल ही में भारत को उन देशों की सूची में शामिल किया है जो वैश्विक ड्रग मार्गों और रासायनिक आपूर्ति शृंखलाओं में “महत्वपूर्ण भूमिका” निभा रहे हैं। इसी बीच अडानी समूह के मुंद्रा पोर्ट पर पकड़ी गई करीब ₹23,000 करोड़ की हेरोइन की खेप ने सुरक्षा एजेंसियों, राजनीतिक हलकों और आम जनता — सभी को हिला कर रख दिया। इस बरामदगी का सीधा संबंध अफ़ग़ानिस्तान से निकला और जांच में आतंकवादी फंडिंग से जुड़े गंभीर संकेत भी मिले।

1. उत्पत्ति: कंधार से मुंद्रा तक

खेप अफ़ग़ानिस्तान के कंधार से भेजी गई थी। इसे “सेमी-प्रोसेस्ड टेल्क स्टोन्स” यानी अर्ध-प्रसंस्कृत टेल्क पत्थरों के रूप में घोषित किया गया। माल का रूट: कंधार – ईरान (बंदर अब्बास पोर्ट) – मुंद्रा पोर्ट, गुजरात।

2. बरामदगी: टेल्क स्टोन्स में छिपा ज़हर

15 सितंबर 2021 को दो कंटेनर मुंद्रा पोर्ट पर पहुँचे। DRI की जांच में लगभग 2,988.21 किलोग्राम हेरोइन बरामद की गई। हेरोइन को टेल्क पत्थरों की निचली परत में छिपाया गया, ऊपर साधारण पत्थर रखे गए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप का मूल्य लगभग ₹23,000 करोड़ था।

3. आरोपी और जांच एजेंसियाँ

अफ़ग़ान, उज़्बेक और भारतीय नागरिक गिरफ्तार। DRI, NIA और अन्य केंद्रीय एजेंसियाँ जांच में शामिल। बरामदगी के बाद आतंकवादी फंडिंग की जांच भी शुरू हुई।

4. फर्जी इंपोर्टर्स और ठिकानों का खुलासा

इंपोर्टर्स के पते फर्जी पाए गए। दस्तावेज़ों में दिखाए गए कार्यालय और कंपनियाँ वास्तविक नहीं थीं। एजेंसियाँ शेल कंपनियों और उनके असली लाभार्थियों की जांच कर रही हैं।

5. सुरक्षा और राजनीतिक सवाल

तार लश्कर-ए-तैयबा (LeT) जैसे प्रतिबंधित संगठनों से जुड़ने के संकेत। बंदरगाह पर सुरक्षा व्यवस्था इतनी ढीली कैसे रही कि 3 टन हेरोइन बिना पकड़े आ सकी? मुंद्रा पोर्ट के प्राइवेट संचालन और पारदर्शिता पर सवाल।

6. मणिपुर की वरिष्ठ महिला अधिकारी का इस्तीफा

थौनाोजम ब्रिंदा, मणिपुर की वरिष्ठ महिला पुलिस अधिकारी (Additional Superintendent of Police, NAB), ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने गिरफ्तार ड्रग माफिया लुकोसाई जोउ को छोड़ने का दबाव डाला। ब्रिंदा ने यह हलफनामा इम्फाल हाई कोर्ट में पेश किया। आरोपों के बाद ब्रिंदा ने सम्मानित पुलिस मेडल लौटाया, यह उनके नैतिक फैसले का प्रतीक माना गया। यह मामला मणिपुर में राजनीतिक दबाव और ड्रग तस्करी के बीच संबंधों को उजागर करता है और राज्य पुलिस की स्वतंत्रता पर सवाल उठाता है।

7. अंतरराष्ट्रीय आयाम और अंडरवर्ल्ड नेटवर्क

अफ़ग़ानिस्तान दशकों से हेरोइन उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र। तालिबान शासन के दौरान ड्रग रूट्स पर अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की चिंता। “गोल्डन क्रेसेंट” रूट में अफ़ग़ानिस्तान, ईरान और पाकिस्तान शामिल। दाऊद इब्राहिम और उससे जुड़े सिंडिकेट्स का नाम अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध सूचियों में शामिल। भारतीय सुरक्षा एजेंसियाँ ऐसे नेटवर्कों की संभावित भूमिका की गहन जांच कर रही हैं।

बड़े सवाल

  • क्या यह नेटवर्क केवल ड्रग्स का है, या आतंकवादी फंडिंग से जुड़ा है?
  • अमेरिका द्वारा भारत को ड्रग रूट्स की सूची में शामिल करना किस गहरी चिंता का संकेत है?
  • प्राइवेट पोर्ट्स पर सुरक्षा जिम्मेदारी किसकी है — कंपनी की या राज्य की?
  • क्या राजनीतिक या कारोबारी स्तर पर कोई ‘मौन संरक्षण’ इस नेटवर्क को मज़बूत बना रहा है?

यह केस केवल तस्करी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक पारदर्शिता और राजनीतिक जवाबदेही पर गहरा सवाल खड़ा करता है।

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