आनंद कुमार-
“राजीव तलवार की गिरफ्तारी — बेबाक पत्रकारिता पर एक और वार?”
उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ जिले से एक बार फिर पत्रकारिता की आज़ादी पर बहस छिड़ गई है। Live Ullutv से जुड़े और विभिन्न सामाजिक व प्रशासनिक मुद्दों पर बेबाक राय रखने वाले पत्रकार राजीव तलवार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
सूत्रों के अनुसार, उनके खिलाफ “सरकारी काम में बाधा डालने” का मामला दर्ज किया गया है। हालांकि यह पहली बार नहीं है — इससे पहले भी 3 से 4 बार उन्हें जेल भेजा जा चुका है।
हर बार उनके समर्थक और स्थानीय लोग यही कहते हैं कि राजीव तलवार को उनकी निडर पत्रकारिता की कीमत चुकानी पड़ रही है। राजीव तलवार अपने तीखे सवालों, धारदार शब्दों और तंज़भरी रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।
उनकी कुछ प्रस्तुतियाँ भले ही आपत्तिजनक मानी गई हों, लेकिन उनकी बातों में जनता के मुद्दों की सच्चाई और तंत्र की लापरवाही की झलक हमेशा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार ऐसे मुद्दे उठाए जिन पर प्रशासन ने कार्रवाई करने के बजाय उन पर कार्रवाई की।
उनका कहना है — “अगर तलवार साहब की बातों को गंभीरता से लिया जाता, तो शायद कई स्थानीय समस्याएँ पहले ही सुलझ चुकी होतीं।”
पत्रकार जगत के कुछ वरिष्ठ लोगों ने भी तलवार की गिरफ्तारी को प्रेस की आज़ादी पर हमला बताया है। वहीं प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई है।
राजीव तलवार की यह गिरफ्तारी एक बार फिर यह सवाल छोड़ जाती है — क्या आज के दौर में सत्ता से सवाल पूछना ही अपराध बन गया है?
आजमगढ़ न्यूज-
आजमगढ़ से बड़ी खबर — सरकारी कार्य में बाधा और अभद्र व्यवहार के आरोप में राजू तलवार गिरफ्तार
आजमगढ़: चौकी प्रभारी सिविल लाइन उपनिरीक्षक हरिकेश कुमार राय अपनी पुलिस टीम के साथ छठ पूजा पर्व को सकुशल संपन्न कराने हेतु क्षेत्र में भ्रमण कर रहे थे। इसी दौरान पुलिस लाइन गेट के पास राजीव तलवार उर्फ राजू तलवार पुत्र प्रद्युम्न नारायण सिंह, निवासी राहुल नगर मडया, थाना कोतवाली नगर, आम राहगीरों से अभद्र भाषा में गाली-गलौज और विवाद करता पाया गया।
राजू तलवार के इस व्यवहार से मौके पर अफरा-तफरी और भय का माहौल बन गया। पुलिस द्वारा शांत कराने का प्रयास किया गया तो उसने पुलिस टीम को भी भद्दी गालियाँ दीं और सड़क पर पड़े ईंट-पत्थर उठाकर पुलिस पर फेंकने की कोशिश की।
स्थिति गंभीर होती देख चौकी प्रभारी सिविल लाइन ने खुद जान जोखिम में डालकर अभियुक्त को पकड़ने का प्रयास किया। इस दौरान राजू तलवार ने पुलिस कर्मियों से धक्का-मुक्की और हाथापाई की। गिरफ्तारी के समय उसने स्वयं को “उल्लू टीवी” का पत्रकार बताते हुए पुलिसकर्मियों को जान से मारने की धमकी दी।
घटना के संबंध में थाना कोतवाली में धारा 115(2), 125, 121(1), 132, 352, 351(3) भारतीय न्याय संहिता के तहत मुकदमा दर्ज कर अभियुक्त को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।
अभियुक्त का आपराधिक इतिहास:
- मुकदमा अपराध संख्या 554/2025 धारा 115(2), 125, 121(1), 132, 352, 351(3) BNS, थाना कोतवाली, आजमगढ़
- मुकदमा अपराध संख्या 203/2017 धारा 186, 228, 353 भारतीय दंड संहिता थाना कोतवाली
- मुकदमा अपराध संख्या 397/2019 धारा 332, 342, 504, 506 भारतीय दंड संहिता व 67/67B आईटी एक्ट, थाना कोतवाली
- मुकदमा अपराध संख्या 107/2021 – धारा 143, 147, 323, 307, 504, 506, 427, 332, 333, 353, 186, 188, 153, 269 भारतीय दंड संहिता व 7 CLA एक्ट, थाना कोतवाली
- मुकदमा अपराध संख्या 175/2024 धारा 153A, 384, 504 भारतीय दंड संहिता थाना कोतवाली
- मुकदमा अपराध संख्या 278/2024 धारा 384, 501, 504 भारतीय दंड संहिता थाना कोतवाली
- मुकदमा अपराध संख्या 518/2024 धारा 132, 267, 296, 352, 356(2) BNS व 12 न्यायालय अवमान अधिनियम, थाना कोतवाली, आजमगढ़
राजू तलवार पहले भी कई बार विवादों को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं। पुलिस ने बताया कि ऐसे तत्वों पर आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।



Uma Shankar
March 13, 2026 at 4:59 pm
राजीव तलवार जैसे बदचलन लोगों को सिद्धार्थ गौतम जी का ज्ञान ही नहीं है, जो स्पष्ट कहते हैं कि यदि किसी ने गंदे शब्दों का उपयोग किया है, तो वे शब्द यदि दूसरे ने नहीं ग्रहण किये, तब वे उसी के पास लौटते हैं। वह पत्रकारिता के नाम पर एक बदनुमा दाग़ हैं, उन्होंने घटिया शब्दों का उपयोग किया, इसलिए उन्हें भोगना पड़ रहा है। As you sow, so shall you reap (ऐस यू साउ, सो शैल यू रीप), अर्थात जैसे बोओगे, वैसे ही काटोगे।
Uma Shankar
March 14, 2026 at 8:05 am
इसका अर्थ यह नहीं है कि आलोचना बुरी बात है और आज़मगढ़ क्षेत्र की समस्याएँ नहीं व्यक्त हो। जी नहीं। आलोचना अच्छी बात है, किंतु आलोचना/क्रिटिसिज़म के नाम पर गाली-गलौज और घटिया शब्दों का प्रयोग किस सीमा तक जायज़ है? वह अपनी बात को तमीज़दार ढँग से भी व्यक्त कर सकते हैं। महात्मा गाँधी जी के विचारों को लोग नहीं समझते हैं। वह नामर्द के बजाए “किन्नर” शब्द का प्रयोग कर सकते हैं। इनकी हिन्दी तथा इंग्लिश ज्ञान भी सीमित होगा। वह दूसरा कोई नहीं है, बल्कि वह ख़ुद ही शत्रु हैं और ख़ुद ही मित्र। अतुल अग्रवाल भी इसी प्रकार से है।